लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 15, 2011 पर प्रकाशित
प्रस्तुति: राजेन्द्र तिवारी औद्योगीकरण के प्रसार से पिछले 50 वर्षो में कृषि योग्य भूमि के क्षेत्रफल में लगातार कमी हो रही है। मगर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में श्रीविधि (System of Rice Intensification – SRI)वरदान साबित हो सकती है। उत्तराखण्ड के पहाड़ी भूभाग के परिपे्रक्ष्य में कृषि जोतें छोटी एवं बिखरी होने के साथ-साथ कुल [...]
Posted in विविध, ज़मीन | Tagged farming, ravi chopra, sri method, sri technique, system of rice intensification, traditional methods, पर्यावरण |
लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 3, 2010 पर प्रकाशित
कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या की खबरें अब तक विदर्भ और आन्ध्र प्रदेश आदि राज्यों से सुनते थे। परन्तु पिछले दिनों पौड़ी और पिथौरागढ़ से आई खबरों ने पहाड़ी किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति की ओर ध्यान खींचा है। यदि इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो यहाँ भी किसानों की आत्महत्यायें [...]
Posted in जंगल, विविध, ज़मीन | Tagged agriculture, agriculure policy, farmer loan, farmers, policy, uttarakhand farming |
लेखक : गणेश रावत :: अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2010:: वर्ष :: 34 :October 2, 2010 पर प्रकाशित
उधमसिंहनगर जिले में खनन के पट्टाधारक नियमों को ताक में रखकर खनन के काम में जुटे हैं। निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खुदान कर कानूनों की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं तो पट्टे लेने के समय जारी नियमों और दिशानिर्देशों को भी ठेंगे पर रख दिया है। एक जागरूक पत्रकार द्वारा सूचना के अधिकार के [...]
Posted in भ्रष्टाचार, विविध, ज़मीन | Tagged corruption news, gaula river, girda edition, girda edition of nainital samachar, udhamsingh nagar |
लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 18, 2010 पर प्रकाशित
‘‘भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की 70 प्रतिशत जनसंख्या खेती पर आश्रित है,’’ यह वाक्य हम कक्षा दो से पढ़ते आये हैं। लेकिन उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद भी जनता के खेवनहारों ने कृषि की इस अमूल्य निधि की तरफ आँख उठाकर देखने की जरूरत नहीं समझी। जिस प्रकार पहाड़ों की सोना उगलने वाली [...]
Posted in जंगल, विविध, ज़मीन | Tagged agriculture, farmers, munsyari, uttarakhand agriculture |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 30, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : माधवानन्द मैनाली ‘मधु’ मडुआ, गहत, पहाड़ी आलू, भट्ट, पहाड़ी गाय का दूध, घी और गौमूत्र आदि पहाड़ी उत्पादों ने बाजार में अपना प्रभुत्व जमाना आरम्भ कर दिया है। अब चुनौती है कि इनके उत्पादन को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाये। उत्तराखण्ड के 55.66 लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में 34.66 हेक्टेअर वन क्षेत्र है। बंजर [...]
Posted in जल, विविध, ज़मीन | Tagged agriculture, agriculure policy, organic products, traditional methods |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 29, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : हरीश फुलारा बढ़ते प्रदूषण एवं उससे मानव जीवन पर पड़ रहे कुप्रभाव को कम करने हेतु भारत सरकार द्वारा वर्ष 1980 में वन अधिनियम लागू किया गया। इसके अन्तर्गत वन भूमि पर गैर वानिकी कार्य बिना भारत सरकार की पूर्वानुमति के नहीं किये जा सकते। नीति निर्धारकों द्वारा इसका दुरुपयोग किये जाने के [...]
Posted in जंगल, जल, विविध, ज़मीन | Tagged forest, forest fire, forest law, forest rights act, government policies |
लेखक : महेश जोशी :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 13, 2010 पर प्रकाशित
तराई-भाबर में बसे थारू-बोक्सा आदिवासियों की जमीन हड़पने व बंगाली विस्थापितों को जमीन से ही बेदखल कर देने की प्रवृत्ति के खिलाफ उत्तराखण्ड किसान सभा द्वारा अभियान छेड़ा गया है। इस अभियान में आ रही अड़चनों को लेकर उत्तराखण्ड किसान सभा के प्रान्तीय अध्यक्ष एवं माकपा नेता बच्चीराम कौंसवाल पिछले दिनों जिलाधिकारी उधमसिंह नगर व [...]
Posted in विविध, ज़मीन | Tagged bangali migrants, farmer loan, farmers, tarai farm, tarai land, uttarakhand kishan sabha |
लेखक : उमा भट्ट :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
[पिछ्ले अंक में आपने 17 से 22 जनवरी तक चली पदयात्रा की पहली रपट पढ़ी...आज पढ़िये उससे आगे] लोध में सम्पन्न हुई बैठक में पता चला कि इन गाँवों की जमीन बिल्कुल बिकी नहीं है, क्योंकि यहाँ सड़क भी अब जाकर आ रही है तथा हिमालय का दृश्य भी यहाँ से उतना सुन्दर नहीं दिखता। [...]
Posted in जंगल, जल, होली अंक, ज़मीन | Tagged builders lobby, building mafia, development, holi, holi edition 2010 |
लेखक : महेश जोशी :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित गाँवों में जंगली जानवरों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। खुंखार जंगली जानवरों से खेती-पाती तो चौपट हो ही गई जान का खतरा भी बढ़ते जा रहा है। आलू, गडेरी व अन्य साक-शब्जियों के लिए प्रसिद्ध इस इलाके में धान, गेहूँ आदि की फसल भी काफी अच्छी होती थी [...]
Posted in जंगल, पर्यटन, विविध, ज़मीन | Tagged binsar, government policies, wild life menace, wildlife |
लेखक : उमा भट्ट :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
महिला जागृति महासंघ धारी और रामगढ़ (जिला नैनीताल) ने अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जनता का ध्यान खींचने तथा उनको जोड़ने के उद्देश्य से 17 से 22 जनवरी तक पदयात्रा की। लगभग 5 सालों से ये संगठन इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। महिला उत्पीड़न के मामलों से शुरू होकर अब ये जल, [...]
Posted in जंगल, जल, पर्यटन, भ्रष्टाचार, यात्रायें, विविध, ज़मीन | Tagged cloud nine, globalisation, illegal construction, migration from uttarakhand, mukteshwar, ramgarh |
पृष्ठ 1 कुल 3 पृष्ठों में..पृष्ठ : 123»
आपकी टिप्पणीयाँ