अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2013–1
काफी देख लई हरि होली बिहारी। लोभ गुलाल मलो मुख मेरे, मोह की दे पिचकारी। माया के रंग में ऐसो रंगो मोहे भूल गई सुध सारी। प्रिया अपने को बिसारी। देख लई… काम क्रोध के मुख पर भर भर मारो पिचकारी आशा तृष्णा की गेंद बनाकर, ऐसी कुचन पर मारी। हँसी बृज की सब नारि। [...]
एक माह आठ दिन चलती है थरूवाटी होली
नवीन बगौली उधमसिंह नगर जिले के खटीमा, सितारगंज, किच्छा, बाजपुर आदि तहसीलों में, सात उप समूहों में रहने वाली थारू जनजाति का इतिहास राजस्थान के थार मरुस्थल से जुड़ हुआ है। खुद को महाराणा प्रताप के वंशज कहने वाले थारूओं में होली एक सांस्कृतिक महोत्सव है, जिसे वे पूरे एक माह आठ दिन तक मनाते [...]
कुनल्ता की होली का अलग है मिजाज
आज जहाँ शराब ने होली के रंग को भंग करने का काम किया है वहीं गंगोलीहाट का सदूरवर्ती एक गाँव कुनल्ता ऐसा भी है जो शराबियों के हुड़दंग से बचा हुआ है। लोग इस गाँव की होली की मिसाल पेश करते नहीं थकते। कई ऐसे गाँव भी हैं जहाँ पर शराबियों के हुड़दंग के चलते [...]
होली अंक के लिए सप्रेम
सम्पादक, ऐसा हो झाडू देवे पानी लावे, चिट्ठी डाले डाक में। अखबारों के पैकट बांधे, रहे लेख की ताक में। नकल-नवीसी करे कलर्की, जमादार सा हाजिर हो। रखवाली रक्खे आफिस की बस, ऐसा सम्पादक हो।। मंगता बनकर मंगा पुस्तकें, समालोचना करता हो। न्याय-तुला को रक्खे ताक में, बेसिर पैर बकता हो। अपनी धुन का [...]
पनघट पर छयल चलो बरछी
होली को कामकाका के अगियाये हुए जीवन का ‘इजर’ समझना चाहिये। पाँच दिनों में फाँणा, काटा, सुखाया और जलाया। इस ऊखड़ मल्याट में रतिकाकी को भी साथ रहना पड़ता है। जिस समय आग धमकी होती है उस समय वह हाथ में हाथ धरे तमाशा नहीं देखती। पानी-पन्यार, नदी-पनघट की सोचती है। आग और पानी के [...]
प्रशान्त राही का जज्बा अभी बरकरार है
जीवन चन्द पुलिस द्वारा माओवादियों का जोनल कमांडर बता कर जेल भेज दिये गये प्रशांत राही की अन्ततः पौने चार साल बाद 21 अगस्त को रिहाई हो गई। उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा मिली जमानत के बाद पर जिला कारागार रोशनाबाद (हरिद्वार) से छोड़ा गया। इस अवसर पर उनकी पत्नी चन्द्रकला और पुत्री शिखा राही के [...]
पशु-पक्षियों को आपदाओं का सहज नैसर्गिक पूर्वाभास होता है
रामस्वरूप सिंह चौहान विकसित सभ्यता के इस दौर में ऐसा लगता है, जैसे मनुष्य प्रत्येक प्रकार की विपदाओं से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। जबकि ऐसा है नहीं। पहले जब मनुष्य प्रकृति के घनिष्ठ सम्पर्क में रहता था, तब उसे शायद आने वाली विपदाओं का पूर्वाभास हो जाता था। पशु-पक्षियों में आज भी इस [...]
कब बनेगा कोसी का तटबंध
पिछले वर्ष कोसी की बाढ़ से रामनगर की सुरक्षा के लिये बनाया गया कोसी का तटबंध टूट गया और शहर में पानी घुस गया था। अब तक उस तटबंध की मरम्मत नहीं हो पाई है। करीब 25 हजार की आबादी खतरे की जद में है। ब्रिटिश शासन के दौरान 1924 में भारी बरसात के चलते [...]
बकवास है पुनर्वास नीति
पुरुषोत्तम शर्मा उत्तराखण्ड आपदा एवं पुनर्वास नीति 2011’ एकदम निराशाजनक है। इसमें भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए आधुनिक सूचना तकनीकी का अधिकतम इस्तेमाल और आपदा पीडि़तों के स्थायी पुनर्वास के साथ उनके पुश्तैनी रोजगार की सुरक्षा के मुद्दे अहम होने थे। अखिल भारतीय किसान महासभा [...]

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