संगठित होना होगा जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये
प्रस्तुति : रैमाशी रावत जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये हमें संगठित होना पड़ेगा। यदि हम सत्ता से उम्मीद लगाकर आगे चलना चाहेंगे तो सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी। यह कहना था स्वामी अग्निवेश का। वे उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा आयोजित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व्याख्यानमाला में ‘वैश्वीकरण के दौर में ‘जल, जंगल, [...]
राजमा के उत्पादन से सम्पन्न हो रहे हैं उर्गम घाटी के किसान
पर्वतीय क्षेत्र की विशेष जलवायु में बगैर रासायनिक खाद व कीटनाशकों के पैदा होने वाले कृषि उत्पाद अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं। इस स्वाद का एक अन्य कारण वे परम्परागत बीज भी हैं, जो सदियों से यहाँ पर प्रयोग होते रहे हैं। हालाँकि उत्पादन बहुत कम है, किन्तु सुस्वादुपन व पौष्टिकता के कारण [...]
रामगढ़ के नौजवान माफिया की सरपरस्ती में जी रहे हैं
प्रस्तुति : बची बिष्ट नैनीताल का एक खूबसूरत इलाका रामगढ़ है और वहाँ से आगे मुक्तेश्वर तक ऊँची चोटियां हैं। इस इलाके में दुत्कानेधार, सतबुँगा, सूपी, लोद, गल्ला जैसे कई गाँव बसे हैं। यहाँ के निवासियों के जीवनयापन का साधन है सेब, आड़ू, खुबानी, नाशपाती के छोटे-छोटे बाग और आलू, गोभी, मटर इत्यादि सब्जियों का [...]
अभी तो खड़िया से आँखें चौधियायी हैं
प्रस्तुति : पंकज कुमार कांडपाल काण्डा पड़ाव एक छोटी सी बाजार है, जहाँ पर राशन-पानी से लेकर बर्तन, सब्जियाँ, टी.वी. सेट, कैमरा, फोटो स्टूडियो, दवाइयाँ इत्यादि उपलब्ध हो जाती हैं। इस क्षेत्र के कई गाँवों में से एक गांव है ‘बजीना’। काण्डा पड़ाव से इस गाँव के आधे रास्ते तक मोटर सड़क पहुँच चुकी है। [...]
समस्या का समाधान नहीं है भू अध्यादेश
कांग्रेस सरकार द्वारा दो बार, पहला 12 सितम्बर 2003 को और दूसरा 15 जनवरी 2004 को, भू अध्यादेश लाये जाने के बाद भाजपा की खंडूरी सरकार भी 2 मई 2007 को एक नया भू अध्यादेश ले आई। क्या माना जाये कि राज्य की राजनीति में जमीन का सवाल सचमुच प्राथमिकता में आ गया है ? [...]
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