युद्धं देहि……..उन्होंने कहा था
बापू साम्प्रदायिक हिंसा की लपटों को बुझाने के लिये जब नोआखाली में नंगे पाँव पदयात्रा कर रहे थे और उग्रवादी मुस्लिम कट्टरपंथी उनके रास्ते पर काँटे, काँच के टुकड़े और विष्ठा बिछा रहे थे, तब क्या उन्हें पुलिस की मदद की जरूरत पड़ी थी ? लेकिन हम गांधी नहीं हो सकते थे, इसलिये हमें पड़ी, [...]
मुख्यमंत्री यहाँ की समस्या पर नहीं बोले
हमारे मुख्यमंत्री जहाँ कहीं भी दौरे पर जाते हैं, वहाँ धनवर्षा अवश्य कर आते हैं। अप्रेल 26 को वे जोशीमठ आकर यहाँ सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय को 25 लाख रुपए देने की घोषणा कर गए। शहर के नीचे सीवर लाइन बनवाने के लिये वे नौ करोड़ रुपए देने कह गए। यह लाइन गंगा एक्शन योजना [...]
राजाजी राष्ट्रीय पार्क: विदेशियों के आगे क्यों लाचार थी सरकार
राष्ट्रीय अभयारण्यों के नाम पर आम जनता को उसके जल, जंगल, जमीन के अधिकारों से वंचित करने वाली सरकार कुछ सौ विदेशियों के आगे एक हफ्ते तक लाचार नजर आई। लगभग पाँच सौ की संख्या में जर्मनी, इजराइल, रूस, इटली, हंगरी और अमेरिका आदि देशों के लोगों ने बगैर किसी औपचारिक अनुमति के राजाजी राष्ट्रीय [...]
सम्पादकीय: अब ऐसी ही है राजनीति
अभी-अभी हमने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को लालू यादव और मुलायम सिंह को गाली देते और फिर माफी माँगते देखा। उससे पहले शशि थरूर को देखा हवाई जहाज के इकानॉमी क्लास को ‘कैटल क्लास’ कहते और फिर अपनी महिला मित्र के चक्कर में मंत्रिपद गँवाते देखा, फिर देखा जयराम रमेश को ऊटपटाँग वक्तव्य देते हुए। [...]
चिट्ठ्ठी – पत्री: संपादक जी आग लगना कुदरती घटना नहीं है
15 से 30 अप्रेल के अंक के संपादकीय के द्वितीय पैराग्राफ की पहली तीन पंक्तियों ‘‘जंगलों की आग से होने वाले नुकसान की समीक्षा करना यहाँ मतलब नहीं है। यह एक कुदरती चीज़ है। अतः हो सकता है कि इससे प्रकारान्तर में जंगलों के पुनर्सृजन में कुछ मदद भी मिलती हो।’’ को कई बार पढ़ने [...]
आग नहीं बुझाता वन विभाग?
हेमन्त तिवारी बागेश्वर जिले में हिमालयी बुग्यालों के साथ ही जंगलों में फैली आग के सामने वन विभाग हर वर्ष बौना साबित होता है। प्रतिवर्ष सैकड़ों हेक्टेयर जंगल जलकर स्वाहा हो जाते हैं। वन जलते रहते हैं और वन महकमा गोष्ठियाँ करने में मशगूल हो जाता है। एक अनुमान के मुताबिक अभी तक जिले में [...]
जैविक खेती पर महत्वपूर्ण पुस्तकें
अरुण डिके हमारी पारंपरिक जैविक खेती को पूरे विश्व में प्रचारित करने वाले अंग्रेज कृषि वैज्ञानिक सर अलबर्ट हॉवर्ड 1872-1940 की दुर्लभ पुस्तक ‘एन एग्रीकल्चर टेस्टामेंट’’ 1948 का हिन्दी अनुवाद ‘एक खेती का वसीयतनामा’ और सम्पूर्ण भारत में बरसों से सफल जैविक खेती करने वाले मशहूर एक हजार किसानों के नाम और पते दर्शाती ‘निर्देशिका’ [...]
वन संरक्षण की नीतियों में जनहित को नहीं दी जाती तरजीह
उत्तराखण्ड का तकरीबन 45 फीसदी भाग वनों से ढँका पड़ा है। अगर उच्च हिमालय की वनस्पतिरहित, सदा हिमाच्छादित चोटियों को छोड़ दिया जाये, तो वन यहाँ के 66 फीसदी क्षेत्रफल को घेरे हैं। भारत में कुल क्षेत्रफल का 33 फीसदी वन क्षेत्र होना पर्याप्त माना गया है। इस दृष्टि से हम एक समृद्ध राज्य हैं। [...]
आशल-कुशल : 15 मई से 31 मई 2010
समूचे उत्तराखंड में 2 मई को तड़के भूकंप के हल्के झटके महसूस किये गए। रिक्टर पैमाने पर 4.6 अंक वाले इस भूकम्प का केन्द्र बागेश्वर में था। आन्दोलनकारियों को नौकरी दिये जाने के शासनादेश को हाईकोर्ट द्वारा अमान्य कर दिये जाने से प्रदेश में एक नया बवंडर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री के हेलीकाप्टर को [...]
खाद्यान्न घोटाले में एफआईआर
कपकोट तहसील में हुए हजारों कुंतल खाद्यान्न घोटाले में विधायक शेर सिंह गड़िया के दबाव डालने के बाद अंततः प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ एफ.आई.आर. कपकोट के थाने में दर्ज करवा ही दी है। प्रशासन की इस कार्यवाही से हड़कम्प मचा हुआ है। प्रशासन के चरित्र को देखते हुए इन असली दोषियों को सजा मिल [...]
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