स्वस्ती श्री: बड़े भाई निशंक जी, दिल दुखने का अर्थ तो समझते ही होंगे….!!
परम श्रद्धेय निशंक जी, आपके मुख्यमंत्री बनने के बाद से मन बहुत दुःखी है। कारण यह कि जिन समस्याओं को लेकर हम बाकी मुख्यमंत्रियों की खिंचाई कर लेते थे, वह अब करना संभव नहीं है। एक तो बड़े भाई, ऊपर से कवि, साहित्यकार, रचनाकार, पत्रकार भी……। जो भी अंधेरगर्दी उत्तराखण्ड में हो रही है, उसके [...]
चिट्ठी पत्री : ऐसी विशेषतायें बिरले लोगों में ही होती हैं
15-30 जून अंक में ‘ये समस्यायें सुनने वाले’ के जरिये लेखक ने जगह-जगह उग आए तथाकथित नेताओं (जिन्हें लेखक ने लगुआ-भगुवा कहा) की अच्छी खबर ली है। आम चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे छद्म नेताओं ने भी जनता के साथ नजदीकियाँ गाँठ ली हैं। हताश-परेशान जनता इनकी छाँह तले थोड़ा सुकून (कोरे आश्वासन) पाकर धन्य-धन्य [...]
चिट्ठ्ठी पत्री :भ्रष्टाचार,नगर निगम और ब्रज मोहन शर्मा
1-14 जून के अंक में भुवन बिष्ट का आलेख ‘भ्रष्टाचार से तरक्की का रास्ता है हजारे जी’ वर्तमान व्यवस्था का कड़वा सच है। देश के प्रधानमंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्री जब भी अपने तरक्की की बात करते है तो उन्हें भ्रष्टाचार की तरक्की भी देख लेनी चाहिए। कॉमनवेल्थ घोटाला, आदर्श सोसाइटी घोटाला, स्टर्डिया घोटाला, कुम्भ [...]
चिट्ठी पत्री : यह आपकी प्रतिष्ठा के अनुरुप नहीं..
एक सांस्कृतिक संस्था होने के नाते हम अपने नाटकों की निमर्म समीक्षा के लिये तैयार रहते हैं और एक सामाजिक सरोकारों वाले समाचार पत्र के नाते आप को किसी भी नाटक या किसी भी क्रिया कलाप की आलोचना करने का हक भी है। यह आपकी जिम्मेदारी भी है। मगर शहर में दोयम या सोयम दर्जे [...]
चिट्ठी पत्री : क्या यह एकतरफा कोर्ट मार्शल है…?
15-31 मई अंक में प्रकाशित रपट ‘युगमंच का कोर्ट मार्शल’ देखा। आज के समय में जब खबरें, सामाजिक कार्य व संस्कृति तक बिकाऊ हो चले हैं, किस तरह ‘युगमंच’ को जीवित रखा गया है, यह आप भी जानते हैं। कोई जमाना था जब नैनीताल से निकलकर प्रतिभाओं की राष्ट्रीय स्तर तक चमक किसी से छुपी [...]
चिट्ठी पत्री : हमारा इतिहास कितना सच है!!
आपका लेख पढ़कर अच्छा लगा, क्योंकि मीडिया पर फब्ती कसता यह लेख मीडिया से ही आया है। लेकिन चिंता महज आज के मीडिया को लेकर नहीं है। यह तो सदियों से चला आ रहा है कि मीडिया हमेशा कुछ ताकतवर लोगों के हाथ में रहा है। यहाँ तक कि जो इतिहास हम पढ़ते हैं या [...]
स्वस्ती श्री : शैलेश मटियानी जी को जानना आवश्यक…..
करीब सात-आठ साल पहले, मटियानी जी की मृत्यु के बाद साहित्य अकादेमी ने मटियानी जी के संपूर्ण साहित्य का मोनोग्राफ तैयार करने का मुझे काम सौंपा। उनकी मौत से मैं तीन-चार साल तक उबर नहीं पाया था, इसलिए कुछ भी लिख नहीं पाया। बड़े प्रयत्नों के बाद जब उसका आरंभिक हिस्सा ‘कथादेश’ में छपा तो [...]
स्वस्ती श्री: परिसीमन, वन्य जीवन और अवैध शराब
क्या परिसीमन करवायेगा एक और राज्य आन्दोलन? उत्तराखण्ड राज्य बने दस वर्ष हो चुके हैं। लेकिन आज भी कुछ प्रश्न उठ रहे है। आखिर राज्य की मांग क्यों की गई ? राज्य बनने के पश्चात सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक लाभ किसे हुआ। क्या फिर पहाड़वासियों का शोषण होता रहेगा ? या एक नये उत्तराखण्ड आन्दोलन [...]
चिठ्ठी पत्री: कुमाऊँ-गढ़वाल के दिलों को जोड़कर रख दिया है
मैं सर्वप्रथम ‘नैनीताल समाचार’ के द्वारा किए गए आपके कार्य की प्रशंसा करती हूँ। जहाँ आप अपने आस-पास व दूर-दराज के क्षेत्र जहाँ पहुँचना सबके लिए सम्भव नहीं है, वहाँ की खबरों को पाठकों तक पहुँचाते हैं। वाकई यह प्रशंसा योग्य है। पिछले एक वर्ष से मैं आपके समाचार की नियमित पाठक रही हूँ। आपको [...]

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