प्रस्तावित 444 मैगावाट की विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना का उत्तरी अलकनन्दा संघर्ष समिति ने पुरजोर विरोध किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना क्रियान्वयन में भारी कमीशनखोरी एवं भ्रष्टाचार व्याप्त है। पर्यावरणीय मानकों को अनदेखा किया जा रहा है।
परियोजना क्षेत्र के ग्रामीणों ने कहा कि इस परियोजना के अन्तर्गत कई गाँव आंशिक एवं पूर्ण प्रभावितों की श्रेणी में आ रहे हैं। लेकिन कार्यदायी कम्पनी टी.एच.डी.सी. ने परियोजना के मानकों को अनदेखा कर ग्रामीणों को जल-जमीन के मूलभूत अधिकारों से वंचित करने की कूटनीति अपना ली है। गौरतलब है कि इस जल विद्युत परियोजना का एडिट प्वाइंट अलकनन्दा के दाहिने तट पर मेनागाड़ नामक सहायक नदी के साथ बनाया जा रहा है। मेनागाड़, जो कि गुनियाला गांव के नजदीक है, पर इस परियोजना की घोड़े के नाल की आकार की सुरंग हेलंग में बनने वाले बाँध से आगे बढ़ेगी। यह सुरंग गुलाबकोटी, लंगसी, तपोवन, लांजी पाखनी, गुनियाला, मठ बेमरू, तेन्दुली चक हाट से आगे बढ़ते हुए भूमिगत पावर हाउस हाट जैंसाल के मध्य बनेगा और सुरंग से अलकनन्दा का पानी दुर्गापुर बिरही के समीप वापस अलकनन्दा की मुख्य धारा में आयेगा। लेकिन परियोजना के अधिकारी इस निर्माणाधीन सुरंग के ऊपर बसे हुए गाँवों को भ्रमित कर रहे हैं।
पिछले एक वर्ष से इस क्षेत्र के केवल गुनियाला, मठ, तेन्दुली चक, हउट, हाट और जैंसाल को अधिक प्रभावित गांव की श्रेणी में रखा गया है, जबकि पोखनी, लांजी और बेमरू गांव जिसकी ग्राम सभा का उपगांव गुनियाला को पूर्ण प्रभावित में रखा गया है, जबकि बेमरू को छोड़ा गया है। यही हाल मठ ग्राम सभा का भी है। इस ग्राम सभा के मठ और तेन्दुली चक हाट को पूर्ण प्रभावित माना गया है। लेकिन इसी ग्राम सभा के अन्य 5 उप गाँवों को छोड़ दिया है। इसी कारण लोग परियोजना के विरुद्ध आन्दोलित हैं और अनशन कर धरने पर बैठ गये हैं। सड़क के निर्माण का कार्य बन्द करा दिया गया है। परियोजना को प्रति दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन टी.एच.डी.सी. इस मामले को सुलझाने में कोई रुचि नही ले रही है। परियोजना के अधिकारी गाँवों में फूट डालकर छुटभैये नेताओं और कमीशनदाता ठेकेदारों को लाभ पहुँचा रही है। सड़क निर्माण स्थल पर पिछले एक सप्ताह से धरना जारी है। इस मामले को सुलझाने के लिए क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों, आन्दोलनकारियों के मध्य अन्य गांवों को भी पूर्ण प्रभावित श्रेणी में रखने सम्बन्धित 10 सूत्रीय माँगों को लेकर शुरू हुई वार्ता असहमति व वार्ता स्थल से टी.एच.डी.सी. के अधिकारियों के भाग खडे़ होने से असफल रही। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना अधिकारी प्रभावित परिवारों के बजाय भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सहित कई नेताओं के रिश्तेदारों को कार्पोरेशन में नौकरियाँ, कमीशनखोरों को ठेकेदारी, ट्रांसपोर्टरों की गाडियाँ किराये पर लेकर सड़कों पर दौडाई जा रही हैं। इतनी धाँधली है कि परियोजना के कार्य कर रहे ए. बी. ग्रेड के ठेकेदारों ने स्थानीय छोटे ठेकेदारों से विरोध न करने की एवज में सडक खुदान, कटान, एडिट प्वाइंट के लिए पुल, पुस्ते, दीवाल, वर्कशेड और कार्पोरेट सोशियल रिस्पोन्सबिलिटी (सी.एस.आर.) के तहत कार्य कराया और अधिकारियों का हवाला देते हुए फर्जी चैक देकर चम्पत हो गये।
इस परियोजना के तहत तेन्दुली में बन रहे मोटर पुल में निर्माण मानकों को अनदेखा किया गया है। बंगाल की पुल बनाने वाली कम्पनी पूरा काम किये बगैर भुगतान लेकर चली गयी है। पुल के दूसरी तरफ 10 मी. सड़क पुल बनाने वाली कम्पनी को ही बनाना था। लेकिन दूसरी तरफ कठोर चट्टान को कटाने में पुल बनाने वाली कम्पनी को नुकसान था। लेकिन टेंडर में 5 मी. का ये सडक पुल निर्माता कम्पनी को ही बनानी थी। टी.एच.डी.सी. के इंजीनियरों की मिलीभगत के चलते उक्त कम्पनी बिना सड़क बनाये ही भाग खडी हुई। तब इस सड़क को बनाने में स्थानीय फर्जी भूमिधारक को चट्टान तोड़ने का अतिरिक्त ठेका दिया गया। परियोजना का विरोध न करने की एवज में अधिकतर भूमिधारकों को टी.एच.डी.सी. ने ठेकेदार बना दिया है। कर्मचारी दोनों तरफ से मलाई का मजा ले रहे हैं। भारी पैमाने में बिना अनुमति के विस्फोटकों का प्रयोग किया जा रहा है। ये विस्फोटक इन ठेकेदारों के पास कहाँ से आ रहे हैं, इसका कोई रिकॉर्ड या इन्डैण्ट न तो टी.एच.डी.सी. के पास है और न ही छुटभैये ठेकेदारों के पास। एक महत्वपूर्ण जानकारी यह भी पता चली है कि पीपलकोटी से तेन्दुली मठ होते गुनियाला जाने वाली यह सड़क 10-12 वर्ष पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई। बाद में टी.एच.डी.सी. की योजना शुरू होने पर टी.एच.डी.सी. ने लोक निर्माण विभाग को इस अधूरी एवं टूटी-फूटी सड़क का लाखों रुपये भुगतान किया। लेकिन वर्तमान में पुनः इसी सड़क को बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग, गोपेश्वर (चमोली) लाखों का प्रस्ताव दे चुका है। यानी पीपलकाटी से मठ गुनियाला में बनने वाली एक ही सड़क पर बार-बार टी.एच.डी.सी. व लोक निर्माण विभाग गोपेश्वर द्वारा स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान के तहत पुनः लाखों की परियोजना चलाई जाने वाली है। लेकिन फिर भी गुनियाला या बेमरू सड़क पहुँच पायेगी या नहीं, कुछ पता नहीं है।
























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