मेरे एक रिश्तेदार हैं जो केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में रहते हुए अपने असाधारण कौशल के कारण शौर्य चक्र लेकर लौटे हैं। केन्द्र सरकार की ओर से उनकी असाधारण वीरता के लिए शौर्य पदक के अलावा उन्हें बीस बीघा जमीन एवं एक अदद पेट्रोल पंप आबंटित करने का ऐलान किया था। लेकिन सेवानिवृति के बाद वह जमीन व पेट्रोल पंप हासिल करना तो दूर अपने पूर्वजों वाले घर में एक अदद हैंडपंप लगाने के लिए तरस रहे हैं। इस वाकये को एक दशक से अधिक का समय बीत चुका है। ऐसा नहीं है कि मेरे रिश्तेदार ने अपने आप को मिले हुए ईनाम को हासिल करने का प्रयास ही नहीं किया हो। बहुत प्रयास किए महाराज लेकिन सिविल प्रशासन का राजकाज क्या इतना आसान है कि उन्हें आसानी से सब कुछ हासिल हो जाए। मेरे रिश्तेदार की जुबानी ही सुनिए कि उनके साथ क्या-क्या घटित हुआ।
दरअसल केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में रहते हुए जब वह आतंकवाद प्रभावित पंजाब क्षेत्र में तैनात थे तो एक आपरेशन में उन्होंने पेट्रोलिंग के दौरान न सिर्फ अपने साथियों की जान बचाई बल्कि खालिस्तान समर्थक आधा दर्जन आतंकवादियों को कुशलतापूर्वक ढेर कर दिया। स्वयं की टांगों एवं निचले हिस्से में भी गोलियों के कई छर्रे लग गए। परिणामस्वरूप वह आपरेशन तो सफल हो गया लेकिन चंडीगढ़ पीजीआई अस्पताल में मेरे रिश्तेदार को कई आपरेशन झेलने पडे़। केन्द्र सरकार ने भी उनकी बहादुरी की तारीफ करते हुए जमीन व पेट्रोल पंप का लाईसेंस दिलाने का ऐलान कर दिया। साल डेढ़ साल इलाज कराने के बाद जब वह अपने घर पहुँचे तो उन्हें सामान्य प्रशासन की कार्यप्रणाली की जानकारी हो पाई। उन्होंने सोचा कि कुछ दिनों आराम करने के बाद वह सरकार की ओर से मिली जमीन पर मकान बनाने के साथ खेती- बाड़ी कर गुजर-बसर करेंगे। मगर ये क्या सरकारी ईनाम की जमीन हासिल करने में उनके हाथ नाकामी ही लगी।
सबसे पहले तो जिले के कलेक्टर के यहाँ पहुँचे, लेकिन कलेक्टर से पहले उनके मुँह लगे पीए ने उन्हें रोक कर फाईल देखी। फिर हिकारत के भाव से मेरे रिश्तेदार को देखते हुए बोले भाई साहब, सरकार के पास एक इंच भी बेनाप भूमि नहीं है, आपको बीस बीघा जमीन कहाँ से मिल जाएगी ? यह बताने पर कि डीएम साब से मिल कर कोई समाधान निकल जाएगा, पीए बोला डीएम क्या होता है, आज जो ये साब डीएम बनकर बैठे हैं कल को इस कुर्सी पर कोई दूसरा ही नजर आएगा। अरे तुम्हें देने के लिए जिले में जमीन है या नहीं ये डीएम थोड़ी ही बताएगा, आखिर डीएम को पता ही कितना होता है अपने जिले के बारे में। वो तो हम लोग जो कहते हैं केवल उसी का पालन करते हैं। खैर साब एक दो बार के प्रयासों से मेरे रिश्तेदार पीए की नजर बचाकर डीएम साब से मिलने में सफल हो गए। पर ये क्या उनकी शिकायत सुनते ही फट से डीएम साब ने अपने पीए को बुलवा लिया। और जो पीए ने डीएम के सामने शौर्य पदक विजेता सिपाही की क्लास ली है कि मेरे रिश्तेदार ने जमीन से तौबा कर ली।
मेरे रिश्तेदार ने कहा कि चलो जमीन न सही यदि पेट्रोल पंप ही मिल जाए तो क्या बुराई है। और उन्होंने इस संबंध में लिखा-पढ़ी शुरू की। लेकिन ये क्या इस मामले में भी डीएम व उनके पीए आड़े आ गए। क्या हुआ बहुत लंबी बात है, लेकिन दूसरी बार में डीएम के पीए ने मेरे रिश्तेदार को जो हकीकत बयाँ की है कि जब तुम बीस बीघा जमीन ही हासिल नहीं कर पाए तो अब पेट्रोल पंप हवा में बनाने का ख्वाब क्यों देख रहे हो। मेरे रिश्तेदार ने जमीन व पेट्रोल पंप की मांग से तौबा कर ली है। सरहद व देश की सुरक्षा में दुश्मनों के दाँत खट्टे कर देने वाले जाबाँज मेरे रिश्तेदार अपने ही देश-प्रदेश की व्यवस्था के सामने हार मान घुटने टेक कर बैठ गया। लेकिन रिश्तेदार की पत्नी हैं कि उन्हें उलाहने देने से बाज नहीं आती हैं कि क्या कभी सरकार की ओर से घोषित इनाम उन्हें मिल भी सकेगा या नहीं? अरे एक अदद पेट्रोल पंप नहीं मिल सका तो कम से कम एक हैंडपंप ही लगवा दो।
आज आलम ये है कि अपने जिले या आसपास के शहरों में आने वाले सफेदपोश नेताओं मेरा मतलब है कि देश-प्रदेश के तारणहारों के आने पर वह अपनी असाधारण वीरता के बाद मिले शौर्य पदक तथा तत्कालीन सरकार की ओर से घोषित इनाम के बारे में बताना नहीं भूलते हैं। जब मेरे देश के तथाकथित तारणहार उन्हें फिर से जमीन व पेट्रोल पंप दिलाने के सब्जबाज दिखाने लगते हैं, तो मेरे रिश्तेदार बस एक ही विनती करते हैं कि हुजूर पेट्रोल पंप न सही एक अदद हैंडपंप तो लगवा दो। कम से कम जीते जी माता-पिता घर के आंगन में एक अदद हैंडपंप लगा हुआ देख सकें।























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