पाठशाला या पाकशाला ?
सरस्वती के मंदिर (स्कूल) शहरों में अंग्रेजी भाषा की बदौलत भले ही चल रहे हों, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के प्राथमिक विद्यालयों की हालत दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है। शिक्षा व्यवस्था दोपहर भोजन येाजना लागू होने के बाद और बदतर हुई है। अब गुरु जी की प्राथमिकता पढ़ाने के बजाय दोपहर में बच्चों को [...]
छात्रवृत्ति में घोटाले से गुस्सा
गोविन्द चावला छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपित के खिलाफ कोई कार्रवाही न होने से बेरीनाग महाविद्यालय छात्रसंघ ने आंदोलन की धमकी दी है। इस घोटाले मे अभी तक कोई कार्रवाही न होने से उच्च शिक्षा विभाग की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई है। एक वर्ष से माँग किये जाने के बाद भी शासन [...]
नगर पंचायत नहीं चाहते पोखरी के लोग
पोखरी को नगर पंचायत बनाए जाने का वहाँ के बाशिन्दों ने विरोध किया है। प्रस्तावित नगर पंचायत में आने वाली 6 ग्राम पंचायतों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। पोखरी, वल्ली, गुनियाला, विशाल, देवर वल्ला, देवस्थान नामक इन गाँवों की कुल जनसंख्या 4,037 है। इन गाँवों में 459 परिवार गरीबी रेखा के नीचे [...]
‘धारा पाँच’ के चक्कर में फँसी श्रीनगर परियोजना
वर्षाजनित आपदाओं को क्या प्रकृति के कोप के रूप में ही देखा-समझा जाना चाहिए या मनुष्य द्वारा प्रकृति से छेड़छाड़ का भी इस विभीषिका में कोई हाथ है ? उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद असीगंगा द्वारा मचाई तबाही हो या फिर श्रीनगर और उसके आसपास अलकनंदा के बढ़े जलस्तर से हुआ नुकसान, यहाँ तो [...]
बेखौफ हैं खनन के तस्कर
सुशील खत्री बाढ़ आदि के खतरों को देखते हुए हर वर्ष जुलाई माह से सितंबर तक खनन के कार्य पर प्रशासनिक रोक रहती है। पट्टाधारकों को इस बात की जानकारी भी दी जाती है। लेकिन खनन माफिया द्वारा इन नियमों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। रामगंगा नदी से इन दिनों भारी मात्रा में अवैध [...]
नहीं मिला वन्य जीवों द्वारा किये गये नुकसान का मुआवजा
गणेश रावत वन्यजीव उत्तराखंड के किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गये हैं। मगर खेती और जान-माल के नुकसान की एवज में मिलने वाले मामूली मुआवजे के लिए उन्हें लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा बजट मुहैया कराने में हीलाहवाली से वन विभाग ने लोगों को मुआवजा देने में हाथ खड़े कर [...]
क्या चुनने को बचा इस बेशर्म राजनीति में ?
अब राजनीतिक दल भ्रष्टाचार में किसी तरह का पर्दा रखने की बात नहीं करते। सब कुछ ‘खुला खेल फर्रुखाबादी’ होता है। निहायत बेशर्मी और हेकड़ी के साथ कि ‘हमने जो कुछ करना था कर लिया, तुम्हें जो कुछ करना था तुम कर लेना।’ उन्हें मालूम है कि अन्ततः चुनाव के जरिये यह लोकतंत्र चलना है [...]
अभी बेजार है उत्तरकाशी
अरण्य रंजन एवं नागेन्द्र दत्त क्षेत्रफल के लिहाज से उत्तराखण्ड के सबसे बड़े जनपदों में से एक, उत्तरकाशी खूबसूरती की दृष्टि से जीता जागता काश्मीर है। यहाँ के लोगों का स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों जल, जगंल, जमीन से हमेशा से नाता रहा है। मगर हाल के सालों में यह क्षेत्र कुदरत की नाराजगी के जख्मों से [...]
घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 18
मूल रूप से जिला बुलन्दशहर के जहाँगीराबाद के रहने वाले, ज्योतिष विद्या के जानकार पंडित गणेश दत्त शर्मा करीब 125 साल पूर्व अल्मोड़ा आकर लाला बाजार में हलवाई का कार्य करने लगे। 2-3 साल बाद वे हल्द्वानी आ गये। गणेश दत्त शर्मा के पोते ओमदत्त, जो अब मुख्य गुरुद्वारे के पीछे की लाईन में घड़ीसाज [...]
कागजों में चल रहा है कृषि विज्ञान केन्द्र जाखधार
कागजों में वर्मी कम्पोस्ट तो फाइलो में उग रही हैं विशिष्ट सब्जियाँ। ऐसा विचित्र कारनामा कर दिखाया है कृषि विज्ञान केन्द्र जाखधार के वैज्ञानिकों ने। लोगों को बेहतर काश्तकार बनाने का दावा करने वाले वैज्ञानिकों के कौशल की बानगी इसी बात में देखी जा सकती है कि पॉलीहाउस क्षतिग्रस्त पड़ा है, इसके अन्दर कोई सब्जी [...]
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