One response to “बच्चों का खेल नहीं बाल मजदूरी खत्म करना”

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    हमें अपने देश की परिस्थियों को ध्यान में रखना होगा, अगर मां-बाप बच्चे पैदा करके उसके रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा की व्यवस्था नही कर सकते। सरकार में नेताजी और साहब अपने बच्चों का कैरियर नही बना पा रहे हैं। फ़िर ऎसे में गरीब बच्चा क्या करे, मैं नही समझता कि १२-१३ साल का बच्चा अगर मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पाल सके तो कोई गलत बात है। नही तो वह चोरी, जेब काटने या चैन स्नैचिंग करेगा। अगर किसी तरह पढ़ भी गया तो बेरोजगारों की लाईन में लगकर अपने मां-बाप और सरकार को कोसता रहेगा। विकसित देशों के मानदण्द इस देश में लागू कराने का दम भरने वाले तथाकथित एन०जी०ओ० इस आड़ में भीख के पैसों से ऐश कर रहे हैं। पर बाल मजदूरी है कि बढ़ती जा रही है, साथ ही एन० जी० ओ० की संख्या और उनको मिलने वाला बजट भी बढ़ रहा है।

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