नानतिन बाड़ी
(‘नैनीताल समाचार’ विगत 20 वर्षों से निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों से जुड़ा रहा है। इन वर्षों में हम बच्चों की रचनाधर्मिता के कायल हुए और उसे ‘चिणुक’ के माध्यम से पाठकों के सम्मुख लाने की एक कोशिश शुरू कर रहे हैं। बच्चों यह कॉलम आप ही का है और हमें उम्मीद हैं कि आप अपनी रचनायें भेजते रहेंगे और इसे आगे बढ़ायेंगे। – सम्पादक)
मुझे सबसे खराब मेरी कोई चीज टूट जाना लगता है। मुझे सुबह उठना गंदा लगता है। मुझे स्कूल देर से जाना गंदा लगता है। मुझसे मेरे दोस्त नहीं बोलते हैं तो गंदा लगता है। मेरे पापा या मम्मी गुस्सा करते हैं तो गंदा लगता है। मेरे से कोई मेरी चीज ले लेता है तो गंदा लगता है। मुझे रात को सब्जियाँ खाना गंदा लगता है। मुझे दिन में सोना गंदा लगता है। मुझे बारिश में भीगना गंदा लगता है। मुझे अंधेरे में रहना गंदा लगता है। मुझे सुबह उठकर कभी-कभी दाँत मलना गंदा लगता है। मुझे अपना कोई भी काम करना गंदा लगता है। मुझे टीचर से डाँठ खाना गंदा लगता है। मुझे फूलों में पानी देना गंदा लगता है। मुझे अगर चोट लग जाये तो गंदा लगता है। मुझे स्कूल में हिन्दी का विषय पढ़ना गंदा लगता है। मुझे घर आकर स्कूल के कपड़े खोलना गंदा लगता है। अगर कोई परेशानी आती है तो गंदा लगता है। मुझे सबसे गंदा मेरी स्केल का टूट जाना या खो जाना लगता है। मुझे टेबिल टेनिस गंदा लगता है। मुझे गाने सुनना गंदा लगता है। मुझे अंग्रेजी में बात करना गंदा लगता है। मुझे सुबह को बाहर घूमना गंदा लगता है। मुझे किसी की चीज लेना गंदा लगता है। मुझे बिल्लियाँ गंदी लगती हैं। मुझे खिलौने लेना गंदा लगता है। मुझे कहीं किसी की शादी में जाना गंदा लगता है। मुझे अंगूर गंदे लगते हैं।
कनक चौधरी, कक्षा 4, बिशप शॉ इन्टर कॉलेज, नैनीताल
मुझे अपनी जिन्दगी में सबसे गंदा लगता है अपने विद्यालय का स्वीमिंग पीरियड। वहाँ हमारे अध्यापक हमें कभी भी स्वीमिंग नहीं सिखाते। जिन लोगों को पहले से स्वीमिंग आती है बस उन्हीं के पास रहते हैं। हमें स्वीमिंग के लिये सिर्फ 10 मिनट ही मिलते हैं लेकिन जिनको स्वीमिंग आती है उन्हें 25 मिनट तक स्वीमिंग करने देते हैं और कोई थोड़ा सा भी मजा करना चाहे तो उसकी स्वीमिंग एक हफ्ते तक बंद कर देते हैं।
दूसरी चीज जो मुझे बुरी लगती है वो है मेरा स्कूल का लंच। उस डब्बे में कभी कोई अच्छी चीज नहीं होती जैसे हमेशा ही रोटियाँ और आलू की सब्जी होती है। उस डिब्बे में मैगी, सेंडविच जैसी चीजें हो तो मजा आ जाये।
तीसरी चीज जो मुझे गंदी लगती है वो है मेरे स्कूल की आर्ट कक्षा। वहाँ हमारे अध्यापक गौरव रॉय हमें कुछ नहीं कराते, कुछ भी नहीं और जो बच्चा आर्ट के अलावा कुछ और काम करे तो उसे सजा देते हैं। चौथी चीज जो मुझे बहुत गंदी लगती है वो है सुबह-सुबह जल्दी उठना। मैं रात को जल्दी सो जाता हूं पर फिर भी सुबह मेरी आँख नहीं खुलती, फिर मेरी माँ मुझे बिस्तर के बाहर फेंक देती है।
पाँचवी और आँखरी चीज जो मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती वो है अपने माँ की डाँट। कभी-कभार तो वो मुझे मार भी देती है जब गलती मेरी नहीं मेरे बड़े भाई की होती है। जब मुझे मार पड़ चुकी होती है तो मेरे भाई हँसते हैं। वैसे लोगों की कोई भी चीज गंदी नहीं लगनी चाहिये तभी तो आप पढ़ते हैं कि अकबर ने हुमायूँ को मारा था क्योंकि वे उसे पसंद नहीं करता था। ऐसे ही बहुत लोग मरे हैं क्योंकि कोई उन्हें पसंद नहीं करता था। हम लोगों को एक दूसरे से प्यार करना चाहिये।
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा।
अनिरुद्ध सिंह,कक्षा 5, सैंट जोसेफ कॉलेज, नैनीताल