बापू आप महान हैं। आप की महानता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि आप मेरे पैदा होने से पहले ही देश को आजाद करा गये। मैंने भी अपना कर्तव्य पूरी तरह से निभाया है। आपके जन्म दिवस पर लड्डू खाये हैं, तो शहीद दिवस पर श्रद्धांजली भी दी है।
आप भारतवर्ष में जहाँ भी गये, अपने साथ देशप्रेम, अहिंसा और मानवता का संदेश लेकर गये। देश ने भी आपको पूरा सम्मान दिया है। आप जहाँ-जहाँ नहीं भी जा पाये, वहाँ भी आपकी प्रतिमा लगा दी गई। कहीं आप खड़े हैं, कहीं बैठे हुए हैं। एक हाथ में गीता, दूसरे में लाठी नज़र आती है। लेकिन देशप्रेम, अहिंसा और मानवता नज़र नहीं आती। आप की एक प्रतिमा मेरे शहर नैनीताल में भी है। बायें हाथ में गीता, दायें हाथ में लाठी, चेहरे पर चश्मा, बदन पर शॉल, कमर में धोती, पाँव में खड़ाऊँ। बापू आप गुजरात में क्यों पैदा हुए ? अगर नैनीताल में पैदा हुए होते तो हमें दूसरे देशों में नीलाम करने के लिए कोट, जैकेट, टोपी, मफलर, बनियान, जूते-मोजे और गरम पाजामे भी मिल जाते।
बापू, मैंने बहुत कोशिश की आपसे बातें करने की। जब आप मुन्नाभाई के हो सकते हैं तो मेरे क्यों नहीं ? कई ‘इंप्रोवाइजेशन’ किये, लेकिन आपने न कभी सुना, न कभी देखा, न ही कुछ बोला। मैं तो बापू आपसे सिर्फ इतना कहना चाहता था कि मुझे अफसोस है कि मैं उस समय पैदा क्यों नहीं हुआ। वरना मैं आपको ‘बुलेट प्रूफ’ जैकेट ही पहनवा देता। आपको बीमा करवाने की सलाह ही दे देता।
नैनीताल के लोग बड़े मतलबपरस्त हैं। जब काम पड़ेगा, तो आपकी प्रतिमा को नहलायेंगे-धुलायेंगे। फूलमालाएँ चढ़ायेंगे। आपकी प्रतिमा के नीचे धरना-प्रदर्शन, आन्दोलन, अनशन करेंगे। जिंदाबाद-मुर्दाबाद कहकर वहाँ लेटे कुत्तों को भगायेंगे। अगले दिन से आपकी ओर पीठ करके आराम से धूप सेकेंगे। आपके सामने चींख-चींख कर कई वक्ता नेता बन गये हैं। जो नेता थे, वे विधायक बन गये हैं। जो विधायक थे, वे मंत्री बन गये हैं। जो मंत्री हैं, उनका काफिला इतना लम्बा होता है कि रुके तो जाम लग सकता है। फिर उनके पास इतना समय भी नहीं है। जनता की सेवा जो करनी है।
बापू आप नैनीताल में चलने की मुद्रा में हैं। आपका पूरा सामान आपके साथ है। एक पाँव चबूतरे पर है तो दूसरा हवा में है। बापू कहीं वैसा तो नहीं जैसा मैं सोच रहा हूँ….। नहीं-नहीं बापू…. आप ये शहर छोड़कर कहीं मत जाना….प्लीज!