विकास की दिशा पर गोष्ठी
विकास की जनाधारित नीतियों को जमीनी स्तर पर उतारने की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के सिलसिले में विश्व नागरिक मंच, जल संस्कृति मंच एवं हिमालयी पर्यावरण शिक्षा संस्थान द्वारा हिमालय भागीरथी आश्रम, मातली में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में उत्तराखण्ड के जल, जंगल, जमीन पर वैश्वीकरण का प्रभाव बढ़ता तापमान, पिघलते [...]
पहले नौकरशाही की जकड़ से मुक्त करें
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान कमजोर कर दी गई पंचायत व्यवस्था के महत्व को आजाद भारत में फिर से स्वीकार किया गया, परन्तु आजादी के चार दशक बाद तक भी इन पर प्रभावशाली वर्गों व जातियों के कब्जे बरकरार रहे। वर्ष 1993 में 73 वें संशोधन के माध्यम से संवैधानिक रूप से महिलाओं व दलित पिछड़े [...]
खो न जायें इतने संघर्ष से प्राप्त अधिकार
प्रस्तुति : गंगा सिंह पांगती पंचायत प्रतिनिधियों को जागरूक, ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ होना आवश्यक है। मैं दो बार कपकोट विकासखंड के सिमगड़ी ग्राम सभा का ग्राम प्रधान रहा। तब बागेश्वर जिला नहीं बना था। तत्कालीन उ.प्र. सरकार ने 10 लाख कुआँ योजना के तहत यहाँ बिना पानी के गूल, डिग्गियाँ आदि बनाकर लाखों का बजट [...]
ग्रामीण कहाँ होता है ग्राम विकास की योजनाओं में
सरकार गाँवों में सब्सिडी वाली वित्तपोषित योजनाऐं ला रही है। यदि गाँव वाले उन योजनाओं पर अपना पैसा लगा कर या बैंक इत्यादि से कर्जा ले एक रकम खर्च करते हैं तो सरकार उन्हें उस पर लगभग 25 प्रतिशत अनुदान दे रही है। हाल में यहाँ एक सार्वभूम नाम की योजना आई, जिसमें बागवानी, ऊन [...]
किलकारी से पर्यावरण चेतना
प्रस्तुति : हरीश मैखुरी चिपको आंदोलन की भूमि में अब ‘किलकारी आंदोलन’ चलाया जा रहा है। इसके तहत बच्चों के जन्म दिवस, नामकरण, अन्नप्राशन एवं मुंडन संस्कारों पर माता-पिता व संबंधियों द्वारा वृक्ष रोपित किये जाते हैं तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया जाता है। ‘किलकारी’ एक भावपूर्ण शब्द है और इस अभियान का उद्देश्य [...]
याद रहेंगे देवीराम जी
प्रस्तुति : विश्वंभर नाथ साह ‘सखा’ कलामर्मज्ञ देवी राम आर्य के निधन ने नैनीताल के कला जगत में जो शून्यता उत्पन्न की है, उससे उबर पाना फिलहाल तो संभव नहीं दीखता। देवी राम जी का जन्म धुर ग्रामीण क्षेत्र चौगर्ख, जनपद अल्मोड़ा में हुआ। पिता काष्ठशिल्पी थे, आजीविका की तलाश में नैनीताल आकर बस गये। [...]
डाबर की नजर से अभी ओझल है आँवले का यह जंगल
सोरघाटी से गर्ब्यांग-02 रास्ते में फिसलन थी। मैं दो तीन बार गिरा। पहली बार तो लगा कि हाथ टूट गया है। पर उसे इधर-उधर हिला कर देखा तो साबूत था। मैं अपनी ही चाल चलता हूँ। या तो आगे या पीछे। बीच में चलना अच्छा नहीं लगता। यात्रा आदमी का चरित्र सबसे ज्यादा बतलाती है। [...]
पिछली गलती न दोहरायें
प्रस्तुति : गिरीश पंत राज्य गठन के बाद पहली निर्वाचित सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का गठन कर दर्जनों विभाग पंचायतों के हवाले करने की इच्छा जाहिर की। प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विभागों को पंचायतों के हवाले करने का ढिंढोरा पीटा गया। सरकार के कार्यकाल की समाप्ति तक सरकारी नुमाइंदे और कांग्रेसी छुटभैये नेता हल्ला [...]
आम सहमति से हो सकते हैं सारे काम
प्रस्तुति : बलवंत कोरंगा आम सहमति से कार्य करने में कोई दिक्कत नहीं होती, क्योंकि जिस वार्ड में काम करना हो वह काम उसी वार्ड का सदस्य करता है। कमीशन, 3.5 प्रतिशत प्रपोजल बनाने वाले जे.ई. तथा 7 से 15-16 प्रतिशत तक ऊपर के अधिकारियों को चला जाता है। विभागीय कार्यों में अधिकारियों के चक्कर [...]
अथक संग्रामी और प्रखर वक्ता थे गोविन्द बल्लभ पंत
जन्मदिन (10 सितम्बर) पर याद पंडित गोविन्द बल्लभ पंत में तिलक की देशभक्ति, महात्मा गांधी की शांतिप्रियता एवं सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति का समन्वय था। वे दूरदर्शी एवं कुशल प्रशासक थे। वृद्धावस्था के कारण उनका प्रकम्पित शरीर शिथिल दिखाई पड़ता था, परंतु उनकी कार्यशक्ति अद्भुत थी। उन्होंने अनेक जटिल समस्याओं को बड़ी कुशलता से [...]
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