‘पूरे देश का कहना है अन्ना हजारे गहना है।’ ‘जब तक सूरज चांद रहेगा अन्ना तेरी बात कहेगा’, ‘अन्ना नहीं तू आंधी है, नये दौर का गांधी है।’ ये सारे नारे अन्ना हजारे के योगदान के बारे में हैं। हर कोई कमर कस कर आपके साथ जुड़ने को तैयार हैं। स्कूल भी बच्चों के हाथ में स्लोगन लिखी तख्तियाँ देकर, भेड़-बकरियों की तरह लाइन लगा कर आपकी जय-जयकार करवाते हैं। क्यों न हो आपने काम ही ऐसा किया है।
अन्ना साहब, आपका आंदोलन बिल्कुल सही है। आप आदमी भी अच्छे हैं। आपकी नीयत पर भी कोई शक नहीं है। आपने लोकपाल विधेयक लाकर एक ऐसी शुरूआत की है जिससे पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गयी है। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले आप पहले व्यक्ति नहीं हैं। आपसे पहले यहाँ पहाड़ों में भी ये आवाज उठी थी लेकिन हमारे पास संसाधन कम हैं। हम यहाँ टोने-टोटके के भरोसे रहते हैं तो आप दिल्ली में जन्तर-मन्तर करते हैं। आपने शुरूआत तो धमाकेदार की है, अंजाम भी यादगार होना चाहिये। आपके कारण दूरसंचार मंत्री ‘ए राजा’ को ‘अबे राजा’ बनाकर संसार से इतना दूर किया कि बेचारे कोठरियों में जा बसे। कनिमोझी को महिला होने के बावजूद कोई माफी नहीं मिली। कई मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को उम्रकैद करवा दी गयी। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ने का अंदेशा है। अगर ऐसा हो तो विदेशों में देश की छवि और खराब होगी। मंत्री और नेताओं को बंद करना अच्छी बात नहीं है।
यूं तो भारत में कई समस्यायें हैं, पर आपने भ्रष्टाचार ही क्यों चुना ? आखिर आपको भ्रष्टाचार से इतनी नफरत क्यों है ? असली भ्रष्टाचार वो है जो पचास फाइल और पच्चीस अफसर बदलने के बाद सामने आये। जब कोई मामला सामने नहीं आता तो समझो भ्रष्टाचार हुआ ही नहीं है। हमारे देश में न तो भूखे रहने वालों की कमी है न भूख से मरने वालों की। लेकिन जब कुछ खास लोग, खास समय में खास जगह पर ऐलान करके प्रशासन की निगरानी में भूखे रहते हैं तो उसे अनशन कहते हैं। आपके भूखे रहने का अंदाज भी निराला है। आपको ये विचित्र आदत अंग्रेजों के जमाने से लगी है। लेकिन जो लोग शर्मा-शर्मी आपके साथ भूखे रहने को आये थे बेचारे फँस गये। आंदोलन में कूदे तो जोश के साथ थे पर होश में आने के लिये अस्पताल का सहारा लेना पड़ा। आपका अनशन करना भी चर्चा का विषय बन जाता है।
आपने अंग्रेजों का जमाना भी देखा है और आजाद भारत को भी। आप तब भी नाराज थे और आज भी नाराज हैं। आपकी नाराजगी ने आपको ‘एंग्री ओल्डमैन’ बना दिया है। आप हिट हो गये हैं। जिन लोगों ने गांधी को नहीं देखा, उन्होंने अपना गांधी आप में तलाश लिया है। अब भ्रष्टाचार हटे या न हटे, आप पीछे नहीं हट सकते हैं। वैसे आप से पहले ‘बापू’ भी यही आंदोलन करने वाले थे पर किसी ने उन्हें गोली मार दी। आपने बापू के छूटे हुए कामों का फायदा उठा लिया। लेकिन ध्यान रहे, इस दौर में गांधी बनना इतना आसान नहीं है। आजादी के बाद देश में या तो दंगे बढ़े हैं या फिर नंगे। गांधी बनने में आदमी के कपड़े उतर जाते हैं। कुर्ते, पजामे से आदमी लंगोटी और खड़ाऊँ में आ जाता है। गांधी जी के पास सहारे के लिये एक लाठी तो थी, आपके पास तो वो भी नहीं है।
हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ये कहते हैं कि हम तरक्की की राह पर हैं। आपके हिसाब से ये रास्ता ‘वाया’ भ्रष्टाचार होकर जा रहा है। आपके हिसाब से जो जितना भ्रष्टाचारी है उसने उतनी ही तरक्की की है। लेकिन भ्रष्टाचारियों की भी तो कई मजबूरियाँ हैं। कुछ बेचारों के बच्चे विदेशों में फेल हो रहे हैं तो कुछ की फैक्ट्रियाँ दो से चार नहीं हो पा रही हैं। कुछ भ्रष्टाचारी ‘अल्पकालीन’ होते हैं, जो कम ‘घूस’ में काम कर देते हैं। कुछ दीर्घकालीन होते हैं जो अपने ही विभाग वालों और कर्मचारियों से धूस खाते हैं। कुछ पैदाइशी भ्रष्टाचारी होते हैं। ये बाद में मंत्री बनते हैं। कुछ लोग डरते-डरते भ्रष्टाचार से घर का चूल्हा और बच्चों की फीस भरते हैं। ये लोग जो भी कर रहे हैं उसी को तरक्की कहकर प्रधानमंत्री तो खुश हैं लेकिन आप नाराज होकर भूख हड़ताल में बैठ जाते हैं। वैसे बाल हठ और जोग हठ में कोई फर्क नहीं है। रही ‘त्रिया’ वाली बात तो वो आपके पास है नहीं। एक बार भगवान कृष्ण भी चंदामामा के लिये मचल गये थे। माता यशोदा ने उन्हें प्रतिबिम्ब दिखा कर बहला लिया। वो मान गये। आप भ्रष्टाचार हटाने के लिये मचल गये हैं, लोग आपको फाइलें दिखा रहे हैं, स्पष्टीकरण दे रहे हैं, और तो और सचमुच का चंदा देना चाहते हैं, लेकिन आप हैं कि मानते नहीं।
हिन्दुस्तान में तरक्की और भ्रष्टाचार एक दूसरे के पूरक हैं। कुछ तो भ्रष्टाचार से ही देश का भला करना चाहते हैं। एक बार मि. नटवर लाल ने कहा था कि यदि सरकार मुझे विदेशों को लूटने की इजाजत दे तो मैं भारत को फिर से सोने की चिडि़या बना सकता हूँ। तत्कालीन सरकार उसी समय उठी थी और देश के सोने को विदेशों में गिरवी रखने के जरूरी काम में व्यस्त थी। इसलिये बात अनसुनी कर दी गयी। नटवर लाल भ्रष्टाचार से देश का भला करना चाहता था, इस कारण पकड़ा गया। नेता लोग न जाने कब से देश को खा रहे हैं। कइयों ने तो इतना खाया कि उन्हें अपच हो गयी। सरकार ने उन्हें तोपों की सलामी देकर एक चौराहा उनके नाम कर दिया। भ्रष्टाचार देश में खेल हो गया है। इसलिये अगर खेलों में भ्रष्टाचार हो जाये तो कोई आश्चर्य नहीं। भ्रष्ट पुरुषों के खेल क्रिकेट को आजकल दुकानदार खेलते हैं। कोई कोक बेचता है तो कोई पेप्सी। ये आने वाले समय में कच्छा-बंडी भी बेच सकते हैं। देश में पहले ‘राष्ट्रमंडल’ खेलों के आयोजन में जोड़तोड़ होता है और बाद में उस जोड़तोड़ का भंडाफोड़ होता है। कई नपते हैं। बेचारे कलमाडी, जिन्हें परसोमाडी और बरसोमाडी होना था, उन्हें ऐसी लात मारी कि जेल में जन्मदिन मनाना पड़ा। ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार से ली गयी हर चीज बेकार ही जाती है। वो चीजें कभी-कभी देश की इज्जत बचाने में बड़ी काम आती है। अब बोफोर्स तोप को ले लो। जब दुश्मन देश की सीमा में घुस आया था तो इसी तोप ने उसे खदेड़ा था। हमें अपनी ही जमीन वापस लेने पर विजय दिवस मानने का मौका मिला था। ये बात अलग है कि उस समय सेना के सर्वोच्च अधिकारी छुट्टी पर थे।
हमारा राज्य भी भ्रष्टाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश में लगा है। इस बात की खुशी है कि हमारे शिक्षक कैमरामैन बनकर अच्छी-अच्छी अश्लील क्ल्प्सि बना रहे हैं। शायद हो सकता है कि भविष्य में आने वाली सरकारें इसमें पुरस्कार वितरण भी करने लगे। दरोगा भर्ती घोटाला, कुम्भ मेला घोटाला, स्टर्डिया घोटाला, पनबिजली घोटाला, जमीनों की खरीद-फरोख्त घोटाला इस बात का प्रमाण है कि हमारा राज्य भी धीरे-धीरे तरक्की की राह पर अग्रसर है। ईमानदार उतने ही बचे हैं, जिन्हें मौका नहीं मिल पाया है। सब अपनी बारी के इंतजार में है। पिछड़ा राज्य होने के कारण यहाँ के अफसरों को अभी तक रिश्वत खाने का तमीज ही नहीं आया है। वेतन मिलता है चालीस हजार और पकड़े जाते हैं दो हजार की रिश्वत लेते हुए। इन्हें पकड़ने में भी शर्म आती है। इनके लिये भ्रष्टाचार और मिक्स अचार में कोई फर्क नहीं है। आपने अच्छा किया जो अकेले इस राय का बीड़ा उठाया वरना बीड़ी जैसे ये नेता आपको वैसे ही अकेले से अकेलेतम कर देते जैसे किसी खिलाड़ी को पहले मेडल पहनाते हैं और फिर उसे डोप टैस्ट में फँसाकर आजीवन प्रतिबंध लगा देते हैं।
अन्ना साहब आप जुग-जुग जियें। अब लोग आपके साथ जुड़ने लगे हैं। पूरे देश को आपसे न्याय और भरोसे की उम्मीद है। वरना देश और देशवासी कितनी तरक्की कर रहे हैं आपको तो मालूम ही है। जनता अगर आपकी तुलना चाँद सितारों से कर रही है तो जरूर आपने उनके दिल में घर बना लिया है। लोग आपकी एक आवाज पर एकजुट होने को बेताब है। लेकिन आपसे जुड़ने से पहले इस बार की तरक्की की फसल में से हर कोई कुछ न कुछ काट लेना चाहता है। नेता लोग चांदी काट रहे हैं तो विपक्ष वाले वनवास काट रहे हैं। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से पुछो तो वो या तो चुप्पी काट रहे हैं। या फिर उद्घाटन और शिलान्यास के रिबन काट रहे हैं। लड़की वाले चैक काट रहे हैं, लड़के वाले गला काट रहे हैं। झूठे मलाई काट रहे हैं और सच्चे जैसे तैसे दिन काट रहे हैं। अस्पताल वाले बस पर्ची काट रहे हैं तो दवा की दुकान वाले जेब काट रहे हैं। बेचारे मरीज कभी यहाँ, तो कभी वहां चक्कर काट रहे हैं। एन.जी.ओ वाले जनता को भ्रमित कर पहले कुछ साल काट रहे हैं और दो चार सालों के बाद फंडिंग का लम्बा चौड़ा माल काट रहे हैं।
सरकारी ऑफिसर छुट्टी काट रहे हैं, उनके कर्मचारी मौज काट रहे हैं। कान के कच्चे लोग नाक काट रहे हैं। बेगाने रास्ता काट रहे हैं और अपने कन्नी काट रहे हैं। जनता पेट काट-काट कर समय काट रही है और आप हैं कि बबाल काट रहे हैं। इस बयार में मेरे हिस्से में सिर्फ बाल और नाखून आये हैं। पहले मैं इनको कटवा कर हिस्से के लिये हल्ला काटता हूँ, उसके बाद आप और भ्रष्टाचार दोनों से पल्ला काटता हूँ।
bhut hi pyara ,or sahi likha gaya hai,,,,aapne sari batt ek artical me kah di ,,, verry nice