हल्द्वानी के नवाबी रोड स्थित आनन्दधाम निवासी 86 वर्षीय डॉ. डी.डी. शर्मा को इस वर्ष पद्मश्री के अलंकरण से सम्मानित किया गया है। 2011 के वर्ष इस सम्मान से नवाजे गए, उत्तराखण्ड के वे अकेले व्यक्ति हैं। उन्हें अलंकृत होने की खबर से जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल तक फैले हुए हिमालयी राज्यों के कलमजीवियों को ही नहीं, उन लोगों को भी खुशी होगी, जिन्होंने तंगण-पातंगण, खश, थक, हूंण, मंगोल, दाद, किरात, किन्नर, विद्याधर, नेवारी, गुरंग, मिश्मी, लेप्चा आदि नृवंशियों की भाषा-संस्कृति, आजीविका, रहन-सहन और स्थान-स्थितियों की जानकारी देने वाली उनकी किताबों का अध्ययन किया होगा।
डॉ. शर्मा जैसे संस्कृतज्ञ, क्षेत्रीय कार्यकर्ता अपने देश में बिरले होते हैं, जो एक ही भाषा के पिछलग्गू बनकर एक ही विषय पर टिके नहीं रहते। एक रफ्तार के साथ जीवन भर आगे बढ़ते जाते हैं और इधर-उधर देखते-भालते हुए यथासंभव वर्तमान को भी थामे रहते हैं। डॉ. शर्मा समय के पारखी, गुणज्ञ और कर्म के मर्म को समझने वाले शिक्षाविद्, भाषाशास्त्री, घर के सयाने की भाँति अपने परम्परा के आग्रही और लोक संस्कृतियों के हिमायती हैं। पिछले महीने उन्हें सरदार बल्लभ भाई पटेल अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान भी मिला, जो किसी को उसके जीवन भर की उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। शर्मा जी जैसे लोगों को अलंकृत करने से अलंकरण अपना नाम सार्थक करता है। वह, यह अपेक्षा भी करता है कि वे शतायु पर्यन्त लिखना-पढ़ना करते रहें। हम भी उसी अपेक्षा से आपको अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त करते हैं।