लोकतारिणी गंगा इस साल खतरे का कारण बनी है
सप्ताह भर पहले तक देहरादून से 20 किमी दूर सहस्त्रधारा के निकट कारलीगाड़ गांव हरे भरे लहलहाते खेतों के बीच बसा दो सौ की आबादी वाला एक सम्पन्न गांव था। गांव के किनारे बहने वाली बुलड़ी नदी ने अब उसे बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे के ढेर में बदल दिया है। 22 अगस्त को ग्रामीण जन्माष्टमी [...]
माफियाओं की लाइफलाईन गौला ने बिन्दुखत्ता को टापू बना दिया है
गौला नदी, जो माफियाओं के लिए वरदान है, नैनीताल जिले के बिन्दुखत्ता क्षेत्र के निवासियों के लिए स्थायी शोक का कारण बन गयी है। नदी में प्रतिवर्ष आने वाले उफान से यहाँ के किसानों की खेती को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बिन्दुखत्ता के रावतनगर, इन्द्रानगर, खुरीयाखत्ता, शीशम भुजिया और श्रीलंका टापू सहित दर्जनों गाँव [...]
आपदा का शो पीस बन गया है यमुना घाटी का कफनौल गाँव
यमुनोत्री से लेकर जमुना पुल तक लगभग 90 किमी. और गंगोत्री से लेकर धरासू तक लगभग 120 किमी. का रास्ता इन दिनों अत्यन्त संवेदनशील है। अब तक दोनों तीर्थो के मार्ग नहीं खुल पाये हैं। बाहर से आये तीर्थ यात्री तो परेशान हैं ही, स्थानीय लोगों की भी मुसीबतें कम नहीं है। उत्तरकाशी जनपद के [...]
अधूरी योजनायें और दावाग्नि भी आपदायें पैदा करती हैं
आँकडे़ बतलाते हैं कि पूरे विश्व के स्तर पर 6 प्रतिशत की दर से आपदाएँ बढ़ रही हैं और इसमें मरने वाले 80 प्रतिशत गरीब तथा 20 प्रतिशत अमीर लोग होते हैं। मगर तथाकथित विकास योजनाओं से हम कितनी आपदाओं को जन्म दे रहे हैं, इस पर हमारा ध्यान भी नहीं जाता। गाड़-गधेरों में लापरवाही [...]
आशल-कुशल : 15 अगस्त से 14 सितंबर,2011
अगस्त का महीना प्रदेश के लोगों के लिए बरसात के साथ अतिवृष्टि, भूस्खलन और सड़क सम्पर्क टूटने जैसी नाना प्रकार की मुसीबतें भी लेकर आया। राज्य सरकार ने प्रदेश में चार नए जिलों- रानीखेत, डीडीहाट, कोटद्वार और यमुनोत्री के गठन की घोषणा की। अन्ना हजारे के आंदोलन का असर प्रदेश के कई इलाकों में दिखाई [...]
अभी बदहाल हैं सीमान्त की सड़कें
पूरे भारतवर्ष में उत्तराखण्ड तीसरा राज्य है, जहाँ आपदा की घटनाओं से निपटने के लिए अलग विभाग गठित किया गया है। ऑस्ट्रेलियन मॉडल पर गठित किया गया यह विभाग आपदाओं के प्रति जनजागरूकता के नाम पर करोड़ों रुपये की बर्बादी कर रहा है। इस सीमान्त में आपदाओं का लम्बा इतिहास है। 1977 में तवाघाट में [...]
पहाड़ी लोगों का जीवट और जज्बा कारगर है
इस साल अतिवृष्टि से जन हानि की सूचनाएँ कम हैं, लेकिन करोड़ों रुपए की सरकारी एवं निजी परिसंपत्तियों को नुकसान पहुँचा है। अकेले चंपावत जिले में ही सौ करोड़ रुपए से अधिक की क्षति का आंकलन अब तक किया जा चुका है। जिला मुख्यालय एवं विभिन्न तहसील मुख्यालयों में बनाए गए आपदा नियंत्रण कक्षों में [...]
इस एक साल में और चौड़े हो गये हैं रौखड़
ईश्वर जोशी विगत वर्ष की अतिवृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई की दिशा में सरकार द्वारा किये गये प्रयास निराशाजनक रहे हैं। भविष्य में होने वाली किसी आपदा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके, इसके लिए भी सरकार गम्भीर नहीं दिखायी देती। तमाम सरकारी दावों की पोल अतिवृष्टि के मात्र दो माह [...]

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