लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 15, 2011 पर प्रकाशित
कमल जोशी सिमतोला के साथ पुराना रिश्ता है। इको पार्क बनने से पहले भी अल्मोड़ा शहर के समीप स्थित यह खूबसूरत पहाड़ी मेरे जैसे एकांतप्रिय व घुमक्कड़ स्वभाव के लोगों को आकर्षित करती रही है। चीड़, देवदार, बाँज और अकेशिया के पेड़ों के बीच पगडंडियों पर चलकर पपरसली से सिमतोला की पहाड़ी पर चढ़ना, चिडि़यों [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 15, 2011 पर प्रकाशित
बिनसर वन्य जीव विहार क्षेत्र में हक-हकूकों की मांग को लेकर नब्बे के दशक में चले आंदोलन के दौर में ही यह विचार बना था कि क्यों न इस क्षेत्र के ग्रामीण परम्परागत कार्यों से भी जुड़े रहें और पर्यटन से भी उन्हें कुछ रोजगार मिले। पर न उद्यमिता की पृष्ठभूमि थी और न आर्थिक [...]
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लेखक : एल. एम. कोठियाल :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 9, 2011 पर प्रकाशित
ब्रिटिशर्स द्वारा पहाड़ों पर बसाये गये नैनीताल, दार्जलिंग, शिमला, ऊटी, शिलांग, डलहौजी, माउन्ट आबू, मसूरी आदि नगर आज देश के पर्यटन मानचित्र पर अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। इनमें शिलांग, शिमला, डलहौजी, दार्जलिंग, नैनीताल की प्रशासनिक नगरों के रूप में भी पहचान है। मगर पौड़ी एक अपवाद है, जो अंग्रेजों द्वारा जिला मुख्यालय के रूप [...]
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लेखक : चंडी प्रसाद भट्ट :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 10, 2011 पर प्रकाशित
चंडी प्रसाद भट्ट सितंबर के तीसरे सप्ताह भर की अखंड बारिश ने पूरे उत्तराखंड को जाम करके रख दिया था। उसने सोर-पिथौरागढ़ से लेकर रामा-सिनाई, बंगाण तथा बद्रीनाथ से हरिद्वार, कपकोट से नैनीताल तक के बीच के क्षेत्र को झिंझोड़ कर रख दिया। लगभग दो सौ लोग तथा नौ सौ पशु मारे गये। एक हजार [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 18, 2010 पर प्रकाशित
वन विभाग पहाड़ों में एक नए जमींदार के रूप में अवतरित हो गया है। उसने यहाँ वनों में घूमनेवाले पर्यटकों पर एक कर लगा दिया है, जिसे नाम दिया गया है ‘ईको टूरिज्म कर’। देश-विदेश से हिमालय देखने-घूमने साल में लाखों लोग आते हैं, गर्मिंयों में अधिक। यदि ये लोग जंगलों में घूमना चाहते हों, [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 14, 2010 पर प्रकाशित
‘बिराण बनै गेछ, यो बिराण बनै गेछ, यो मालपा को डाना, हे काली मैया तेरी महिमा छ महान,’ गीत आज भी पूरी कारुणिकता के साथ उत्तराखण्ड में सुना जाता है। लोकगायक फकीर चन्द चिन्याल ने अपने मधुर कण्ठ से इस गीत द्वारा मालपा के मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 17 अगस्त 1998 की काली [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित गाँवों में जंगली जानवरों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। खुंखार जंगली जानवरों से खेती-पाती तो चौपट हो ही गई जान का खतरा भी बढ़ते जा रहा है। आलू, गडेरी व अन्य साक-शब्जियों के लिए प्रसिद्ध इस इलाके में धान, गेहूँ आदि की फसल भी काफी अच्छी होती थी [...]
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लेखक : उमा भट्ट :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
महिला जागृति महासंघ धारी और रामगढ़ (जिला नैनीताल) ने अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जनता का ध्यान खींचने तथा उनको जोड़ने के उद्देश्य से 17 से 22 जनवरी तक पदयात्रा की। लगभग 5 सालों से ये संगठन इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। महिला उत्पीड़न के मामलों से शुरू होकर अब ये जल, [...]
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लेखक : शोभन सिंह नेगी :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009:: वर्ष :: 33 :December 22, 2009 पर प्रकाशित
उत्तराखण्ड में बूढ़ाकेदार का एक ऐतिहासिक महत्व है। यहाँ पर बूढ़ा केदार बाबा का पौराणिक मंदिर है, जिसके दर्शन करने आज भी सैकड़ों पैदल तीर्थ यात्री हर साल आते हैं। जब तक उत्तराखण्ड में सड़कों का विकास नहीं हुआ था, तीर्थयात्रियों के लिये बूढ़ाकेदार का एक महत्वपूर्ण स्थान रहता था। सड़कों के विकास के साथ [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009:: वर्ष :: 33 :November 5, 2009 पर प्रकाशित
पर्यटन उत्तराखंड की पहचान है। चारों धामों में धार्मिक पर्यटन कई सालों से चल रहा है। नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, देहरादून सहित अनेक ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो स्वतः ही लोगों को आकर्षित करते हैं। हाल के वर्षों में साहसिक पर्यटन और इको टूरिज्म की अवधारणा ने पर्यटन की संभावनाओं में नए आयाम जोड़े हैं। [...]
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