अभी बना हुआ है परिसम्पत्तियों का लफड़ा
राज्य गठन के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसम्पत्तियों के विभाजन के मामले निस्तारित न हो पाने से कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इनमें सिंचाई विभाग, जिसकी करीब 12 अरब की सम्पत्ति आज भी उत्तर प्रदेश के कब्जे में है, का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। [...]
सफरानामा पूना से मारूति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 1
यह ठीक दो साल पहले की बात है। दिन- वार ठीक से याद नहीं। अक्टूबर का महीना था। उन दिनों रामलीला (ऐं) चल रही थी। अल्मोड़ा से तीन जने दिल्ली के लिये रवाना हुए – बागेश्वर से केशव, अल्मोड़ा से रज्जन बाबू और मैं। हमें पूना से एक मारूती 800 कार बागेश्वर पहुंचानी थी। केशव [...]
पंचेश्वर बाँध के डूब क्षेत्र सरयू घाटी में जन जागरण अभियान
17 सितम्बर की शाम मैं, शंकर सिंह, लक्ष्मण और वरिष्ठ साथी डॉ. रमेश पंत पव्वाधार कार्यालय पहुँचे। हम सबने इरादा किया कि सरयू घाटी के गाँवों में बांध विरोध के लिये संदेश पहुँचाया जाये। इससे पूर्व ‘उत्तराखंड जन मैत्री संगठन’ का गठन कर पर्चे-पोस्टरों के माध्यम से अभियान की शुरूआत कर दी गयी थी। पंचेश्वर [...]
बुलन्द हो रहे हैं चोरों के हौसले
चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर में चोरों के हौंसले बुलंद हो चुके हैं। इस बात का पता 10 तारीख की रात को पुलिस थाने से मात्र सौ मीटर की दूरी पर स्थित ऋषि पुस्तक केन्द्र में शटर तोड़कर की गई चोरी से चलता है। रात लगभग 12 बजे से बारिश में तेजी आने से गश्त के [...]
मेरि कोसि हरै गे कोसि
जोड़ – आम-बुबु सुणूँ छी गदगदानी ऊँ छी रामनङर पुजूँ छी कौशिकै की कूँ छी पिनाथ बै ऊँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। कौशिकै की कूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। क्या रोपै लगूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि। क्या स्यारा छजूँ छी मेरि कोसि हरै गे कोसि।। घट-कुला रिङू छी मेरि [...]
कौन कहता है कि गौरव नहीं रहा…..
3 दिसम्बर दिन में 11.45 बजे हरीश पंत जी का पंतनगर से फोन आया। घबरायी सी आवाज में उन्होंने बताया कि ‘एक बहुत बुरी खबर है।’ मैंने पूछा कि ‘क्या हुआ ? सब ठीक है न’, उन्होंने कहा ‘गौरव नहीं रहा।’ मुझे कुछ समझ नहीं आया इसलिये मैंने पूछ लिया कि ‘कौन गौरव ?’ उन्होंने [...]
मुझे अपनी माँ में दिखता था बेटी का चेहरा
26 नवम्बर 2007 को माँ ने मेरी गोद में अंतिम सांस ली। अभी-अभी पांच मिनट पहले उसने मेरे सिर और गालों को एक हाथ से सहलाया था और मेरी गोद का सहारा लिया था। मगर अब उसका निस्तब्ध शरीर मेरे सामने था और सर मेरी गोद में। मैं उसे निहारते हुए सैंतालीस साल पूर्व की [...]
त्रिलोचन के बिना
बीते 9 दिसम्बर को प्रगतिशील हिन्दी कविता का चौथा कोना भी सूना हो गया। शमशेर बहादुर सिंह, नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल के बाद अब त्रिलोचन शास्त्री भी नहीं रहे। 91 वर्ष की वयोवृद्धता के अलावा वे काफी समय से बीमार भी थे। उत्तराखंड से त्रिलोचन का निकट संपर्क रहा और उनकी छोटी पुत्रवधू सुश्री उषा सिंह [...]
मंत्री पुत्र का विवाह, उत्तराखंड विधान सभा में अवकाश
जनप्रतिनिधि जनहित के कार्य करें या नहीं, विधायी जिम्मेदारियाँ निभायें अथवा नहीं, यह अब महत्वपूर्ण नहीं रह गया है। लेकिन विवाह, मुंडन, नामकरण, जन्म-उत्सव व मृत्यु आदि अवसरों पर अपने खास लोगों के वहाँ जाना वे पहला कर्त्तव्य मानते हैं। उत्तराखंड क्रान्ति दल के पहले विधायक जसवन्त सिंह बिष्ट अपने राजनैतिक जीवन के प्रथम चरण [...]
संगठित होना होगा जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये
प्रस्तुति : रैमाशी रावत जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये हमें संगठित होना पड़ेगा। यदि हम सत्ता से उम्मीद लगाकर आगे चलना चाहेंगे तो सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी। यह कहना था स्वामी अग्निवेश का। वे उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा आयोजित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व्याख्यानमाला में ‘वैश्वीकरण के दौर में ‘जल, जंगल, [...]
आपकी टिप्पणीयाँ