कॉर्बेट नेशनल पार्क व आसपास से सटे जंगलों में पाए जाने वाले दुर्लभ गिद्धों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अपने वजूद के लिए विश्व भर में संघर्ष कर रहे गिद्धों की कार्बेट पार्क के आसपास के जंगलों में मौजूदगी को आशा की किरण के रूप में देखा जा रहा था। मगर इस बीच पाँच दिनों के भीतर दो गिद्ध मौत की नींद सो चुके हैं। बचे-खुचे गिद्धों पर खतरा बना हुआ है। एक मृत गिद्ध के शरीर में डाइक्लोफिनेक दवा की बहुत अधिक मात्रा पाए जाने से प्रतिबंध के बावजूद कुछ लोगों द्वारा इसके प्रयोग की बात सामने आ रही है। मवेशियों के लिए प्रयोग होने वाली इस दवा के चलते इंडियन व्हाइट बैक्ड, लौंग बिल्ड, सिलैन्डर बिल्ड प्रजाति के 99 फीसदी गिद्धों का खात्मा हो चुका है। मृत पशुओं के माँस से गिद्धों के शरीर के भीतर पहुँची दवाई के असर से उनके गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं।
गिद्धों की लगातार मौतों के बाद वर्ष 2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस दवा को बिक्री के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। गिद्ध भारतीय वन्यजीव कानूनों के तहत पहली अनुसूची का संरक्षित प्राणी है। अस्सी के दशक में भारत के आसमान में आठ करोड़ गिद्ध थे, जो आज घटकर चार हजार रह गए हैं। वर्तमान में यह सबसे तेजी से विलुप्त होने वाली पक्षी प्रजाति है। भारत में प्राप्त होने वाली गिद्धों की कुल 9 प्रजातियों में से आठ उत्तराखण्ड में पाई जाती हैं। कॉर्बेट व आसपास के जंगलों में कुछ सालों से व्हाइट बैक्ड, हिमालयन ग्रिफन आदि प्रजातियों के गिद्धों को देखा जा रहा था। इधर पिछले दिनों कॉर्बेट की सीमा से सटे ग्राम रिंगौड़ा में ग्रामीणों को अचेतावस्था में इंडियन व्हाइट बैक प्रजाति का गिद्ध मिला। दो घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के ठीक तीन दिन बाद ग्राम हाथीडगर में अचेतावस्था में एक गिद्ध मिला। उपचार के बावजूद दो दिन बाद उसने दम तोड़ लिया। इन दोनों गिद्धों को जंगल से उपचार के लिए महाशीर कन्र्जवेशी के सुमंतो घोष पशु चिकित्सक के पास लेकर आए थे। सुमंतो घोष के अनुसार मृत इंडियन व्हाइट बैक गिद्ध की उम्र तकरीबन 6 साल की थी। इस प्रजाति के गिद्ध के रिंगौड़ा गाँव में आठ घोंसले हैं। दूसरा मरने वाला गिद्ध हिमालयन ग्रिफन प्रजाति का है, जो ऊँचाई वाले क्षेत्रों में प्रजनन कर भोजन की तलाश में मैदानी क्षेत्रों की तरफ आता है। इन दोनों पक्षियों में बीमारी के कुछ लक्षण समान मिले है। घोष ने संभावना जताई कि दूसरे गिद्ध में भी प्रतिबंधित दवा की मात्रा हो सकती है। उन्होंने बताया कि पहले मरे गिद्ध में डाइक्लोफिनेक दवा होने की पुष्टि हरियाणा के पिंजोर में बांबे नेचुरल हिस्ट्री ऑफ सोसाइटी के गिद्ध प्रजनन केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विभुप्रकाश ने की है।
उधमसिंह नगर में लगातार बढ़ रहे हैं अपराध
उत्तराखंड में अपराधों का ग्राफ नीचे गिरने का नाम नहीं ले रहा है। कुमाऊँ की बात करें तो यहाँ अपराधियों के निशाने पर उधमसिंह नगर जिला रहा है। हत्याओं के साथ ही जिले में बलात्कार की घटनाएँ यहाँ अन्य जिलों के मुकाबले सबसे अधिक हुई है। हालाँकि पुलिस ने कई घटनाओं के खुलासे किए, मगर अपराध नियंत्रण में वह फिसड्डी ही साबित हुई।
उधमसिंह नगर में इस वर्ष 45 हत्या, 38 लूट, 3 डकैती, 20 दहेज हत्या व 22 बलात्कार की घटनाऐं हुई हैं। वर्ष 2008 में यहाँ 38 व 2009 में 45 हत्याएँ हुई थीं। बाजपुर व किच्छा में बड़ी डकैतियाँ पड़ी थीं। वहीं रुद्रपुर कोतवाली में रायपुर गाँव के रहने वाले बलविंदर की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया। काफी बबाल होने के बाद आईजी रामसिंह मीणा ने मामले को देख रही पूरी एसओजी की टीम को हटा दिया था। कोतवाली में तैनात प्रशिक्षु आईपीएस निवेदिता कुकरेती सहित 4 पर मुकदमा दर्ज करने के अलावा उन्हें लाइन से संबद्ध कर दिया गया। रुद्रपुर में ही दिनदहाड़े एसबीआइ में तैनात बैंक मैनेजर की हत्या कर शव को जंगल में जलाकर फेंका दिया गया था। इस मामले का अभी तक खुलासा नही हो सका है। काशीपुर में कुछ दिनों पहले प्रेमिका से मिलने पहुँचे फिरोज को प्रेमिका के परिजनों ने मारकर उसकी लाश घर में ही छुपा दी थी। दिसंबर में काशीपुर में एक प्रापर्टी डीलर, एक व्यापारी व नवंबर में एक काश्तकार की बाजपुर से अपहरण के बाद हत्या हुई।
अपराधों में दूसरे पायदान पर नैनीताल जिला रहा है। यहाँ अभी तक 21 हत्याएँ, 8 लूट, 5 दहेज हत्या व 12 बलात्कार के मामले दर्ज हुए। संतोष रहा कि यहाँ डकैती की कोई वारदात नहीं हुई। लेकिन वर्ष 2008 व 2009 में हुई 18-18 हत्याओं के मुकाबले अभी तक 21 हत्याएँ हो चुकी हैं। अल्मोड़ा जिले में इस वर्ष 3 हत्याएँ, 1 लूट, 4 दहेज हत्या व 3 बलात्कार के मामले हुए है। सबसे शांत जिला बागेश्वर रहा, जहाँ 2 हत्याएं व 1 दहेज हत्या की घटना सामने आई। यहाँ साल भर लूट, डकैती व बलात्कार की कोई भी वारदात नहीं हुई। वहीं पिथौरागढ़ में हत्या की 3 घटनाएँ होने के अलावा बलात्कार, लूट, डकैती व दहेज हत्या का कोई भी मामला प्रकाश में नहीं आया। जबकि चंपावत जिले में 4 हत्याएँ, 1 डकैती, 1 दहेज हत्या व 1 बलात्कार की घटना सामने आई। इन तमाम अपराधों के बीच पुलिस के लिए माफिया डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी व उसके विश्वासपात्र कहे जाने वाले भूपेंद्र बोरा ‘भुप्पी’ की गिरफ्तारी सुकून भरी रही। बाजपुर में हुई डकैती के मामले में लूटे माल सहित बदमाशों को पकड़ना भी पुलिस के लिए बड़ी सफलता रहा।