यमुनोत्री से लेकर जमुना पुल तक लगभग 90 किमी. और गंगोत्री से लेकर धरासू तक लगभग 120 किमी. का रास्ता इन दिनों अत्यन्त संवेदनशील है। अब तक दोनों तीर्थो के मार्ग नहीं खुल पाये हैं। बाहर से आये तीर्थ यात्री तो परेशान हैं ही, स्थानीय लोगों की भी मुसीबतें कम नहीं है। उत्तरकाशी जनपद के इन दूरस्थ इलाकों के लोग चैन से सो भी नहीं पा रहे हैं।
कफनौल गाँव की विधवा सुरपना देवी का आवासीय भवन तो अगस्त 2010 की अतिवृष्टि के बावजूद बच गया, परन्तु उनकी लगभग 40 नाली कृषि भूमि तबाह हो गयी। आवासीय भवन भी किसी भी वक्त जमींदोज हो सकता है। पूरे गाँव में दो दर्जन से भी अधिक मकानों में खतरनाक दरारें हैं। सुरपना देवी का आरोप हैं कि एक माह बाद तहसीलदार प्रेमलाल के नेतृत्व में कफनौल पहुँची राजस्व विभाग ने उन्हीं को आपदा राहत में बड़ी राशि दी, जिन्होंने दस हजार रु. तक की घूस दी। वे रिश्वत दे पाने की हालत में नहीं थीं, अतः उन्हें मात्र तीन हजार रु. की राशि प्राप्त हुई। ग्रामीणों ने इस प्रकरण पर स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक इस शिकायत की। तहसीलदार प्रेमलाल का स्थानान्तरण भी हुआ, मगर फिर मुख्यमन्त्री कार्यालय से ही उसे रोक दिया गया। लगभग 2,000 की जनसंख्या वाले कफनौल गांव में दरारें अभी भी दिखाई देती हैं।
कफनौल गांव ही नहीं, यमुना घाटी के दर्जनो गांव बारूद की ढेर पर खड़े हैं। जनपद बनने जा रहे यमुनोत्री के विकासखण्ड नौगांव के नरूयूंका, धारी, किम्मी, तुनाल्का, कफनौल, राना, बाडि़या, हनुमानचट्टी; विकासखण्ड पुरोला के कुमोला, करड़ा, डेरिका, पाणीगांव, हुडोली, छाड़ा; विकासखण्ड मोरी के फफराला खड्ड से ऊपर के लगभग 50 गांव इस बरसात में देश-दुनिया से कटे हैं। सुनकुण्डी और पाव तल्ला तो एकदम खतरे की जद में हैं। गंगा घाटी में पिछले दिनों की अतिवृष्टि से रानू की गाड़ व गाजणा क्षेत्र में तबाही हुई। 5 पुल धराशायी होने के अलावा संपर्क मार्ग, घरों व खेती-बाड़ी को भारी नुकसान पहुँचा है। धौंतरी में बिजली चालित आटा चक्की तथा सड़क पर खड़े ट्रक व कार भी क्षतिग्रस्त हो गये। विकासखंड डुण्डा के रानू की गाड़ में बादल फटने से बौन, पंजियाला, जुगल्डी, रतूड़ी सेरा आदि को जोड़ने वाली पुलिया बह गयी। बाढ़ से रवाड़ा खड्ड में लगा लोहे का पुल, किमोला में आरसीसी का पुल, बौन से जुगल्डी को जोड़ने वाला पुल, रतूड़ी सेरा पैदल पुल, होनीछानी में आरसीसी का पुल, मंद्राला के पास पुलिया धराशायी हो गये हैं। जबकि रतूड़ी सेरा में पर्यटन सूचना केन्द्र की दीवार व कच्चा घर ध्वस्त हो गये। बंदरकोट- बौन सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही ठप हो गयी।
टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लॉक की ग्राम पंचायत गेंवाली में बादल फटने से ग्रामीणों के 10 घराट बह गये और गेंवाली संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया। दो पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गयी हैं। वहीं गांव में परस्पर सहभागिता से बनाई गयी सूक्ष्म जल व्द्यिुत परियोजना के भी भूस्खलन की चपेट में आने वहां बिजली का उत्पादन भी बंद हो गया हैं।