लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 28, 2011 पर प्रकाशित
प्रवीन कुमार भट्ट गंगा इन दिनों अजीब विरोधाभासों का सामना कर रही है। एक ओर पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर टिहरी में बनाये गये भीमकाय बाँध के प्रबंधकों ने अधिक पानी रोककर जलधारा को पहले से भी सीमित कर दिया है। ठंड बढ़ने के साथ ही पहाड़ों में बर्फबारी तो खूब [...]
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लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 24, 2011 पर प्रकाशित
अगर बारिश कम हो तो गर्मियों में उत्तराखंड में असाधारण जल संकट पैदा हो जाता है। पिछले साल हिमपात न होने से इस बार गर्मियों में नदियों में जल प्रवाह कम रहा था। गर्मियों में प्रमुख ग्लेशियरों पर आधारित भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में जल प्रवाह में 50 प्रतिशत की कमी आ गई थी। [...]
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लेखक : चंडी प्रसाद भट्ट :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 10, 2011 पर प्रकाशित
चंडी प्रसाद भट्ट सितंबर के तीसरे सप्ताह भर की अखंड बारिश ने पूरे उत्तराखंड को जाम करके रख दिया था। उसने सोर-पिथौरागढ़ से लेकर रामा-सिनाई, बंगाण तथा बद्रीनाथ से हरिद्वार, कपकोट से नैनीताल तक के बीच के क्षेत्र को झिंझोड़ कर रख दिया। लगभग दो सौ लोग तथा नौ सौ पशु मारे गये। एक हजार [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :August 1, 2010 पर प्रकाशित
घनसाली के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट इस कदर बढ़ा कि गत 17 मई 2010 को 18 घंटे तक पानी के स्रोत पर लगी लम्बी लाइन में खड़ी चार महिलायें बैशाखी देवी, छौंपाड़ी देवी, रुशना देवी तथा यशोदा देवी भूख प्यास के कारण बेहोश होकर गिर पड़ी। इसी तरह जून माह में देवप्रयाग विधानसभा [...]
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लेखक : चंदन बंगारी :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 11, 2010 पर प्रकाशित
अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक के दर्जनों गाँवों में जल संकट भयावह रूप ले चुका है। जिला प्रशासन व जल संस्थान टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई कर रहा है। पानी की कमी को देखते हुए टैंकरों के चक्कर बढ़ाए जा रहे है। जिला प्रशासन ने विभाग को टैंकर संचालन के लिए साढ़े चार लाख [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 30, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : माधवानन्द मैनाली ‘मधु’ मडुआ, गहत, पहाड़ी आलू, भट्ट, पहाड़ी गाय का दूध, घी और गौमूत्र आदि पहाड़ी उत्पादों ने बाजार में अपना प्रभुत्व जमाना आरम्भ कर दिया है। अब चुनौती है कि इनके उत्पादन को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाये। उत्तराखण्ड के 55.66 लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में 34.66 हेक्टेअर वन क्षेत्र है। बंजर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 29, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : हरीश फुलारा बढ़ते प्रदूषण एवं उससे मानव जीवन पर पड़ रहे कुप्रभाव को कम करने हेतु भारत सरकार द्वारा वर्ष 1980 में वन अधिनियम लागू किया गया। इसके अन्तर्गत वन भूमि पर गैर वानिकी कार्य बिना भारत सरकार की पूर्वानुमति के नहीं किये जा सकते। नीति निर्धारकों द्वारा इसका दुरुपयोग किये जाने के [...]
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लेखक : गजेन्द्र पाठक :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 9, 2010 पर प्रकाशित
पेयजल, जैव विविधता तथा पर्यावरण के लिये महत्वपूर्ण स्याहीदेवी शीतलाखेत के 1100 हैक्टेयर क्षेत्रफल में फैले आरक्षित वन को बचाने के लिये चलाये जा रहे ‘जंगल बचाओ, पानी बचाओ’ अभियान के 7 वर्ष पूरा होने पर शीतलाखेत में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। स्याही देवी क्षेत्रीय विकास मंच द्वारा आयोजित इस बैठक में मुख्य [...]
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लेखक : चंदन बंगारी :: अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 26, 2010 पर प्रकाशित
पानी को बचाने की चिंता अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी की जा रही है। हरित क्रांति के केन्द्र रहे तराई में भी जल संकट गहराता जा रहा है, जिसकी चिंता तराईवासियों के चेहरे पर साफ झलक रही है। जलस्तर तेजी से गिरने का बड़ा कारण बेमौसमी धान की फसल मानी जा रही है। तराई की धरती [...]
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लेखक : रोहित जोशी :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
कुछ समय पूर्व ‘नैनीताल समाचार’ ने उत्तराखण्ड की नदियों पर प्रस्तावित छोटे-बड़े बाँधों को काले धब्बे से दर्शा कर एक नक्शा प्रकाशित किया था। सैकड़ों बाँधों से लगभग पूरा नक्शा ही काला हो गया था। बाँधों से उभरी यह कालिख प्रतीकात्मक रूप में तथाकथित ऊर्जा प्रदेश के भविष्य को भी रेखांकित करती है। वर्तमान में [...]
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