नया अंक : 15 से 30 सितम्बर 2009
प्रस्तुत है नया अंक। इस अंक में आप पढेंगे। श्रीनगर परियोजना तो मनमानी से चल रही है अब वैसा नहीं रहा है गंगा का मायका कहाँ गईं चिड़ियायें ? ‘पीन’ अप गर्ल उर्फ उत्तराखंड की नायिका कथा – व्यंग्य उद्योग के नाम पर भवन कब्जाया मसूरी को लेकर सदैव बेचैन रहे पँवार जी उन्होंने सीमान्त [...]
श्रीनगर परियोजना तो मनमानी से चल रही है
27 जुलाई को अलकनन्दा नदी पर निर्माणाधीन 330 मेगावाट की श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का कॉफर बाँध ढह गया। दरअसल यह परियोजना फर्जी कागजातों पर आधारित है तथा पर्यावरण और कानूनी मानकों की अवहेलना करते हुए बन रही है। इस बाँध का काम 1988 में आरम्भ होना था, परन्तु अब तक कई बड़े ठेकेदार काम [...]
अब वैसा नहीं रहा है गंगा का मायका
उत्तरकाशी जिले में स्थित 4,000 मीटर से लेकर 1,500 मीटर में स्थित गोमुख, भोजवासा, धराली, हर्शिल, दानपुर, रैंथल, दयारा, बड़कोट, नौगाँव, खलाड़ी, पुरोला क्षेत्रों के एक सामान्य अध्ययन से पता चला कि यहाँ का जन जीवन दिन प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। निरीह ग्रामीण विकराल होती आपदाओं के शिकार हो रहे हैं। साथ ही [...]
कहाँ गईं चिड़ियायें ?
पितरों का श्राद्ध का पक्ष चल रहा है। उत्तराखंड में भी हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग प्रतिदिन पितृपूजा कर चिड़ियों तथा जानवरों के लिये पत्तलों में खाना घर के बाहर रख देते हैं। पहले पक्षियों में कौवा सबसे महत्वपूर्ण होता था, क्योंकि सबसे पहले वही घर के बाहर रखे पत्तल पर टूट पड़ता था। [...]
‘पीन’ अप गर्ल उर्फ उत्तराखंड की नायिका कथा
मेरे एक दोस्त कहते थे महिलाएँ सब एक सी होती हैं। उनका संदर्भ शायद शेक्सपियर के- ‘औरत तेरा दूसरा नाम बेवफाई हैं से जुड़ता होगा। मैं इतना सार्वभौम सामान्यीकरण करने का दुःसाहस नहीं कर सकता। किन्तु कुछ नमूने ऐसे हैं, जिनमें पहाड़ी नायिकाओं के एक जैसी होने के सबूत मिलते हैं। इस पर प्रकाश डालने [...]
उद्योग के नाम पर भवन कब्जाया
उत्तराखंड सरकार द्वारा उद्योगों को दी जा रही रियायतों का उद्योगपति गलत फायदा उठा रहे हैं। इसकी बानगी कालाढूँगी में देखने को मिली, जहाँ कुछ दिन उद्योग चला कर एक कम्पनी ने एक मकान पर ही अवैध कब्जा कर रखा है। इसके चलते बेरोजगारों को रोजगार मिलना तो दूर, सरकार को भवन का किराया न [...]
मसूरी को लेकर सदैव बेचैन रहे पँवार जी
सिर्फ एक महीने के भीतर पहले धर्मानंद उनियाल गये, फिर पीताम्बर डेवरानी ने साथ छोड़ा और अपने को सम्हाल पाते, इससे पहले ही हुकुम सिंह पँवार ने हमसे विदा ले ली। अचानक इन तीनों का जाना साहित्य, समाज और राजनीति के क्षेत्र में शून्यता पैदा कर गया। हुकुम सिंह पँवार का जन्म टिहरी जनपद के [...]
उन्होंने सीमान्त में शिक्षा की ज्योति जलाई
नारायण स्वामी जी का वास्तविक नाम क्या था, किसी को ज्ञात नहीं। हाँ उनके ड्राइविंग लाइसेंस में दर्ज की गयी जन्मतिथि मार्गशीर्ष पूर्णिमा, 2 दिसम्बर 1914 अंकित की गई है। संभवतः स्वामी जी दक्षिण भारत के किसी कुलीन परिवार के व्यक्ति थे। साधक की साधना उनको गृहस्थ में नहीं अपितु ब्रह्मचर्य में दिखी। आप मात्र [...]
‘मेरे चित्रों में अनुशासन नहीं, कबीर जैसी अराजकता है’
अपने व्यावसायिक जीवन में मुख्य रूप से आर्किटेक्ट रहे लखनऊ कला विद्यालय (वास्तुकला) के स्टूडेण्ट डी. एल. साह एक उम्दा चित्रकार भी हैं। रंगो की तीव्रता को छोड़कर उदासी के रंग अगर विनसेण्ट वॉन गॉग के कैनवासों को चढ़ा दिए जाएँ तो लैण्डस्केप के आकारों और ब्रश के स्ट्रोक्स से डी. एल. साह भी वॉन [...]
आशल-कुशल – अगस्त-सितंबर 2009
अप्रत्याशित रूप से भारी वर्षा के बाद पहाड़ों पर अब शरद की सुहावनी दस्तक पड़ गई है। पितृ पक्ष में लगातार चार-पाँच दिनों तक तेज बारिश से कई स्थानों पर भूमि स्खलन, पेड़ गिरने, जल भराव और अति वृष्टि से लोक हलकान रहे। कई स्थानों पर लोगों के डूबने-बहने के समाचार भी मिले। पहले सूखे [...]
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