मंत्रीगणों के सन्दर्भ में गांधी जी ने कहा था, ‘‘अगर कांग्रेस को लोकसेवा की ही संस्था रहना है, तो मंत्री साहब लोगों की तरह नहीं रह सकते और न सरकारी साधनों का उपयोग निजी कामों के लिये ही कर सकते हैं।’’ लेकिन आज के मंत्री तो राजाओं से भी बेहतर स्थिति में रहना चाहते हैं। राजाओं में क्रूरता दिखाई देती थी तो वेश बदलकर लोगों के दुःख-दर्द सुनने के किस्से बीरबल के बहाने सुनने को मिले हैं।
अल्मोड़ा शहर से लगे देवली गाँव में 10 लोगों ने अपनी जान भूस्खलन में गँवाई। शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत भुवन सिंह लटवाल भिकियासैण में था, इसलिये वह स्वयं तो बच गया, लेकिन परिवार के 6 सदस्यों में से तीन काल कवलित हो गये। भुवन की 40 वर्षीय पत्नी पुष्पा व 10 वर्षीय पुत्री तनूजा को गाँव के युवकों ने गंभीर रूप से घायल अवस्था में मलबे के ढेर से निकाल लिया। इनको अल्मोड़ा के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुष्पा की पाँव की हड्डी टूट गई थी। तनूजा 21 सितम्बर तक भी होश में नही आ पाई।
उत्तराखण्ड का विधानसभा सत्र 22 सितम्बर से आरम्भ होने वाला था। विभिन्न संगठनों व क्षेत्रों से माँग आ रही थी कि इस घनघोर विपदा में विधानसभा सत्र स्थगित किया जाय तथा सभी विधायक जनता के दुःख-दर्द जानने के लिए क्षेत्र में जायंे। परन्तु सत्र नहीं टाला गया। एकमात्र विधायक, जिन्होंने विधानसभा सत्र में जाने के बदले अपने क्षेत्र में जाना उचित समझा, शायद अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी थे।
इस समय पूरे पहाड़ी क्षेत्र में सारे सड़क सम्पर्क टूट गये थे। स्थानीय स्तर पर मोटर साईकिलें चलने की स्थिति नही थी। विधायकों का देहरादून पहुँचना असम्भव हो गया। कुछ विधायकों को पंतनगर से विशेष विमान से देहरादून ले जाया गया। लेकिन जो बच गये, उनमें से कुछ ने एक नायाब तरीका अपनाया। उन्होंने भुवन लटवाल की 10 वर्षीय पुत्री के इलाज के नाम पर हेलीकाॅप्टर का जुगाड़ किया। पत्रकारों को बुलाकर बाकायदा बेहोश तनूजा के साथ राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बलवंत भौर्याल व तीन विधायकों ने फोटो खिचवाई, जो अगले दिन अखबारों में छपे। मजेदार बात यह थी कि पुत्री के साथ जाने की जिद कर रहे, रोते हुए भुवन को हेलीकॉप्टर में नहीं बैठाया गया। उससे कहा गया कि जगह नहीं है, दूसरे दिन तुमको लेने के लिये हेलीकॉप्टर भेज देंगे। वह हेलीकॉप्टर फिर कभी नहीं आया। अमानवीयता की हद थी कि यह नहीं सोचा गया कि माँ घायल अवस्था में चिकित्सालय में है, बेहोश लड़की की तीमारदारी कौन करेगा ? जबकि इतना किया जाना पर्याप्त था कि घायल तनूजा को किसी तरह 100 किमी.दूरी में हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज में पहुँचा दिया जाता। वहाँ परिजन भी देखरेख करने पहुँच सकते थे।
दूसरी ओर, पौड़ी के सांसद सतपाल महाराज, जिन्हें उनके भक्त भगवान मानते हैं, ने इस आपदा के बीच भी अपना जन्मदिन खूब धूमधाम और उल्लास से मनाया।