(‘नैनीताल समाचार’ विगत 20 वर्षों से निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों से जुड़ा रहा है। इन वर्षों में हम बच्चों की रचनाधर्मिता के कायल हुए और उसे ‘चिणुक’ के माध्यम से पाठकों के सम्मुख लाने की एक कोशिश शुरू कर रहे हैं। बच्चों यह कॉलम आप ही का है और हमें उम्मीद हैं कि आप अपनी रचनायें भेजते रहेंगे और इसे आगे बढ़ायेंगे। – सम्पादक)
रोज की तरह श्याम आज फिर निराश हो कर लौटा। आज आते ही वह अपनी बकरियों की ओर देखने लगा। माँ उससे बार-बार पूछती रही कि वो परेशान क्यों है ? लेकिन श्याम ने कुछ उत्तर नहीं दिया। वह इतना ही बोल सका ‘सि…र दर्द’ और अनायास ही गिर पड़ा। उसकी माँ का तो रो-रोकर बुरा हाल था। रोने की आवाज सुनकर प्रवीन जो कि श्याम के पड़ोस में रहता था और उसका अच्छा दोस्त भी था, वहाँ आ पहुँचा। उसने गाँव के कुछ लोगों को इकट्ठा किया। प्रवीन ने उसे शहर ले जाने की बात कही, तो गाँव वालों ने उसे झिड़कते हुए कहा कि ‘यहाँ ले जाने से तो अच्छा है कि उसे गाँव में ही दिखाएँ।’ पर कैसे ? यहाँ तो कोई अस्प…। प्रवीन की बात काटते हुए सरपंच ने कहा, ‘जरूरी नहीं कि अस्पताल में ही इसका इलाज हो। हम इसे तांत्रिक बाबा शम्भूनाथ के पास ले जाएँगें।’ और उन्होंने ऐसा ही किया। रात हो चुकी थी, इसलिए प्रवीन उनके साथ न जा सका।
उस गाँव में होने वाली यह चौथी घटना थी। बाकी तीन घटनाओं में तीन बच्चों की मृत्यु हो चुकी थी। अन्य घटनाओं में भी गाँव वाले उन्हें तांत्रिक के पास ले गये। लेकिन कुछ फायदा न हुआ। अतः स्वभाविक था कि गाँव वाले श्याम की मृत्यु के बारे में सोच रहे थे। कुछ लोग ऐसे भी थे जो उसे शहरी ईलाज दिलाना चाहते थे, लेकिन ये सरपंच साहब ही थे जो उसे तांत्रिक के पास ले जाना चाहते थे।
दरअसल गाँव वाले इस सच में जीते थे कि उनके गाँव में एक गुफा थी जिसे वे दानवीय गुफा कहते थे। क्योंकि वहाँ पुराने काल का दानव रहता था। लोग मानते थे कि उसकी आत्मा अब वहाँ रहती है। सरपंच साहब को एक बार वह दिखाई दिया। वह बहुत ही भयानक था। उसने उनसे कहा कि हर गाँव वाले को उसे हर सप्ताह अनाज तथा बकरी देनी होगी। ऐसा न करने वाले को मार दिया जायेगा। तब से सभी ऐसा करते थे। जिसने ऐसा नहीं किया उसका परिणाम किसी की मौत के रूप में चुकाना पड़ा। अब श्याम की बारी है। ये सब बताते हुए प्रवीन की दादी ने गहरी सांस ली और प्रवीन को सुला दिया। प्रवीन को उस दिन सारी रात नींद न आई। वह विज्ञान का अच्छा विद्यार्थी था और उसे पता था कि आत्मा, भूत-प्रेत कुछ नहीं होता। वह इस रहस्य से परदा उठाना चाहता था। सुबह हुई तो उसे पता चला कि श्याम की मृत्यु हो चुकी है। उसे बड़ा दुःख हुआ। उसने देखा कि श्याम के घर से बकरियाँ गायब हैं। पूछने पर पता चला कि वह तांत्रिक ने श्याम के ईलाज के लिए माँगी थी। अब तो प्रवीन को पक्का यकीन हो गया कि यह भूत नहीं बल्कि इंसान का ही काम है। उसे उस तांत्रिक पर शक हुआ। रविवार का दिन था। प्रवीन के पिता को काम के सिलसिले में शहर जाना था। प्रवीन भी उनके साथ गया और कुछ सामान खरीद लाया। उस हफ्ते के अनाज को लेकर गाँव वाले उस गुफा में गये। प्रवीन भी उनके साथ था। प्रवीन ने गुफा के बाहर एक कैमरा लगा दिया। दूसरे दिन प्रवीन रात में चुपचाप उस गुफा के पास गया और कैमरे को निकाल लाया। उसने कैमरे में देखा कि कौन वह शख्स था, जो गुफा से अनाज को लाया। उसे काफी हैरानी हुई उसे अब भी यकीन न हुआ। उसने एक योजना बनाई। उसने अपने विज्ञान टीचर को सारी घटना बताई और कैमरे से उसकी फोटो भी दिखाई। वे दोनों रविवार से पहले दिन गुफा में छिप गए और अपनी योजनानुसार काम करने लगे। दूसरे दिन जब सभी अनाज लेकर गुफा में पहुँचे तो प्रवीन व उसके टीचर ने कुछ पुलिस वालों को वहीं रोक लिया, वे सब छिप गये। कुछ समय बीत गया तो वे गुफा के अंदर गये। तब तक गुफा के अन्दर दो भूत गड्ढे में गिरे थे और चिल्ला रहे थे। दरअसल वह गडढ़ा प्रवीन व उसके टीचर ने खोदा था। वे अन्दर गये और उन्हें वहीं बाँध कर चले गये। दूसरे दिन जब उन्होंने सभी को बुलाया तो सब हैरान थे कि वहाँ तांत्रिक बाबा बंधे हुए थे। पर असली भूत तो थे सरपंच जी। जो सारे गाँव वालों को ठग रहे थे। बाद में सभी ने तांत्रिक व सरपंच का पीट-पीट कर बुरा हाल कर दिया और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।
नीरज डंगवाल, कक्षा 9,बी-3,रा.इ.कॉ., अल्मोड़ा
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