चिट्ठी-पत्री : गंदगी देखकर दुःखद आश्चर्य!
14 मई के अंक में कमल जोशी का लेख ‘यादगार रहेगी केदारनाथ यात्रा’ जानकारियों से भरा तथा रोचक लगा। लेखक की पर्यावरण पर चिंता मुझे अंदर से बेचैन कर गई। इस पर आस्ट्रेलियन सैलानी का यह कहना कि आम लोगों को सफाई पर शिक्षित करना होगा। लेखक लिखते हैं मंदाकनी नदी के किनारे जमा कूड़े [...]
चिट्ठी-पत्री : सदानीराओं के दिन बहुरेंगे?
नदी आन्दोलन सम्बन्धी आलेख रोचक तथा सूचनाप्रद थे। मुझ जैसे व्यक्ति, जिसका सोमेश्वर स्थित पैतृक गाँव ऐन कोसी के तट पर बसा है, उसका हृदय कोसी की वर्तमान दशा देखकर विचलित हो जाता है। आज यह विश्वास ही नहीं होता कि 40 साल पूर्व तक मई-जून के महीनों में भी कोसी में इतना गहरा पानी [...]
चिट्ठी-पत्री: पत्रकारिता करना तो आज पैसा कमाने का जरिया बन गया है
नैनीताल समाचार एक निर्भीक पाक्षिक पत्र है ‘नैनीताल समाचार’’ का मार्च 15, 2008 का अंक मिला। मन प्रफुल्लित हुआ। कुमाऊँ की होली की यादें ताजा हो गई। त्रयोदशी-चतुर्दशी के पृष्ठों पर सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग और मे.ज. भुवन चन्द्र खण्डूरी जी का सन्देश पढ़ा। यह होली अच्छी रही। मुझे यह कहने में कोई संकोच [...]
चिट्ठी पत्री: राम से बढ़ कर रामकथा है
14 मार्च के अंक में इतिहासकार जसवंत सिंह नेगी के देहान्त पर हरिश्चन्द्र चन्दोला का श्रद्धांजलि लेख पढ़ कर अच्छा लगा। नेगी जी ज्ञान, सहिष्णुता और महानता की प्रतिमूर्ति थे। वे मेरे गुरु रहे। 1948 में अपने गृहनगर श्रीनगर से हाईस्कूल पास करने के बाद मैंने इण्टर पौड़ी से किया था। उन दिनों नेगी जी [...]
चिट्ठी-पत्री : ये टाइम- बेटाइम केवल महिलाओं व लड़कियों के लिये ही क्यों?
मार्च का पहला अंक पढ़ा, जिसमें सम्पादकजी का लेख ‘नदियों की चिंता तो पूरे देश को है’ लेख में पानी का लगातार घटना, नदियों का सूखना व नदियों का प्रदूषित होना, नदियों को रोकना, जोर-जबर्दस्ती विद्युत परियोजनाओं को बचाये जाना आदि गंभीर विस्थापन की समस्याओं को चिन्हित किया है। साथ ही आज जरूरत छोटे-छोटे नदी [...]
चिट्ठी-पत्री : मेरे हर सपने में सिर्फ पहाड़ होता है !!
15 अक्टूबर का अंक न जाने कहाँ से घूम-फिर कर अब मिला है। उसमें गीतांजलि जोशी का लिखा ‘विज्ञान कहाँ है इन विज्ञान प्रदर्शनियों में ?’ पढ़ कर संबंधित शिक्षकों और व्यवस्थापकों के रवैये पर बहुत दुःख हुआ। विज्ञान को पहले तो यों ही जटिल बता दिया जाता है और जो बच्चे स्वतः प्रेरणा से [...]
चिट्ठी-पत्री : पद+दायित्व-लालबत्ती=सरकारी खजाने के सेहतमंद दीमक
समस्त नैनीताल समाचार परिवार को नव वर्ष व मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें। कुछ समय पहले आपके ही माध्यम से नैनीताल समाचार का वजूद उत्तराखंड की सूचना निर्देशिका से नकारने का समाचार मिला तो कोई बहुत हैरानी नहीं हुई। आज के इस कमीशनखोर, चाटुकारिता वालों और सर्वत्र भ्रष्टाचार मय दीमकों के युग में एक ईमानदार [...]
चिट्टी पत्री : श्रीमती जी को शिकायत है कि……
नैनीताल समाचार परिवार को नववर्ष 2008 की शुभकामनायें। निर्भीक, समाजोद्धारक ‘समाचारियत’ आगे बढ़ती रहे! देर-सबेर पढ़ने को मिलता ही है नैनीताल समाचार। कभी-कभी ज्यादा ही अबेर हो जाती है। इस बार जनवरी में दिसम्बर के दो अंक ‘आठ और नौ’ एक साथ पटक गया डाकिया। अंक आठ डाक विभाग की रेलवे विभाग की तरह ही [...]
चिट्ठी पत्री: जोर जबर्दस्ती से क्या सच्चाइयाँ छुपाई जा सकेंगी ?
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के एस.एस. जीना परिसर अल्मोड़ा में ‘दखल’ द्वारा आयोजित पुस्तक मेले में पुस्तकों को पैरों से कुचलने का मामला स्तब्ध करने वाला है। उत्तराखंड देश में साक्षरता प्रतिशत के आँकड़ों में श्रेष्ठ है और यह राज्य के निवासियों के लिये गर्व का विषय है। परन्तु इसी राज्य में पुस्तकों को कुचलने की कार्यवाही [...]
चिट्ठी-पत्री : सरकार की मान्यता से जरूरी जनता की मान्यता है
‘नैनीताल समाचार’ के लिये यह गर्व का विषय है कि पिछले 30 वर्षों से जनता के बीच उसकी विश्वसनीयता लगातार बढ़ती गई है। राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में समाचार पत्रों की ही नहीं, चैनलों की भी बाढ़ आ गई है। लेकिन ‘नैनीताल समाचार’ का महत्व कम नहीं हुआ। आज मुझे एक खबर की पुष्टि [...]
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