लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 14, 2010 पर प्रकाशित
‘बिराण बनै गेछ, यो बिराण बनै गेछ, यो मालपा को डाना, हे काली मैया तेरी महिमा छ महान,’ गीत आज भी पूरी कारुणिकता के साथ उत्तराखण्ड में सुना जाता है। लोकगायक फकीर चन्द चिन्याल ने अपने मधुर कण्ठ से इस गीत द्वारा मालपा के मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 17 अगस्त 1998 की काली [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010:: वर्ष :: 33 :May 29, 2010 पर प्रकाशित
बापू साम्प्रदायिक हिंसा की लपटों को बुझाने के लिये जब नोआखाली में नंगे पाँव पदयात्रा कर रहे थे और उग्रवादी मुस्लिम कट्टरपंथी उनके रास्ते पर काँटे, काँच के टुकड़े और विष्ठा बिछा रहे थे, तब क्या उन्हें पुलिस की मदद की जरूरत पड़ी थी ? लेकिन हम गांधी नहीं हो सकते थे, इसलिये हमें पड़ी, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: :: वर्ष :: :May 27, 2010 पर प्रकाशित
देवाषीष प्रसून एक तरफ, वर्षों से शोषित व उत्पीड़ित आदिवासी जनता ने माओवादियों के नेतृत्व में अपने अधिकारों को हासिल करने के लिये लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नाकाफी समझते हुये हथियार उठा लिये हैं। दूसरी तरफ, असंतोष के कारण उपजे विद्रोह के मूल में विद्यमान ढाँचागत हिंसा, लचर न्याय व्यवस्था, विषमता व भ्रष्टाचार को खत्म करने [...]
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लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 16, 2010 पर प्रकाशित
[पिछ्ले भाग में आपने जाना कि किस प्रकार होली के हुड़दंग से बचने के लिये हिमालय की वादियों में जाने की योजना बनायी गयी और यात्रा की शुरुआत की गयी। आज पढ़ें उससे आगे की कहानी श्री केशव भट्ट की जुबानी जिसमें आप देखेंगे कि विकास किस प्रकार कागजों (या दीवारों) तक सिमट कर रह [...]
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लेखक : नवीन जोशी :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 11, 2010 पर प्रकाशित
25 मार्च 2010 को पूरे बीस साल बाद मैं पौड़ी (गढ़वाल) में था। सन् 1988 में युवा और जोशीले पत्रकार उमेश डोभाल की हत्या के बाद पत्रकारों-संस्कृतिकर्मियों-समाजसेवियों के लम्बे संघर्ष से अपराधी कटघरे में आने लगे थे और 25 मार्च 1990 को उत्तराखण्ड के पत्रकारों ने पहला उमेश डोभाल स्मृति समारोह पौड़ी में आयोजित किया [...]
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लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 5, 2010 पर प्रकाशित
होली अब उल्लास का पर्व न होकर हुड़दंग बन कर रह गई है। अतः इस हुड़दंग से बचने के लिए हम कुछ ट्रैकिंग के साथी पिछले कुछ वर्षों से हिमालय की घाटियों को रुख कर जाते हैं। ये ट्रैक कुछ अलग तरह की ऊर्जा का संचार करते हैं। ऐन बसंत के बीच होने वाले इस [...]
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लेखक : उमा भट्ट :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
महिला जागृति महासंघ धारी और रामगढ़ (जिला नैनीताल) ने अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जनता का ध्यान खींचने तथा उनको जोड़ने के उद्देश्य से 17 से 22 जनवरी तक पदयात्रा की। लगभग 5 सालों से ये संगठन इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। महिला उत्पीड़न के मामलों से शुरू होकर अब ये जल, [...]
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लेखक : राधा बहन :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009:: वर्ष :: 32 :August 1, 2009 पर प्रकाशित
मैं ऋषिकेश से व्याँसी, देवप्रयाग व श्रीनगर होते हुए बद्रीनाथ राजमार्ग से हेलंग तक व वहाँ से उर्गम घाटी के लिये जा रही थी। बसों, टैक्सियों, रेस्तराओं, पर्यटक केन्द्रों और शोरूमों पर हर जगह एक ही शब्द लिखा मिलता था ‘देवभूमि उत्तराखण्ड’। बार-बार कर उभर-उभर कर आने वाला यह वाक्य मानो जबरन सिद्ध करने का [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 08 || 01 दिसम्बर से 14 दिसम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :December 1, 2008 पर प्रकाशित
सितंबर के अंतिम सप्ताह में गंगोत्री-बद्रीनाथ के 19,000 फीट ऊँचे मार्ग में भारी बर्फवारी के कारण पाँच नेपाली भारवाहक और एक गुजराती यात्री मर गये थे। इस दुर्घटना की पूरी जाँच किये बिना ही भटवाड़ी के उपजिलाधिकारी ने तीन साहसिक पर्यटन कराने वाली संस्थाओं पर, उत्तरकाशी में धारा 405 अ (गैर इरादतन हत्या) के तहत [...]
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लेखक : महेश बवाड़ी :: अंक: 08 || 01 दिसम्बर से 14 दिसम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :December 1, 2008 पर प्रकाशित
एक बार फिर जीप सरपट उतार पर दौड़ रही थी। गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी। खाने का असर अब नींद के रूप में हो रहा था। हम एक- दूसरे के कंधों पर टिक या एक-दूसरे को धकेलते हुए झपकियाँ ले रहे थे, मगर मनिया मुस्तैदी से अपने काम को अंजाम दे रहा था। सेराघाट [...]
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