छांगुज में लहराया तिरंगा
केशव भट्ट आईएमएफ के एक पर्वतारोही दल ने 6,322 मी. छांगुज चोटी सफलतापूर्वक फतह कर एक इतिहास रचा है। खतरनाक हिमदरारों व लगातार होने वाले एवलांचों की वजह से इस चोटी पर भारत के चार अभियान असफल हो चुके थे। 2007 में तो यहाँ एक शेरपा की एवलांच में दब जाने से मौत भी हुई। [...]
हल का विकल्प खोजें
बाँज पर्यावरण संतुलन, जैवविविधता एवं जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष है। इस सदाबहार वृक्ष की जड़ से लेकर तने तक का प्रत्येक भाग किसी न किसी रूप में उपयोगी है, अतः इसे पहाड़ का कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ग्लोबल वॉर्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में इस वृक्ष का महत्व [...]
जस की तस बनी हुई हैं केदारनाथ धाम की मुख्य समस्यायें
बिपिन सेमवाल/संदीप नेगी केदारनाथ धाम में प्रति वर्ष लाखों की तादाद में तीर्थयात्री आते हैं, परन्तु इन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यात्रा काल से पूर्व हालाँकि आला अधिकारियों द्वारा इन समस्याओं के निराकरण करने के लिये कई बार सम्बन्धित विभागों को निर्देशित किया जाता है, परन्तु इस दिशा में कोई भी ठोस [...]
किसानों की तबाही जारी है
वरुण शैलैश भूमि अधिग्रहण का संकट केवल भट्टा पारसौल तक सीमित नहीं है, जहाँ उग्र आन्दोलन के बाद जमीन अधिग्रहण राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियाँ बन गया है। आज देश में ऐसे कई अधिग्रहण क्षेत्र हैं जहाँ बिल्ली की चाल की तरह किसानों की भूमि कब्जे में की जा रही है, लेकिन वे क्षेत्र खबर नहीं [...]
यात्रा: आन्दोलनों का एकजुट होना जरूरी है–2
मनोज त्यागी ( गतांक से जारी) 12 जून की शाम को यात्री रुद्रप्रयाग से श्रीनगर पहुँचे और गोला बाजार चौराहे पर जन सभा की। 13 की सुबह श्रीनगर के रामायण धर्मशाला में ही सारे स्थानीय पत्रकार एकत्र हो गये और यात्रियों की बाते सुनीं, अखबारों में काफी स्थान मिला। यहाँ से नई टिहरी जाना था [...]
आशल-कुशल : 1 अगस्त से 14 अगस्त,2011
बरसात पूरे शबाब पर है। जुलाई के अंतिम हफ्ते में राज्य के अनेक हिस्सों में मूसलाधार वर्षा हुई। शासन ने सभी जिलों में बाढ़ सुरक्षा कार्यो के लिए एक करोड़ रु मंजूर किये हैं। श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रदेश में अनेक स्थानों पर वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। राज्य सरकार ने [...]
बाँध के लिये वन कानून आड़े़ नहीं आते
कुछ वर्ष पहले राहुल गांधी जब सीमान्त जनपद उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र में आये थे तो पंचगाईं पट्टी के फिताड़ी निवासी जयमोहन राणा ने उन्हें बताया था कि वे एक ऐसे गाँव में रहते हैं, जहाँ आज भी मोटर मार्ग से आठ किमी पैदल की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इस बात को सुन कर राहुल [...]
क्या उसके दिन बहुरेंगें ?
‘‘आप खाली पूछताछ करते हो। लिख ले जाते हो। पिछले साल भी तो आप लोगों से पूछताछ कर रहे थे। उसे छापा आपने ? क्या हुआ फिर ? कुछ नहीं ना! कुछ…नहीं कर सकते हैं साहब आप।….मुख्यमंत्री तक गाँव में आकर पूछताछ कर आश्वासन देकर फिर नहीं लौटे। न हमें सर छुपाने को जगह मिली…। [...]
फूलन को रस ले भँवरा…
राजनीति में भी क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं…चोरी…डकैती..झूठ..सच…। अगर किसी अन्य के किये गये काम को हथियाया जा सके तो क्या कहने ? नयना ज्योति समिति स्वास्थ्य के क्षेत्र में दस वर्ष से काम करने वाली नैनीताल नगर की एक प्रमुख संस्था है, जो मुख्य रूप से नेत्र सम्बन्धी ओपीडी तथा मोतियाबिन्द के ऑपरेशन करने [...]
‘‘गाँव के स्तर पर संस्कृतिकर्मियों का एक नेटवर्क बनना चाहिये’’
कपिलेश भोज (गतांक से आगे) कपिलेश:- आपने अपने गीत में कहा है- ‘भोट माङणी च्वाख-चुपाड़ा जतुक छन/रात-स्यात सबनै की जेडि़या भै नाल।/उनरै सुकरम त पिड़ै रैईं आज/ आजि जाँणि अघिलि काँ जाँलें पेड़ाल !!’’…मौजूदा दौर में आपको किनसे उम्मीद है ? गिर्दा:- मित्र, रास्ता तो जनसंघर्षों का ही है। अन्ततः तो आपकी आस्था जनसंघर्षों पर [...]
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