चिट्ठी–पत्री : पर्यावरण-दोहन, सबका तरीका अपना अपना
अंक 15, 15 से 31 मार्च 2012 मे विनीता यशस्वी का आलेख ‘जमीन बेचने को वे हजारो पेड़ काट सकते हैं’ दिल के कोने मे कुलबुलाने लगा। इसलिये कि हम न तो ‘पर्यावरण बचाओ’ की मुहिम मे गिने जाते है और न पर्यावरण का अन्धाधुन्ध दोहन मे लगे बिल्डरों और भू माफियाओं के साथ हैं। [...]
चिट्ठी–पत्री : हरीश रावत ऐसा क्या कर देंगे जो वो आज तक नहीं कर सके?
आनन्द उप्रेती का धारावाहिक ‘घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी’पढ़ते हुए कुमाऊँ कमिश्नर परसी विंढम के अगस्त सन् 1924 में हल्द्वानी में हुए इस विदाई समारोह का छायाचित्र याद आ गया। एन. एल. साह (नैनीताल) द्वारा खींचे गये इस समूह चित्र में जिन विशिष्ट लोगों को पहचाना जा सका, वे हैं, बायें [...]
चिट्ठी–पत्री : शराब विरोधी पाठक और मुर्गा-दारु प्रेमी पत्रकार ..
शराब विरोधी लेख सटीक, वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण नैनीताल समाचार के 15 से 31 मार्च 2012 के अंक में शम्भू राणा जी का शराब बंदी पर लेख पढ़ा…. शराब उन्मूलन तो वो पता नहीं चाहते हैं या नहीं…..पर शराब बंदी के लिए जो शराबी की मानसिकता को समझने के, उस को सुधारने की जो बात कही [...]
चिट्ठी–पत्री : राज्य आंदोलनकारी का सर्टिफिकेट,खुदा खैर करे
कोई राज्य आंदोलनकारी का सर्टिफिकेट पाने के लिये सड़कों पर नहीं उतरा आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण संबंधी लेख को पढ़कर मेरी अंदर की भावनाओं को शब्द मिल गये। पृथक उत्तराखंड राज्य का आंदोलन एक स्वतःस्फूर्त आन्दोलन था। इस आन्दोलन में हर वर्ग, जाति के लोगों ने अपना महान योगदान दिया। इसमें सरकारी कर्मचारी थे, व्यापारी थे, [...]
चिट्ठी–पत्री: अखबार और संन्यास लेने की उम्र में शादी की घोषणा…
महंगाई के दौर में अखबार निकालना बड़ा मुश्किल काम है बहुत लंबे समय बाद अपना प्यारा नैनीताल समाचार इंटरनेट पर पढ़ कर दिल बाग-बाग हो गया। वे सारी तस्वीरें एक-एक कर सामने आने लगीं…… नैनीताल समाचार में छपा अपना पहला लेख और फिर वह लंबा सिलसिला! चलो राजीव दा को बधाई इस थाती को जिंदा [...]
चिट्ठी–पत्री :भगतदा का जाना और उत्कृष्ट पत्रकारिता
भगत दा जैसे लोग बहुत कम हैं इस दुनिया में, जहाँ अक्सर अपने सीमित ज्ञान के बावजूद, बोलने में दबंगता के बलबूते अपनी बात मनवाने वाले लोग भरे पड़े हैं। विविध विषयों पर गहरी जानकारी रखते हुए भी अपने कथन की अभिव्यक्ति में सरल, नम्र और वचन संयमी होना उनका व्यक्तित्व था। विशेषकर सहकारिता के [...]
चिट्ठी–पत्री : हर शाख में उल्लू बैठा है। न जाने उत्तराखण्ड का क्या होगा
आपके नियमित रूप से प्राप्त होने वाले अंक मैं एक रात्रि में ही पूरा पढ़ जाता हूँ और अकसर आक्रोश होता है कि हमने जिस उत्तराखण्ड की कल्पना की थी वह तो माफिया / बिल्डर/ भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों की भेंट चढ़ गया। अब 3 माह के समय में श्रीमान खण्डूरी जी क्या इस ज्वलन्त भ्रष्टाचारी [...]
चिट्ठी-पत्री : गिरदा की बरसी का अंक, आपदाओं की बरसी का अंक
नैनीताल समाचार के माध्यम से जो सत्य निष्पक्ष एवं सटीक सूचना प्राप्त होती है वह अन्य समाचार पत्रों से नहीं मिलती है। इसके लिये नैनीताल समाचार से जुडे़ सभी लोगों को बहुत-बहुत साधुवाद क्योंकि वर्तमान में अन्य समाचार पत्रों से भ्रामक सूचना ज्यादा प्राप्त होती है। साथ ही उत्तराखंड के संदर्भ में जो मौलिक समस्यायें [...]
चिट्ठी पत्री: बीना सजवाण कैसी जनप्रतिनिधि हैं?
1-14 अगस्त 2011 के अंक में जनयात्रा की दूसरी किस्त पढ़ी। प्रथम कॉलम में लिखा है….‘बैठक में धूम सिंह नेगी, विजय जड़धारी जैसे पुराने संघर्षशील साथियों के साथ बीना सजवाण जैसे जन प्रतिनिधि भी मौजूद थे…’ स्पष्ट नहीं हो सका कि बीना सजवाण कैसी जनप्रतिनिधि हैं। इसे लेखन/संपादन की अस्पष्टता कहें या व्याकरण की दृष्टि [...]
चिट्ठी पत्री : ऐसी विशेषतायें बिरले लोगों में ही होती हैं
15-30 जून अंक में ‘ये समस्यायें सुनने वाले’ के जरिये लेखक ने जगह-जगह उग आए तथाकथित नेताओं (जिन्हें लेखक ने लगुआ-भगुवा कहा) की अच्छी खबर ली है। आम चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे छद्म नेताओं ने भी जनता के साथ नजदीकियाँ गाँठ ली हैं। हताश-परेशान जनता इनकी छाँह तले थोड़ा सुकून (कोरे आश्वासन) पाकर धन्य-धन्य [...]
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