गर्व से बोलो कि हम पहाड़ी हैं
कुछ मंचों द्वारा 5-10 रुपए में पहाड़ी होने का सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। ये चमत्कारिक सर्टिफिकेट जो भी खरीदेगा, उसमें स्वतः ही एक ऊर्जा पैदा होगी और वो मुझे गर्व है कि मैं पहाड़ी हूँ का नारा लगाते हुए किसी गैर पहाड़ी का सर फोड़ देगा या उसके मुँह पर कालिख पोत देगा…. और [...]
नव संवतसर का ‘थर्टी फर्स्ट’
‘‘ये नैनीताल में ‘थर्टी फर्स्ट’ क्यों मनाया जाता है ?’’ ‘‘नैनीताल पयर्टक नगरी है, पर्यटन यहाँ का मुख्य धंधा है। इससे शहर की खुशहाली जुड़ी है। अतिथि सत्कार यहाँ की परम्परा है।’’ ‘‘थर्टी फर्स्ट में कैसे-कैसे अतिथि आते हैं, तुम जानते ही हो। खाओ पियो, ऐश करो और अंग्रेजी में गाली दो, ये हमारी संस्कृति [...]
खुदा खैर करे इन चुनावों से
लीजिए साहब विधानसभा चुनाव निपट गए। बला टली। सरदर्द दूर हुआ। आदमी का घर में रहना मुश्किल हो रखा था महीने भर से। दो घड़ी चैन से बिताना कठिन हो गया था। दिन भर भावी विधायकों, उनके समर्थकों को सहयोग और आशीर्वाद देते-देते आदमी शाम होते-होते थकान महसूस करने लगा था। चुनाव-चिन्ह सपनों में आने [...]
कहाँ-कहाँ से चले आते हैं नैनीताल ! -2
पिछ्ले अंक से आगे….. थोड़ा सरकने के बाद गाड़ी एक बार फिर जाम में फँस जाती है। इस बार सड़क पर डामर लगाया जा रहा है। सीजन में काम होना उतना जरूरी नहीं है, जितना कि काम होते हुए दिखना। सड़कें दुरुस्त रहनी चाहिये, वरना वी.आई.पी. गाड़ियों का ‘अलाइनमेंट’ आउट हो सकता है। अगर ऐसा [...]
कहाँ-कहाँ से चले आते हैं नैनीताल !
लो सपने संजोये जिसका इंतजार था, वो सीजन आ ही गया। सीजन कभी अकेला नहीं आता, अपने साथ कई फजीहतें भी साथ लाता है। मंत्री, संत्री, भिखारी, मदारी, सीजनल पुलिस और गिरहकटों के साथ-साथ ‘एफ टीवी’ से निकले लोग भी चले आते हैं। नैनीताल वाले हमेशा दुआ माँगते हैं कि इस बार सीजन में वी.आई.पी. [...]
भ्रष्टाचार तो तरक्की का रास्ता है हजारे जी !
‘पूरे देश का कहना है अन्ना हजारे गहना है।’ ‘जब तक सूरज चांद रहेगा अन्ना तेरी बात कहेगा’, ‘अन्ना नहीं तू आंधी है, नये दौर का गांधी है।’ ये सारे नारे अन्ना हजारे के योगदान के बारे में हैं। हर कोई कमर कस कर आपके साथ जुड़ने को तैयार हैं। स्कूल भी बच्चों के हाथ [...]
बगरो बसंत है : घायल वसन्त और होली
(‘बगरो बसंत है’ में इस बार सुधी पाठकों के लिये प्रस्तुत है प्रख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाईं की व्यंग्य रचना ‘घायल वसन्त’ तथा उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की कविता ‘होली ) घायल वसन्त कल वसन्तोत्सव था। कवि वसन्त के आगमन की सूचना पा रहा था- ‘प्रिय, फिर आया मादक वसन्त।’ मैंने सोचा, जिसे वसन्त के आने [...]
…..मौत तो एक दिन आनी ही है !
मरने के बाद लोग मरने वाले की इतनी और ऐसी-ऐसी तारीफें करते हैं कि सुन कर कई बार मर जाने का बड़ा मन करता है कि हाय, लोग मेरे बारे में कितने ऊँचे और अच्छे विचार रखते हैं। मैं उन्हें यूँ ही कमीना समझता रहा। हम यूँ ही बेखुदी में जिये चले जाते हैं। हमें [...]
मुहब्बत के गुनहगारो ! कुछ तो शर्म करो
अभी उस दिन एक परिचित अध्यापिका मुझसे अपना दुख बाँट रही थीं कि ‘‘आज हमारे स्कूल में एक लड़की के पास प्रेम पत्र पाया गया, जिसके लिए उसे खुली असेम्बली में डांट पिलाई गई।’’ मुझे बड़ा बुरा लगा ….. प्रेम पत्र इतनी अस्वाभाविक और अप्राकृतिक चीज तो नहीं कि जिसके लिए इतनी जिल्लत उठानी पड़े [...]

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