रॉयल राइफल्स के फौजी हमजोली
(वरिष्ठ पत्रकार श्रीचरण काला के 14 जनवरी 1995 के ‘स्टेट्समैन’ में छपे इस लेख का अनुवाद करके हमें हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार शेखर जोशी ने उपलब्ध करवाया है। जोशी जी के अनुसार ‘यह लेख उन्हें अत्यन्त मार्मिक लगा था। -सम्पादक ) सन् 1940 का एक खुशनुमा दिन था जब रूदोला गांव में लैन्सडाउन से रॉयल [...]
मेरा गाँव, मेरे लोग. समापन किस्त
जंगल, खड़ोद और सौल का शिकार उस बार हाईस्कूल की परीक्षा के बाद ही ददा को टीचर क्वार्टर छोड़ कर खालगड़ा जाकर रहने का आदेश मिल गया। खालगड़ा यानी कालेज से दो-तीन किलोमीटर ऊपर जंगल के सुनसान इलाके में बना फार्म। वहाँ जंगल के बीच से रास्ता जाता था। पहले तक वहाँ चौरस जगह में [...]
लो साहब गुजर गये शादियों के भी दिन !
लीजिए साहब, बारातों का यह सीजन भी निपट गया हर बार की तरह. ….हर बार शादियों के सीजन में शहर से कुछ परिचित चेहरे वाली अपरिचित लड़कियाँ अचानक गायब हो जाती हैं। कई दिनों तक आँखें उन्हें भीड़ में तलाशती रहती हैं। कई बार खयाल आता है कि गई होंगी कहीं रिश्तेदारी वगैरा में, आ [...]
कॉर्बेट पार्क में एक अभिनव प्रयोग
केन्द्र सरकार कार्बेट नेशनल पार्क में अवैध शिकार की रोकथाम के लिए वन गुज्जरों की मदद लेने पर विचार कर रही है। केन्द्रीय पर्यावरण व वन राज्य मंत्री जयराम रमेश ने इस अभयारण्य के दौरे के समय ऐसे 200 परिवारों से बातचीत भी की है। मंत्री का मानना है कि जंगलों की रक्षा स्थानीय लोग [...]
अब तो पानी के बारे में सोचना ही पड़ेगा
उत्तराखंड में इस साल अब तक पानी की स्थिति बहुत विकट रही है। जाड़ों में बहुत कम हिमपात होने के कारण सन् 2009 की गर्मियों में बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी की बहुत कमी रही। हिमनद से बनने वाली भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में गर्मियों में पानी का औसत प्रवाह लगभग 50 प्रतिशत [...]
मेरा गाँव, मेरे लोग – 08
खेतों में वे दिन चौमास में होती थी मंडुवा की गुड़ाई। धूप-छाँव भरे दिन और फिर झमाझम बारिश! फिर अचानक धूप। इजा कहती, ‘‘स्याल क ब्या हुनारौ।’’ सियार का विवाह ? मैं पूछता, ‘‘कहाँ इजा ?’’ वह हँस कर कहती, ‘‘जब धूप भी पड़ रही हो और वर्षा भी, तो कहते हैं तब सियार का [...]
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