पौड़ी की होलियों की जान थे दयासागर धस्माना
गढ़ राजवंश के रूप में टिहरी एक समृद्ध सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में जाना जाता था। होली सहित अन्य सांस्कृतिक गतिविधियाँ यहाँ से पूरे पहाड़ में फैलीं। अंग्रेजों के आगमन (1815 ई) के पश्चात् श्रीनगर, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, दुगड्डा, देवप्रयाग की पहचान भी सांस्कृतिक केन्द्रों के रूप में हुई। इस दौर में सड़क यातायात एवं संचार [...]
चूर चूर हो गया है हरिराम टम्टा जी का सपना
कभी अपने चाय के बगीचे और ‘चहा खांड’ (कारखाना) के लिये भी प्रसिद्ध बेरीनाग की जनता के लिये 13 अप्रेल सन 2001, बैसाखी का दिन खासा हलचल भरा रहा। उस दिन क्षेत्र के निःस्वार्थ समाज सेवी स्व. श्री हरिराम टम्टा जी की कोशिशों से स्थापित ‘बापू वाचनालय एवं पुस्तकालय’ के शुभारम्भ की तैयारी चल रही [...]
व्हाट एन आइडिया जी ?
समर्थ मुनगली ने बता दिया कि अब नहीं लगेगा इंजेक्शन से डर एक छोटा सा विचार एक साथ क्रांतिकारी भी हो सकता है और व्यावसायिक रूप से अत्यन्त लाभप्रद भी। विज्ञान एवं तकनीकी के विकास के दौर में बार-बार महसूस किये गये इस सत्य को हल्द्वानी के समर्थ मुनगली ने 19 दिसम्बर 2007 को मुम्बई [...]
गुमनाम ही रहे स्वाधीनता संग्रामी मनोरथ पांडे ‘शास्त्री’
मैं तब बेरीनाग मिडिल स्कूल की पाँचवीं कक्षा का विद्यार्थी था। हमारी कक्षा के शिक्षक ‘पंडित जी’ का नाम शायद शिवदत्त जी था। पर ठीक से याद नहीं आता। वे कुछ ही महीनों में रिटायर होने वाले थे। लम्बी सी दाढ़ी थी। मृदु स्वभाव और मधुरभाषी। हमारी हिन्दी की पुस्तक साहित्य वाटिका, भाग-1 में एक [...]
स्वामी आलोकानन्द की मौत का विश्वास नहीं होता!
8 नवम्बर को सुबह जब कपकोट तहसील के, दूरस्थ सूपी गाँव से गोविन्द सिंह का फोन आया कि स्वामीजी नहीं रहे तो एकाएक यकीन नहीं हुआ। वैष्णव सम्प्रदाय के स्वामी आलोकानन्द लगभग 15 वर्षों से शिव मंदिर में रह रहे थे। बताया गया कि 7 नवम्बर की सायं उन्होंने शायद कोई जहरीला पदार्थ खा लिया। [...]
ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार…..3
एक बार सुरेश को भी बहुत बुरी तरह पीलिया हुआ था। बी.डी. पाण्डे अस्पताल में भर्ती। मैंने उससे पूछा, ‘‘यार ये पीलिया होता क्या है ?’’ वह बोला, ‘‘डॉक्टर गन्ने का रस पीने के लिये कहते हैं। मीठे की कमी है शायद।’’ मैंने कहा, ‘‘गन्ने का रस शायद न मिले नैनीताल में। तो ऐसा करना, [...]
ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार…..2
कर्नल गुप्ते…………….पुराने किले में किया गया वह प्रकाश ध्वनि का कार्यक्रम ‘बढ़ते कदम’ हमेशा याद रहेगा. ….याद रहेगा, उसी दौरान कर्नल गुप्ते के विरुद्ध सभी विभागों के कलाकारों का आंदोलन। हम भी हड़ताल में बैठे थे कि हमारे प्रशिक्षक रमेश चन्द्र जोशी जी का पत्र नैनीताल से मेरे लिये आया, जिसमें बाहर से लिखा था, [...]
ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार-1…..
(गीत एवं नाटक प्रभाग में कार्यरत एक बेहद खुशमिजाज और जिन्दादिल कलाकार सुरेश पांडे का 9 अक्टूबर 2007 को देहान्त हो गया। इस लेख के माध्यम से धरमबीर परमार ने प्रभाग के सभी दिवंगत कलाकारों को अपनी श्रद्धांजलि दी है। -सम्पादक) बात साठ के दशक की है जब टी.वी. का प्रकोप नहीं था। दर्शक गीत [...]
आप रौशनी हैं हमारे लिये
यह वाकया उस जमाने का है, जब देश को आजादी मिली ही थी। हिमालय के दूर-दराज गांव के अत्यंत विपन्न परिवार का एक छात्र नोबेल विजेता और महान भौतिकविद सर सी.वी. रमन की प्रयोगशाला (रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलूर) में अपना शोधकार्य समेट रहा था। घर की माली हालत बेहद खराब थी। रमन साहब ने उसे [...]
अथक संग्रामी और प्रखर वक्ता थे गोविन्द बल्लभ पंत
जन्मदिन (10 सितम्बर) पर याद पंडित गोविन्द बल्लभ पंत में तिलक की देशभक्ति, महात्मा गांधी की शांतिप्रियता एवं सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति का समन्वय था। वे दूरदर्शी एवं कुशल प्रशासक थे। वृद्धावस्था के कारण उनका प्रकम्पित शरीर शिथिल दिखाई पड़ता था, परंतु उनकी कार्यशक्ति अद्भुत थी। उन्होंने अनेक जटिल समस्याओं को बड़ी कुशलता से [...]
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