आशल-कुशल : 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2012
एक बार मौसम गर्म हो जाने के बाद पहाड़ों पर पुनः ठंड बढ़ने से लोग अचंभे में हैं। विधान सभा के पहले सत्र के समापन के साथ मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा विजेता के रूप में उभरे। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता महेन्द्र सिंह माहरा द्वारा राज्य सभा सीट जीते जाने के साथ ही विधान सभा सत्र के दौरान [...]
गाँवों की सेहत का आधार है ग्राम स्वच्छता समितियाँ
उत्तराखंड के निर्माण का सपना तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक गाँव मजबूत नहीं हो जाते। मगर विकास प्रक्रिया में ग्रामीणों की भागीदारी न होना, गांव की आवश्यकता के अनुसार योजना प्रारूप न बन पाना एक बड़ी अड़चन है। जनपद पिथौरागढ़ के दो गाँवों सटगल व रावलगांव (जाख-पुराण) उदाहरण लेते हैं। बिण विकास [...]
तो अन्ततः सफल हुआ शीतकालीन अभियान
आखिरकार भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के दल को शीतकालीन अभियान में पहली सफलता मिल गई। जाड़ों में हिमालयी रास्ते व दर्रे बर्फ से पट जाते हैं। आईएमएफ ने जाड़ों में इसी वर्ष से क्लाइम्बिंग एंड स्कीइंग का अभियान शुरू किया था। पहला अभियान लेह में सतो कांगड़ी में असफल हो गया। इस बार आईएमएफ ने आईटीबीपी, [...]
अराजकता ही अराजकता है कुमाऊँ विश्वविद्यालय में
मनीष पांडे काका कालेकर ने कहीं पर कहा था कि ‘सरकारी कभी असरकारी नहीं होता’।यह युक्ति ठीक लागू होती है कुमाऊँ विश्वविद्यालय पर। विश्वविद्यालय जिस तरह परीक्षा तिथि आगे बढ़ा रहा है, उसे देख कर तो ऐसा ही लगता है। अब यह तिथि 9 अप्रेल से 16 अप्रेल कर दी गई है, जिससे छात्र-छात्राओं में [...]
तिरुपति से हटा केदारनाथ में शुरु
विवेक डसीला भगवान के दर पर भी दर्शन के लिए आने वाले भक्त ट्रस्ट वालों की नजर में सभी समान नहीं होते। भक्त की औकात उसके स्टेटस सिंबल के साथ ही चढ़ावे, पहनावे व वीआईपी टिकट खरीदने की क्षमता से आँकी जाती है। उन्हें बिना लाइन में लगे सीधे भगवान के सामने बैठने के लिए [...]
बीते जमाने की चीजे हैं जाँदरी-उरख्याली
गामा चन्द पहाड़ में जाँदरी-उरख्याली अब बीते दौर का किस्सा हो चुके हैं। विकास की आंधी में कभी घर की यह अनिवार्य जरूरत आज अनावश्यक हो गई है। पहले पहाड़ में जाँदरी (घरेलू आटा चक्की) व उरख्याली (ओखल) घर-गाँव के हर कामकाज में साझीदार होती थी। सिर्फ मांगलिक कार्य ही नहीं, बल्कि घर के रोजमर्रा [...]
बाबा तारकनाथ धाम चैती मेला
अजय मलिक आजादी के बाद पश्चिम पाकिस्तान से आने वाले बंगाली विस्थापितो को भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बसाया गया। इस वक्त ऐसे लगभग 6 करोड़ लोग 18 प्रदेशों में रह रहे हैं, जिनमें उधम सिंह नगर के दिनेशपुर, रुद्रपुर, तथा शक्तिफार्म में रहने वाले बंगाली भी शामिल हैं। इन विस्थापितों ने विगत 65 वर्षो [...]
असहाय महिला पुलिसकर्मी
बागेश्वर जनपद में जिला प्रशासन का भ्रष्टाचार ‘या ब्रज देश निगोड़ा’ (देखें नैनीताल समाचार, 1 से 14 मार्च 2012, होली अंक) शीर्षक से प्रकाशित टिप्पणी के माध्यम से उजागर होने की सनसनी अभी शान्त नहीं हुई थी कि जनपद में महिला पुलिसकर्मियों के यौन शोषण का बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला प्रकाश में आया है। अपना नाम [...]
कहाँ गये उत्तराखण्ड के बुनियादी मुद्दे ?
उत्तराखंड की तीसरी विधान सभा के चुनाव सम्पन्न हो गये हैं और एक और सरकार अस्तित्व में आ गई है। सवाल है कि क्या अब भी यहाँ की मूलभूत समस्याओं के समाधान और समग्र विकास के लिये कोई ठोस काम हो पायेगा अथवा नहीं। उत्तराखण्ड में रोजगार और राजस्व बढ़ाने के लिए पर्यटन को एक [...]
शिव दत्त पांडे को सब जानते हैं
कुलदीप सिंह नेगी अल्मोड़ा जनपद के दूरस्थ गाँव डिंगरी, पट्टी कोटली, पो. जागेश्वर के प्रौढ़ शिव दत्त पांडे की ‘रोजमेरी’ पौंधे के कारण आयुष बाजार में अलग पहचान बनने लगी है। आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त 60 वर्षीय शिव दत्त पांडे के पास पैतृक रूप से 500 नाली भूमि है। उत्तराखण्ड सेवा निधि से प्रकाशित [...]
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