(‘नैनीताल समाचार’ विगत 20 वर्षों से निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों से जुड़ा रहा है। इन वर्षों में हम बच्चों की रचनाधर्मिता के कायल हुए और उसे ‘चिणुक’ के माध्यम से पाठकों के सम्मुख लाने की एक कोशिश शुरू कर रहे हैं। बच्चों यह कॉलम आप ही का है और हमें उम्मीद हैं कि आप अपनी रचनायें भेजते रहेंगे और इसे आगे बढ़ायेंगे। – सम्पादक)
नानतिन बाड़ी
परोपकार
मैंने एक वृक्ष से पूछा
तुम तो धूप में तपते हो
दूसरों को छाया देते हो,
आखिर ऐसा क्यों करते हो ?
मैंने एक नदी से पूछा
तुम तो भागती रहती हो
दूसरों की प्यास बुझाती हो
आखिर ऐसा क्यों करती हो ?
मैंने फिर चाँद से पूछा
खुद तो अँधेरे में रहते हो
दूसरों को रोशनी देते हो
आखिर ऐसा क्यों करते हो ?
आगे जाकर देखा मैंने
एक ठंड से काँपता व्यक्ति
तत्काल उसे उड़ाया कंबल
और मन को मिली शांति
तीन प्रश्नों का उत्तर पाया
तब मुझको समझ में आया
क्या है परोपकार ?
दया, धर्म और दूसरों से प्यार।
महिमा जोशी
कक्षा 6, मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, नैनीताल
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