साठ साल पुराने पौड़ी की यादें
मैं अपने गाँव दोलिंडा से 60 साल पहले पढ़ने के लिये पौड़ी आया था। तब पौड़ी छोटा और बहुत ही सुन्दर था। वहाँ तब दो हाईस्कूल थे, एक अमेरिकन प्रेसिबेटेरियन चर्च द्वारा संचालित मेसमोर और दूसरा डी. ए. वी.। मेसमोर पुराना और प्रसिद्ध था, जिसमें पढ़ने के लिये विद्यार्थी सुदूर सीमान्त क्षेत्रों तक से आते [...]
अपने अपने कैलास –1
जिस दिन नैनीताल से दिल्ली को प्रस्थान करना था, 9 जून को, गिर्दा का फोन आया, अध्ययन यात्रा होगी यह, ऐसा सोचते हैं हम। शब्द बहुत अच्छा लगा, अध्ययन यात्रा। नैनसिंह की यात्राओं को अन्वेषण यात्राएं कहा गया था। गिर्दा एक और मजाक कर रहे थे फोन पर, जाँठी लेकर माता की तरह चल दोगी [...]
अभी भी आँखों के सामने रेंगता है मून लैंडिंग का नजारा
सन 1969 में मैं लगभग साल भर के लिये ट्रेनिंग के लिये युनाइटेड किंगडम गया हुआ था। नेशनल कोल बोर्ड (अब ब्रिटिश कोल) के सौजन्य से विश्वविद्यालयों, कोयला खानों से संबंधित गवेषणा संस्थानों, खनन के यन्त्रोपकरणों के निर्माताओं, प्लानिंग और यंत्रीकरण के कामों में संलग्न आयोजकों तथा खनन सामग्री के विकास व परीक्षण की शालाओं [...]
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