डी.डी.पंत की विरासत और उक्रांद : चिट्ठी पत्री
डी.डी.पंत की विरासत और उक्रांद ‘रुपहले महानायकों के दौर में डी.डी. पंत का जाना’ शीर्षक से नैनीताल समाचार में संपादक राजीव लोचन साह का तथ्यपरक लेख जमीनी हकीकत से रू-ब-रू करा गया। दिवंगत डी.डी. पंत ने वास्तव में उक्रांद नाम के जिस पौंधे को रोपा था, उसके पुष्पित-पल्लवित होने से पूर्व ही उसमें पतझड़ का [...]
स्वस्ती श्री : बनाओ अपनी अपनी बिजली
30 जुलाई के अमर उजाला में पढ़ा कि कम खर्च में लोग बनायेंगे बिजली। इसी क्रम में, उक्त समाचार में श्री योगेश कुमार का नाम भी देखा तो बड़ी खुशी हुई। योगेश कुमार जी से मैं तीन दशक पूर्व से परिचित हूँ। ये आई. आई. टी. दिल्ली से सिविल इंजीनियर हैं। इनका राजकीय सेवा में [...]
चिट्ठी-पत्री : गंदगी देखकर दुःखद आश्चर्य!
14 मई के अंक में कमल जोशी का लेख ‘यादगार रहेगी केदारनाथ यात्रा’ जानकारियों से भरा तथा रोचक लगा। लेखक की पर्यावरण पर चिंता मुझे अंदर से बेचैन कर गई। इस पर आस्ट्रेलियन सैलानी का यह कहना कि आम लोगों को सफाई पर शिक्षित करना होगा। लेखक लिखते हैं मंदाकनी नदी के किनारे जमा कूड़े [...]
स्वस्ती श्री: प्रधान ज्यू चीड़ाक बोट झन लगाया हो..
प्रधान, ग्राम पंचायत धुंगोली, डाकघर बसभीड़ा, जिला अल्मोड़ा- 263656 मान्यवर प्रधानज्यू, मेरि स्यो! यो फरवरी में मैंके आपण गौं जाणौक मौक मिलौ, सच्ची लेखणयूँ मैं के गौं भौते भल लागो। चौखुटि-द्वाराहाट राजमार्ग बटी गौं तक द्वि-तर्फी-ग्वाली और बसभीड़ा-सीसी मार्ग बणि रौ। सीसी मार्ग पार पुर सीमेण्ट लागी छौ, जैक मतलब यो छ कि कमीशन नी [...]
चिट्ठी-पत्री : सदानीराओं के दिन बहुरेंगे?
नदी आन्दोलन सम्बन्धी आलेख रोचक तथा सूचनाप्रद थे। मुझ जैसे व्यक्ति, जिसका सोमेश्वर स्थित पैतृक गाँव ऐन कोसी के तट पर बसा है, उसका हृदय कोसी की वर्तमान दशा देखकर विचलित हो जाता है। आज यह विश्वास ही नहीं होता कि 40 साल पूर्व तक मई-जून के महीनों में भी कोसी में इतना गहरा पानी [...]
स्वस्ती श्री : क्या नैनो जरूरी है?
14 अप्रेल 2008 को अल्मोड़ा में हिन्दुत्ववादियों की बर्बरता का मामला एक बार फिर सामने आया। ‘दखल: एक सांस्कृतिक अभियान’ द्वारा लगायी गयी पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन 12, 13 तथा 14 अप्रेल को रैमजे इंटर कॉलेज अल्मोड़ा में किया गया था। इस प्रदर्शनी में देश व दुनिया के समस्त नामी लेखकों- प्रेमचन्द, गोर्की, टॉलस्टॉय से [...]
चिट्ठी-पत्री: पत्रकारिता करना तो आज पैसा कमाने का जरिया बन गया है
नैनीताल समाचार एक निर्भीक पाक्षिक पत्र है ‘नैनीताल समाचार’’ का मार्च 15, 2008 का अंक मिला। मन प्रफुल्लित हुआ। कुमाऊँ की होली की यादें ताजा हो गई। त्रयोदशी-चतुर्दशी के पृष्ठों पर सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग और मे.ज. भुवन चन्द्र खण्डूरी जी का सन्देश पढ़ा। यह होली अच्छी रही। मुझे यह कहने में कोई संकोच [...]
चिट्ठी पत्री: राम से बढ़ कर रामकथा है
14 मार्च के अंक में इतिहासकार जसवंत सिंह नेगी के देहान्त पर हरिश्चन्द्र चन्दोला का श्रद्धांजलि लेख पढ़ कर अच्छा लगा। नेगी जी ज्ञान, सहिष्णुता और महानता की प्रतिमूर्ति थे। वे मेरे गुरु रहे। 1948 में अपने गृहनगर श्रीनगर से हाईस्कूल पास करने के बाद मैंने इण्टर पौड़ी से किया था। उन दिनों नेगी जी [...]
चिट्ठी-पत्री : ये टाइम- बेटाइम केवल महिलाओं व लड़कियों के लिये ही क्यों?
मार्च का पहला अंक पढ़ा, जिसमें सम्पादकजी का लेख ‘नदियों की चिंता तो पूरे देश को है’ लेख में पानी का लगातार घटना, नदियों का सूखना व नदियों का प्रदूषित होना, नदियों को रोकना, जोर-जबर्दस्ती विद्युत परियोजनाओं को बचाये जाना आदि गंभीर विस्थापन की समस्याओं को चिन्हित किया है। साथ ही आज जरूरत छोटे-छोटे नदी [...]
चिट्ठी-पत्री : मेरे हर सपने में सिर्फ पहाड़ होता है !!
15 अक्टूबर का अंक न जाने कहाँ से घूम-फिर कर अब मिला है। उसमें गीतांजलि जोशी का लिखा ‘विज्ञान कहाँ है इन विज्ञान प्रदर्शनियों में ?’ पढ़ कर संबंधित शिक्षकों और व्यवस्थापकों के रवैये पर बहुत दुःख हुआ। विज्ञान को पहले तो यों ही जटिल बता दिया जाता है और जो बच्चे स्वतः प्रेरणा से [...]
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