घने जंगलों के बीच स्थित कार्बेट फाल विदेशी सैलानियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। प्राकृतिक सौन्दर्य व दिलकश नजारों को समेटे फॉल को निहारने आने वाले विदेशी सैलानियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन इस वित्तीय वर्ष में राजस्व घटा है। जबकि इससे सरकार को प्रति वर्ष लाखों रुपये का मुनाफा हो रहा है।
कालाढूँगी के नया गाँव में स्थित कार्बेट फॉल चारों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ है। वर्ष 1998-99 में ग्राम विकास अभिकरण द्वारा 13.69 लाख रुपये की लागत से सँवार कर प्राकृतिक झरने को सैलानियों के लिए खोला गया था। प्राकृतिक झरने की देख-रेख का जिम्मा वन विभाग को सौंपा गया था। वन विभाग ने सैलानियों की आमद बढ़ाने के लिए फॉल के आसपास फिश पॉंड, बच्चों के लिए पार्क, झूले लगाने के साथ ही साल के पेड़ों के बारे में जानकारियाँ देने के लिए ‘सेंटर फार ऐक्सीलेंस’ बनाने की योजना बनाई थी। सेंटर फार ऐक्सीलेंस के लिए भवन तो बना दिया गया मगर उसके दरवाजे पर हमेशा ही ताला लटका रहता है। विभाग की बाकी योजना केवल फाइलों तक ही सीमित रह र्गइं।
फॉल के आसपास लदुआगाड़, बाराती रौ, घटगढ़ जैसे कई खूबसूरत प्राकृतिक झरने हैं, जो अभी भी पर्यटकों की पहुँच से कोसों दूर हैं। आज तक इनको सँवारने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई। वहीं फॉल आने वाले पर्यटकों के लिए यहाँ कैंटीन व फर्स्टएड तक की व्यवस्था नहीं है। वन विभाग केवल पर्यटकों से शुल्क वसूलने तक ही सीमित रह गया है। सरकारी उपेक्षा के बावजूद कार्बेट फॉल ने अपनी खूबसूरती की वजह से पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। खास तौर पर गर्मियों के सीजन में फॉल सैलानियों से पैक रहता है। कार्बेट पार्क आने वाले अधिकांश पर्यटक फॉल में आना पसंद करते हैं। बारह महीने पर्यटकों के लिए खुले रहने वाले फॉल में कुल सैलानियों की आमद घटने की गवाही खुद आँकड़े दे रहे हैं। विभाग से मिले आँकड़ों के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में फॉल घूमने आए 1,14,294 सैलानियों से 15,21,010 रुपये का राजस्व मिला, जबकि वर्ष 2009-2010 में 1,23,945 सैलानियों से 16,21,500 रुपये व 2008-09 में 136 विदेशी सहित 80,554 पर्यटकों से 10,533,60 रुपये का राजस्व मिला था। दिलचस्प बात है कि पिछले वित्तीय वर्ष में आए 74 विदेशी सैलानियों की तुलना में इस बार यह संख्या बढ़कर 208 पर जा पहुँची है। जबकि स्वदेशी पर्यटकों की आमद पिछले बार की तुलना में घटी है। पर्यटकों की खास पसंद माने जाने वाले फॉल के विकास के लिए सरकार के पास बजट नहीं है।
रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर एसडीओ रमाशंकर तिवारी का कहना है कि कॉर्बेट फॉल को विकसित करने की कोशिश की जा रही है। फॉल के साथ ही घटगढ़, बाराती रौ, लदुआगाढ़ में स्थित प्राकृतिक झरनों को संवारने का प्रस्ताव ईको टूरिज्म विभाग को भेजा गया है। बजट मिलने पर इनको सँवारने की कार्यवाही की जाएगी। कार्बेट फॉल के भीतर स्थित ‘सेंटर फार ऐक्सीलेंस’ के भवन में कैटींन खोलने की योजना बनाई जा रही है। पिछले की अतिवृष्टि से फॉल को जाने वाली सड़क व पुल टूट गया था। इनकी मरम्मत करने के लिए फॉल को दो महीने बंद किया गया है। इसी वजह से सैलानियों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले में कम हुई है।