सड़क न होने से बूढ़ाकेदार से कट रहे हैं तीर्थ यात्री
उत्तराखण्ड में बूढ़ाकेदार का एक ऐतिहासिक महत्व है। यहाँ पर बूढ़ा केदार बाबा का पौराणिक मंदिर है, जिसके दर्शन करने आज भी सैकड़ों पैदल तीर्थ यात्री हर साल आते हैं। जब तक उत्तराखण्ड में सड़कों का विकास नहीं हुआ था, तीर्थयात्रियों के लिये बूढ़ाकेदार का एक महत्वपूर्ण स्थान रहता था। सड़कों के विकास के साथ [...]
जनता की सहभागिता से चले पर्यटन
पर्यटन उत्तराखंड की पहचान है। चारों धामों में धार्मिक पर्यटन कई सालों से चल रहा है। नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, अल्मोड़ा, देहरादून सहित अनेक ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो स्वतः ही लोगों को आकर्षित करते हैं। हाल के वर्षों में साहसिक पर्यटन और इको टूरिज्म की अवधारणा ने पर्यटन की संभावनाओं में नए आयाम जोड़े हैं। [...]
पर्यटन प्रदेश में तीर्थयात्रियों की लूट-खसोट
उत्तराखंड के चार धामों में से बद्रीनाथ और गंगोत्री तक मोटर यातायात सुलभ है। यमुनोत्री व केदारनाथ हेतु क्रमशः 6 किमी. और 14 किमी. पैदल रास्ता है। इस बार हम देहरादून से चल कर सबसे पहले 162 किमी. दूर जानकीचट्टी पहुँचे, जहाँ से यमनोत्री मात्र 6 किमी. है। मसूरी और कैम्पटीफॉल तक का सफर बड़ा [...]
मनिया के साथ मुनस्यारी – 2
एक बार फिर जीप सरपट उतार पर दौड़ रही थी। गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी। खाने का असर अब नींद के रूप में हो रहा था। हम एक- दूसरे के कंधों पर टिक या एक-दूसरे को धकेलते हुए झपकियाँ ले रहे थे, मगर मनिया मुस्तैदी से अपने काम को अंजाम दे रहा था। सेराघाट [...]
मग्रास सिर्फ एक सपने का नाम नहीं है
प्रस्तुति : तारु भंडारी सैलानियों के लिये उत्तराखंड एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ कुछ दिन या सप्ताह अच्छी तरह बिताये जा सकते हैं। लेकिन लम्बे समय तक रहने के लिये यह स्थान ज्यादा सुविधाजनक नहीं- रेलवे स्टेशन से दूरी, जाड़ों में अधिक ठंडक, बाजार का अभाव तथा चिकित्सा सुविधाओं की कमी। पर यहाँ अनेक स्थान [...]
मक्कू मठ: इतिहास से विकास तक का सफर
घने देवदार, बाँज, बुरांश, थुनेर के वृक्षों के बीच अत्यंत शोभनीय मक्कू मठ का इतिहास प्रथम शताब्दी पूर्व माना जाता है। मार्कण्डेय ऋषि की तपस्थली कहा जाने वाला यह क्षेत्र देवासुर संग्राम और आर्य व अनार्य जातियों की संघर्ष गाथायें अपने में समेटे हुए है। प्राचीन आदिवासी मौर जातियाँ ग्रीष्म काल में अपने पशुओं के [...]
नदियों के किनारे चल पड़ी हैं पदयात्रियों की टोलियाँ
उत्तराखंड की नदी-घाटियाँ 2008 की शुरूआत के साथ ही जन जागरण और जन आन्दोलनों के गीतों से गूँजने लगी हैं। नदी किनारे की बसासतों से होकर, जल, जंगल और जमीन पर आसन्न संकट के खिलाफ लोगों को सक्रिय होने का संदेश दे रही, लगभग 15 पदयात्राओं का सिलसिला जारी है। जन-आन्दोलनों के गीत, पदयात्रायें तथा [...]
शिमायल में सौन्दर्य है, मगर पानी नहीं
अंधेरा घिर आया था जब हमारी टीम शिमायल पहुँची। हमारे मेजबान हेम चन्द्र कपिल के घर के बच्चे हमें पानी पिलाने लगे। हमने एक बच्चे से एक बाल्टी पानी भर कर रख देने को कहा। लेकिन वह खाली बाल्टी ले आया। तब मालूम पड़ा कि गाँव में पानी की बड़ी समस्या है। नजदीक में कोई [...]
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