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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2012:: वर्ष :: 35 :January 16, 2012 पर प्रकाशित
पुराने पत्तों को सिर्फ इतना करना चाहिये पतझड़ में/गिर जाना चाहिये। बिछ जाना चाहिये खाद बन/देनी चाहिये नये वक्त की शुभकामनाऐँ नये पत्तों के लिये, पुराने पत्तों को सिर्फ इतना करना चाहिये। – दिनेश उपाध्याय करने के लिए करने को अभी बहुत कुछ बचा है होने के लिए भी पक्षी को घोंसले [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 19, 2011 पर प्रकाशित
[यह गढ़वाली लोकगीत सन् 1951 की सतपुली की भीषण त्रासदी का वर्णन प्रस्तुत करता है।] द्वी हजार आठ भादो मास,सतपुली मोटर बगीन खास। औडर आई गये कि जाँच होली,पुर्जा देखणक इंजन खोली। अपणी मोटर साथ मां लावा,भोल होली जाँच अब सेई जावा। सेई जोला भै बन्धो बरखा ऐगे,गिड़-गिड थर-थर सुणेंण लैगे। सुबेर उठीक जब आयाँ [...]
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लेखक : उमेश तिवारी 'विस्वास :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 15, 2011 पर प्रकाशित
[अन्याय के खि़लाफ लड़ने के एवज में 16 अगस्त 2011 को भोपाल में हलाक कर दी गई बहिन शहला मसूद की शहादत को समर्पित-] इन्सानों सी शक्लें बनाए जब वो मुस्कुराकर तक़रीर करते हैं, टपक पड़ता है एक कतरा ख़ूँ-का अचानक लबों के कोने से, आस्तीन पर दाग़ छोड़ता है कभी, कभी टपक दस्तरखान [...]
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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 31, 2011 पर प्रकाशित
हरदा ठीक ही ठहरा शहर जाकर तुम भी बदल गये तुम्हारे बदलते ही बदल गया समयचक्र समय से पहले पकने लगे हैं काफल और हिसालू और फसल सूखने के बाद बरसता है आसमान कुछ होता भी है तो चले आते हैं जंगली जानवर कहीं खो गयाी है फूलदेई और घुघुती फलों में बौर लगते ही [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 26, 2011 पर प्रकाशित
भास्कर उप्रेती (2 जुलाई 2010 को मूलतः देवलथल, पिथौरागढ़ निवासी पत्रकार हेम चन्द्र पांडे की आंध्र प्रदेश पुलिस ने माओवादी नेता चेरुकुरी राजकुमार के साथ एक फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी। उसी वक्त यह कविता लिखी गई थी। -सम्पादक) तुम्हारी हत्या की खबर आई तो लगा मर गए सारे ही स्पार्टाकस सारे सूरज दफन [...]
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लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 10, 2011 पर प्रकाशित
बात बुनियादी उठी बात ये फिलवक्त की है साथियो ! इस देश में, ये उदासी ऊपरी है साथियो इस देश में। आप अब तक शक्ल हिन्दोस्तां की जो समझा किये, सिर्फ वैसा ही नहीं है साथियो ! इस देश में। गांधी-गौतम के फरेबी फलसफे को चीर कर, हुआ पैदा नक्सली है साथियो ! इस देश [...]
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लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 27, 2011 पर प्रकाशित
सरजु-गुमती संगम में गंगजली उठूँलो, उत्तराखण्ड ल्ह्यूँलो भुलू उत्तराखण्ड ल्ह्यूँलो उतरैणी कौतीक हिटौ वैं फैसाल करूँलो, उत्तराखण्ड ल्ह्यूँलो भुलू उत्तराखण्ड ल्ह्यूँलो धन मयेड़ी छाति उनरी धन त्यारा ऊँ लाल बलिदानैकी जोत जगै ढोलि गै जो उज्याल खटीमा, मँसुरि, मुजफ्फर कैं हम के भुली जूँलो उत्तराखण्ड ल्ह्यूँलो भुलू उत्तराखण्ड ल्ह्यूँलो बैणी फाँसि नि खाली जाँ रौ [...]
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लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 26, 2011 पर प्रकाशित
ना जाने क्यों इस बार दहशत सी लेकर आ रहा है थर्टी फस्र्ट देवभूमि में हुवे विनाश को भूल फिर लगेंगे नव वर्ष के स्वागत के लिए बेहूदे ठहाके… चलेगा पैमानों का दौर क्यों सोचता हूँ मैं कि क्यों नहीं दिखता इन्हें धरती का क्षत-विक्षत हृदय अपने छौनों को खो चुकी माँ की सूनी आँखें [...]
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लेखक : शिरीष कुमार मौर्य :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 23, 2011 पर प्रकाशित
कपिलेश भोज का हिंदी साहित्य में हस्तक्षेप पुराना है। उनका नाम बीस बरस पहले मैं वर्तमान साहित्य के सम्पादक मंडल में देखता था। उनकी कुछ कहानियाँ मैंने पढ़ीं। फिर ये जाना कि वे एक बेहद सक्रिय और समर्पित राजनैतिक कार्यकर्ता रहे हैं। इसे मेरी लिखत-पढ़त की सीमा ही माना जाए कि उनकी कविताओं से मेरा [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 20, 2011 पर प्रकाशित
ये कैसी राजधानी है ? ये कैसी राजधानी है ? हवा में ज़हर घुलता है, औ’ जहरीला सा पानी है ये कैसी राजधानी है…. शरीफों की कहानी को यहाँ कोई नहीं सुनता यहाँ सब की जुबानों पर दबंगों की कहानी है। ये कैसी राजधानी है…. अगर जीना है तो सुन लो यहाँ झुकना जरूरी है [...]
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