प्राप्ति स्वीकार : ’चल तुमड़ी बाटै-बाट’
यह सही है कि टेलीविजन, कम्प्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल इत्यादि में व्यस्त आज के बच्चों की दूरी किताबों से भी उतनी ही बड़ी है, जितनी कि प्रकृति या अपनी मिट्टी से। लेकिन इसके पीछे बच्चों की अपेक्षा बड़ों का दोष कहीं ज्यादा है। वे बच्चों को अच्छी किताबों से परिचित कराने का प्रयास करते नहीं दिखते। [...]
बलि की बलि चढ़ा कोट भ्रामरी का मेला
कुमाऊँ-गढ़वाल के लगभग सीमान्त में स्थित कोट भ्रामरी के मंदिर में होने वाला विख्यात मेला इस बार नहीं हो सका। मेले के आयोजकों व प्रशासन की खींचतान के चलते पूजा परम्पराएँ नहीं हो सकीं। उत्सुक श्रद्धालु व मेलार्थी पहुँचे जरूर, किन्तु पुलिस व प्रशासन के खौफ से निराश वापस लौटे। कोट भ्रामरी में प्रति वर्ष [...]
नाथू सिंह के जाने का मतलब
80 वर्ष की उम्र में नाथू सिंह का दुनिया से विदा होना तथाकथित सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में बड़ी खबर नहीं बना। उनके देहान्त के अगले दिन अखबार में छपी एक कॉलम की खबर में उन्हें ‘कांग्रेस का एक कार्यकर्ता’ के रूप में जो श्रद्धांजलि दी गई थी, उससे मुझे आघात लगा। जिस व्यक्ति ने जीवन [...]
शिक्षक तय नहीं कर पाये स्थानान्तरण का मामला
विनोद प्रसाद 28 से 30 अगस्त 2012 तक कोटद्वार में सम्पन्न राजकीय शिक्षकों का प्रान्तीय अधिवेशन कई मायनों में अभूतपूर्व रहा। एक, शिक्षकों की भागीदारी पाँच हजार से अधिक। दो, मंच पर बैठने और माइक पर बोलने की होड़। तीन, महिला शिक्षकों की चुनाव में प्रत्यक्ष भागीदारी। चार, धनबल का खुला प्रदर्शन। पाँच, नाकारा प्रतिनिधियों [...]
‘महिला हिंसा की जड़ें समाज में हैं’
19 अगस्त 2012 को क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा के तत्वावथान में प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच पैठपड़ाव रामनगर में ‘वर्तमान व्यवस्था व महिलाओं पर बढ़ते हमले’ विषय पर एक कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्या भ्रूण हत्या पर स्लाइड शो किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के जनगीत ‘ओ जैंता एक दिन तो आलो, उ [...]
नैनीताल स्वच्छता दिवस का पाँचवा साल
बरस 2011 और 12 को भारत में चेतना के सालों की तरह देखा जायेगा। अन्ना, रामदेव, ईरोम शर्मिला या परमाणु बिजली घरों और नदी-पानी के आंदोलनों को देश ने गरमाहट दी। लोग सड़कों पर उतरे, मीडिया को नये चेहरे मिले। विचारशील लोगों ने अपनी बात मजबूती से कहने की कोशिश की। ऐसे में नैनीताल शहर [...]
‘सत्य की मशाल’ नैनीताल में
चीन सरकार द्वारा किये जा रहे तिब्बतियों के दमन के विरोध में निर्वासित तिब्बती संसद द्वारा निकाली जा रही ‘सत्य की मशाल’ के 27 सितम्बर को नैनीताल पहुँचने पर यहाँ रह रहे तिब्बतियों व नगर के गणमान्य नागरिकों ने जोरदार स्वागत किया। नागरिकों ने निर्वासित तिब्बतियों की आजादी के संघर्ष को जायज ठहराते हुए अभियान [...]
रचना दिवस कार्यक्रम सम्पन्न
मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला एवं शोध समिति द्वारा अल्मोड़ा में आयोजित रचना दिवस महोत्सव में कुमाउनी बोली के प्रचार-प्रसार में किये गये उल्लेखनीय योगदान के लिए देवकी महरा को ‘समिति सम्मान’, उदयशंकर व चन्द्रशेखर पन्त की स्मृति में आयोजित शास्त्रीय संगीत संध्या में चन्द्रशेखर तिवारी को ‘कौस्तुभ सम्मान’, सरोद वादन के लिए स्मित तिवारी [...]
छोटा मुँह छोटी बात: चुप्पी तोड़ो,बोलो
आप अन्ना और उनके सहयोगियों के आंदोलन के प्रति संशयग्रस्त रहे हों या असहमत, तो भी इतना तो मानेंगे कि आंदोलन के पहले दौर में जनता की जबर्दस्त भागीदारी ने जन लोकपाल के मामले में एक बार सरकार को झुकने पर विवश तो कर ही दिया था। यह बात दीगर है कि उसके बाद किस [...]
मेरे लिये वह गिर्दा नहीं, ठसकदार ‘नानू मम्मा’ था
रमेश चन्द्र मिश्र ‘‘न जाने क्यों, होता है ये जिन्दगी के साथ ? अचानक से मन, किसी के जाने के बाद, करे फिर उसकी याद, छोटी-छोटी सी बात, न जाने क्यों?’’ यह संस्मरण लिखते समय यह गीत बार-बार मेरी चेतना को सहला रहा है। अपना बचपन और अपने मामा का तारुण्य याद आ रहा है। [...]
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