लाठियों के सहारे दमन
मैं जीवन चन्द्र (जे.सी.) पुत्र स्व. श्री दानवीर आर्य (शिक्षक) अल्मोड़ा निवासी एक दशक से अधिक समय से उत्तराखण्ड के विभिन्न जन आन्देालन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए मजदूरों किसानों और छात्रों की समस्याओं के लिए संघर्षरत् रहा हूँ। पिछले पाँच-छः वर्षो से राज्य के भीतर जिस प्रकार सरकारें जनान्दोलनों और सामाजिक कार्यकताओं का दमन [...]
नैनीताल से सटे गांवों में भी पड़ी है सूखे की मार
पहाड़ में चारों ओर सूखे का आलम है। हम कस्बों, शहरों में रहने वाले ही इस मौसम की बेरुखी से हैरान-परेशान हैं तो भला गाँव के क्या हाल होंगे ? हमने जायजा लिया विकसित नैनीताल के आसपास, नैनीताल-रातीघाट पैदल मार्ग में फैले कुछ गाँवों का। नैनीताल के पहाड़ों को पार कर हमें बिल्कुल एक नई [...]
देशभक्त रामदेव को राष्ट्रध्वज के सम्मान का ख्याल नहीं
स्वयंभू योगगुरु स्वामी रामदेव अपने योग शिविरों में देशभक्ति और चरित्र निर्माण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। अपने से बड़ा चरित्रवान और देशभक्त वे किसी और को नहीं मानते। उनके पतंजलि योगपीठ की फार्मेसी में कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम वेतन तक न देने का मामला साबित हो चुका है। ग्राम समाज की भूमि पर प्रशासन [...]
कमीशन खाने खिलाने के लिये है हरियाली परियोजना!
जोशीमठ तहसील की ग्राम पंचायत भर्की के अंतर्गत गत पाँच वर्षों से उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना हरियाली 775 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित की जा रही है। गत दिनों पंचायतों के पुनर्गठन की कार्यवाही के तहत भर्की पंचायत में दो पंचायतें गठित की गई और नई पंचायत ‘भेंटा’ अस्तित्व में आई। पंचायतों के गठन के [...]
जमीन को लेकर शुरु हो सकती है खून की होली
सितारगंज से लगभग दो किलोमीटर दूर मुख्य सड़क के किनारे की लगभग तीन एकड़ भूमि पर कुछ अतिक्रमणकारियों ने हाल में कब्जा करने का प्रयास किया। खड़ी गेहूँ की फसल के बीचों-बीच पड़ी झोपड़ी से निकाल कर मजदूरों की पिटाई करके झोपड़ी में रखा तमाम समान बर्तन, बिस्तर आदि वे लूट के ले गये तथा [...]
स्मृति शेष: पद्मादत्त पंत
पत्रकारिता उनके लिये जिम्मेदारी थी हल्द्वानी के वरिष्ठतम पत्रकार पद्मादत्त पंत का 87 वर्ष की आयु में उनके निवास स्थान जगदम्बानगर, हल्द्वानी में दिनांक 16 फरवरी को सायं 7.30 बजे निधन हो गया। उनका जन्म 24 फरवरी 1922 को पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट के ग्राम चिटगल में हुआ था। गाँव में प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने [...]
पौड़ी की होलियों की जान थे दयासागर धस्माना
गढ़ राजवंश के रूप में टिहरी एक समृद्ध सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में जाना जाता था। होली सहित अन्य सांस्कृतिक गतिविधियाँ यहाँ से पूरे पहाड़ में फैलीं। अंग्रेजों के आगमन (1815 ई) के पश्चात् श्रीनगर, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, दुगड्डा, देवप्रयाग की पहचान भी सांस्कृतिक केन्द्रों के रूप में हुई। इस दौर में सड़क यातायात एवं संचार [...]
होली दमित भावनाओं का रेचन है.. मगर संस्कृति की ठेकेदारी ?
बसंत पंचमी आ गयी थी। इस उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन के बाद बौद्धिकों ने आर्थिक मंदी, ग्लोबल वार्मिग का मोर्चा खोल दिया था। एक कविता पर अच्छी चर्चा हुई थी, जिसमें कहा गया था कि चेहरे पीले हो गये हैं, रुमाल पीले हों न हों। एक किसान कवि कह रहे थे, अरे साहब कैसा बसंत, [...]
बगरो बसंत है-होली 2008
[बगरो बसंत में इस बार प्रस्तुत है ‘नया ज्ञानोदय’ के विशेषांक ‘बिन पानी सब सून’ में प्रकाशित अष्टभुजा शुक्ल का रम्य निबंध - पानी पर पटकथा तथा महाकवि कालीदास के मेघदूत का काव्यानुवाद का एक अंश जिसका रुपान्तर केशव प्रसाद मिश्र ने किया है। साथ ही स्व. खड़क सिंह खनी की आत्मकथा - ‘सूरज को [...]
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