पिछले साल तक वीआईपी सीट का दर्जा रखने वाली धुमाकोट विधानसभा के दिन अब लद गए हैं। पौड़ी जनपद में इस वर्ष आपदा राहत कोष की दो करोड़ रुपये की बंदरबाँट में पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचन्द्र खण्डूरी की विधानसभा धूमाकोट के हाथ सबसे कम 14.79 लाख की धनराशि लगी और 45.26 लाख रुपये पाकर मुख्यमंत्री की विधानसभा थलीसैंण प्रथम स्थान पर रही। दूसरे स्थान के लिये तरजीह जिले की एकमात्र मंत्री विजया बड़थ्वाल की यमकेश्वर विधानसभा को दी गयी, जिसे 32.86 लाख रुपये दिए गए।
हर साल मिलने वाली इस करोड़ों की धनराशि पर पार्टी कार्यकर्ता से लेकर विधायक तक सबकी नजरें गड़ी होती हैं। इसे दोनों हाथों से लपकने के लिए कुछ भी कर गुज़रने से गुरेज़ नहीं होता। यहाँ तक कि कभी हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। हमेशा की तरह इस बार भी प्रस्तावों को स्वीकृत करवाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से सैकड़ों सिफारिशी पत्र पहुँचे, जिसका असर आबंटन के आँकड़ों में साफ दिखायी देता है। 2
यह एक तरह का जंगलराज है, जहाँ भारत सरकार के आपदा राहत कोष के बँटवारे का पैमाना दैवीय आपदाओं से हुई वास्तविक क्षति न होकर विधायकों और मंत्रियों का ऊँचा कद है। ऐसे में जंगल के राजा का हिस्सा यदि सबसे अधिक हो जाये तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। धनराशि आबंटन के लिए भारत सरकार की गाईड लाईन कोई मायने नहीं रखती। क्षतिग्रस्त निर्माण कार्य की राजस्व विभाग से जाँच के बाद कार्यदायी संस्थाओं की ओर से प्राक्कलन तैयार कर जिलाधिकारी द्वारा योजनागत तरीके से धनराशि जारी करने जैसी लंबी प्रक्रिया की अपेक्षा जो सीधा और सपाट तरीका अपनाया जाता है, वह है जिसकी लाठी उसकी भैंस।
























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