नानतिन बाड़ी
(‘नैनीताल समाचार’ विगत 20 वर्षों से निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों से जुड़ा रहा है। इन वर्षों में हम बच्चों की रचनाधर्मिता के कायल हुए और उसे ‘चिणुक’ के माध्यम से पाठकों के सम्मुख लाने की एक कोशिश शुरू कर रहे हैं। बच्चों यह कॉलम आप ही का है और हमें उम्मीद हैं कि आप अपनी रचनायें भेजते रहेंगे और इसे आगे बढ़ायेंगे। – सम्पादक)
मुझे सबसे खराब लगता है
हम अपनी रोज की जिन्दगी में बहुत काम करते हैं, अपने विद्यालय, घर आदि चाहे वे काम हमें अच्छे लगें या न लग़ें। आज मैं आपको कुछ ऐसे काम बताना चाहती हूँ जो न मुझे करने अच्छे लगते हैं और न मैं चाहती हूँ कि कोई और करे।
पहला खराब काम-
मैं नैनीताल शहर में रहती हूँ। नैनीताल एक बहुत सुन्दर पर्यटक स्थल है। इसे 1841 में पी.बैरन ने खोजा था। उन्होंने यहाँ प्राकृतिक सौन्दर्य की वजह से एक शहर बसाने की सोची थी लेकिन जैसा पी बैरन के समय नैनीताल था, अब वैसा नहीं रहा। नैनीताल में बहुत प्रदूषण हो गया है। पर्यटकों के साथ-साथ नैनीताल के लोग भी कचरा इधर-उधर फेंक कर नैनीताल को गंदा कर रहे हैं। गाडि़याँ सामान्य से अधिक चलने लगी हैं। मैं चाहती हूँ कि ऐसा कोई भी काम न किया जाये जिससे नैनीताल प्रदूषित हो। नैनीताल के निवासियों और यहाँ आने वाले हर पर्यटक से मैं कहना चाहती हूँ- देखने के नजरिये को बदलो
खोट मत निकालो, गलत सीख नहीं बल्कि अच्छी सोच को अपनालो।
दूसरा खराब काम-
कितने लोग ऐसे हैं, विद्यार्थी और कोई भी इंसान अगर वो जीवन में कुछ प्रयास नहीं कर पाते तो वे आत्महत्या जैसी गलत चीज कर बैठते हैं। मैं नहीं चाहती कि कोई भी इतनी जल्दी हिम्मत हार कर इस अमूल्य जीवन को गवायें। इसलिये कहा गया है -
ईश्वर की देन जीवन/ईश्वर का दिया हुआ प्रेम जीवन/यही तो है अमूल्य जीवन/यहीं तो है अमृततुल्य जीवन
मत गवा इसे तू प्राणी/ वरना पछतायेगा तू करके ऐसे पाप
तीसरा खराब काम -
इंसान भली-भांति जानता है कि पेड़ उसके जीवन के लिये कितने जरूरी हैं लेकिन वह अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिये इन पेड़ों को काटता जा रहा है और पर्यावरण को बर्बाद करता जा रहा है। वह यह जानता है कि पेड़ उस प्राणवायु का भंडार है जिसके बिना किसी भी प्राणी का एक पल भी जीना मुश्किल है पर पता नहीं वह यह क्यों नहीं समझता। मैं चाहती हूँ कि अगर पेड़ों को काटा जाता है तो उनके नवोरोपण का भी इंतजाम होना चाहिये। इसीलिये मैं कहना चाहती हूँ -
पर्यावरण बड़ा सौन्दर्य है
जो याद दिलाता हमें हमारा कर्तव्य है,
वो कहता है बचाओ मुझे/ ना बेचना कभी भी मुझे /जैसे मधुमक्खियों के बिना छत्ते नहीं हो सकते /वैसे मेरे बिना तुम भी जीवित नहीं रह सकते।
ऐसे भी बहुत काम हैं जो मुझे बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते हैं, जैसे – झूठ बोलना, लड़ाई-झगड़ा करना, बच्चों को नौकर बनाना आदि। लेकिन ये तीन ऐसे काम हैं जो मुझे बहुत खराब लगते हैं और मैं चाहती हूँ कि ये कहीं भी न हों। मैं सभी से यह कहना चाहती हूँ -
दुनिया से मिलाओ कदम
अच्छी सोच में है काफी दम
बुराई को कर दे ये खत्म
ताकि अच्छाई से प्रभावित हों हम
कविता तिवारी, कक्षा 6
मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, नैनीताल
aatankvad manavta ka bhakshak
aatankvad vishwa ki sabse badi samasya hai vartamaan me hi nahi prachinkaal se hi aatankvad ki samasya chali aa rahi hai phark sirf itna hai ki prachinkaal me yeh sirf vishesh varg ya samuday me hua karta tha vartamaan me iska roop vikraal hokar vishwa me phel gaya hai
kehna yeh hoga ki prachin kaal mein ram raavan ka yudh aur kourav pandav ka yudh ek aatankvad ka hi roop tha jo haathi ghode dhanushbaad tatha dhaal talwar se hua karta tha aur mughal kaal me bhi yeh do raajaon ke bich isi tarah dhaal talwar aur haathi ghodo ke dwara hi hua karta tha
lekin vartamaan yug iss yudh ne aatankvad ka roop le liya hai aur yeh itna vikraal ho gaya hai ki samuche vishwa me phel gaya hai tatha atom aur parmanu jaise bhayankar visphotak hathiyaaron se samuche vishwa mein maanavjaati ke liye khatra ban chuka hai
itne bhayankar aur ghatak visphotak padarthon ke rehte maanavjaati hi nahi balki samuche sansaar ke jeev jantuon ka jeevan shanbhangur bankar reh gaya hai