चिट्ठी-पत्री : ऐसे कैसे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था….
ओमप्रकाश आर्य के बारे में महेश पांडे के संस्मरण से खबर मिली। पन्तनगर में जब खून की होली खेली गई थी तब जनयुग के लिए रिपोर्टिंग करने पन्तनगर गया था। ओमप्रकाश जी ने मेरी एक या दो रिपोर्ट उस समय ‘उत्तर उजाला’ में छापी थी। महेश पांडे ने उनकी याद दिलाई- वर्षों तक उनसे सम्पर्क [...]
स्वस्ती श्री : शराब और उत्तराखंड
सेवा में, माननीय श्री विजय बहुगुणा जी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड महोदय, हम उत्तराखण्ड में शराब के बढ़ते प्रचलन एवं सरकार द्वारा इसे और अधिक प्रोत्साहन दिये जाने का विरोध करते हैं। शराब के कारण यहाँ गरीबी, बेरोजगारी, बीमारियाँ, सड़क दुर्घटनायें, अपराध, लड़ाई-झगड़े एवं महिला हिंसा में भारी बढ़ोतरी हो रही है। उत्तराखण्ड की जनता ने 1969-1971 [...]
चिट्ठी पत्री : मंत्रमुग्ध और बालमिठाई के जन्मदाता कौन?
आनन्द बल्लभ उप्रेती के धारावाहिक ‘घामतपवे भाबर…….’ से मंत्रमुग्ध हूँ। काश, नैनीताल में भी कोई आनन्द बल्लभ होता। प्रदीप तिवारी,आर. नारायंस, नैनीताल बालमिठाई के जन्मदाता कौन? कई महीनों बाद आपको पत्र लिख रहा हूँ। नै.स. की प्रतीक्षा रहती है, खास कर श्री आनन्द बल्लभ उप्रेती जी के धारावाहिक ‘घामतपवे भाबर से……फटक मारता हल्द्वानी’ [...]
चिट्ठी–पत्री: 25 साल नैनीताल, शेरदा मास पुलर और आज के धाँसू पत्रकार
राजीव लोचन साह का लेख ‘ये साल तो बीते…अब अगले पच्चीस साल’नैनीताल और नैनीताल के निवासियों के लिये चेतावनी है कि नैनीताल शहर और यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को बचाना है तो संगठित होकर और मिल जुल कर गंभीर प्रयास करना शहर की जरूरत बन गई है। वरना इस मरते शहर को देख-देख कर यहाँ [...]
चिट्ठी -पत्री: वैब पत्रकारिता के लिये पुरस्कार?
नैनीताल समाचारउत्तराखण्ड की समसामायिक घटनाओं को प्रमुखता से प्रकाशन करने में अग्रणी पत्र रहा है और गत चौतीस वर्षों से निरन्तर प्रयासरत है। इसके लिये आपकी जितनी सराहना की जाये कम है। अपनी चुटीली क्षणिकाओं व मंचीय अभिव्यक्ति के लिये लोकप्रिय कवि शेरदा अनपढ़ का जाना आघात दे गया। आशा है नैनीताल समाचार गिर्दा की [...]
चिट्ठी–पत्री: लचर डाक व्यवस्था और पुरानी कविता
कल बहुत दिनों के बाद ’नैनीताल समाचार’ डाक से मिला। भेजते आप नियमित होंगे परन्तु यहाँ डाक व्यवस्था ऐसी लचर है कि लोगों के भेजे हुए पत्र, पत्रिकाएँ भी नही मिल पाते। यूं मैं जब भी लखनऊ जाता हूँ, मेरे समधी महोदय (श्री सुरेश चन्द्र जोशी) नैनीताल समाचार और ‘नवल’ के पुराने अंक प्रस्तुत कर [...]
चिट्ठी पत्री : एकपक्षीय या ऊपरी तौर पर एक सतही आकलन ठीक नहीं
आनन्द बल्लभ उप्रेती की सीरीज ’घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी’ अपने शीर्षक से ही जानदार है। इसी भाबर के गट्टे-चने, मिश्री, गुड़ की भेली हमने भी अपने गाँव में बचपन में खूब चखी हैं। सो यह भाबर तो सबकी स्मृतियों में संजोया हुआ है ही, लेकिन उपे्रती जी ने इसमें अतीत, [...]
चिट्ठी–पत्री : पर्यावरण-दोहन, सबका तरीका अपना अपना
अंक 15, 15 से 31 मार्च 2012 मे विनीता यशस्वी का आलेख ‘जमीन बेचने को वे हजारो पेड़ काट सकते हैं’ दिल के कोने मे कुलबुलाने लगा। इसलिये कि हम न तो ‘पर्यावरण बचाओ’ की मुहिम मे गिने जाते है और न पर्यावरण का अन्धाधुन्ध दोहन मे लगे बिल्डरों और भू माफियाओं के साथ हैं। [...]
चिट्ठी–पत्री : हरीश रावत ऐसा क्या कर देंगे जो वो आज तक नहीं कर सके?
आनन्द उप्रेती का धारावाहिक ‘घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी’पढ़ते हुए कुमाऊँ कमिश्नर परसी विंढम के अगस्त सन् 1924 में हल्द्वानी में हुए इस विदाई समारोह का छायाचित्र याद आ गया। एन. एल. साह (नैनीताल) द्वारा खींचे गये इस समूह चित्र में जिन विशिष्ट लोगों को पहचाना जा सका, वे हैं, बायें [...]
चिट्ठी–पत्री : शराब विरोधी पाठक और मुर्गा-दारु प्रेमी पत्रकार ..
शराब विरोधी लेख सटीक, वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण नैनीताल समाचार के 15 से 31 मार्च 2012 के अंक में शम्भू राणा जी का शराब बंदी पर लेख पढ़ा…. शराब उन्मूलन तो वो पता नहीं चाहते हैं या नहीं…..पर शराब बंदी के लिए जो शराबी की मानसिकता को समझने के, उस को सुधारने की जो बात कही [...]
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