वे सिखाते ही नहीं, सीखते भी थे
अनिल घिल्डियाल 8 फरवरी 1977 का दिन था। बर्फ पड़ी थी गज़ब की। मैं 6 तारीख को ही नैनीताल पहुँच गया था। गीत और नाटक प्रभाग में कलाकारों की भर्ती थी। मैं गीत और नाटक प्रभाग का कलाकार चुन लिया गया। साक्षात्कार के बाद विभाग के कुछ कलाकार राजमहल होटल की सीढ़ी से उतरते हुए [...]
तब तो तुम जमीन तैयार कर रहे थे
उर्मिल कुमार थपलियाल अब क्या जो कहूँ। कवि कहाँ रह जाते हैं। रह जाता है उनका कहा लिखा। तुम तो खैर हमारी वाचिक परम्परा के थे। लिखे से ज्यादा कहा और बोला हुआ रह जाता है स्मृति में। तुम तो वैसे भी हिंदी के पहाड़ी और पहाड़ी के हिन्दी-उर्दू कवि हुए। इतने सहज, सरल स्वाभाविक [...]
लोक रंगमंच पर तो और काम कर सकते थे गिर्दा
मंजूर हुसैन लगभग 1978-79 की बात होगी। इलाहाबाद में नाट्य महोत्सव था। मैं सांस्कृतिक मंच, वेधशाला की टीम से दीप पंत और हरीश राणा इत्यादि के साथ मोहन चन्द्र जोशी द्वारा निर्देशित ‘उत्तर युद्ध’ के प्रदर्शन के लिये गया हुआ था। नैनीताल के गीत एवं नाट्य प्रभाग का दल भी आया हुआ था। रात के [...]
बच्चों को अनदेखा किया तो क्या होगा गणतंत्र का?
लोकगीत क्या होता है ? हमारे नौनिहाल पहाड़ में ही रह कर भी यह नहीं जानते। वाकया है एक टेलीविजन चैनल द्वारा आयोजित लोकगीत ऑडिशन का। रुद्रप्रयाग में आयोजित इस कार्यक्रम में दो बच्चों के गायन में बराबर नंबर आये हैं। इनके बीच अंतिम फैसला होना है। निर्णायक गैरसैंण के सरस्वती विद्यामंदिर में पढ़ रहे [...]
छिः उत्तराखण्ड के नाम पर सेक्स परोस रही है यह पत्रिका
समाज के हर क्षेत्र में आ रही नैतिक गिरावट का शिकार पत्रकारिता भी हुई है। नीरा राडिया के टेपों में तीन प्रसिद्ध पत्रकारों, प्रभु चावला, वीर सांघवी और बरखा दत्त के नाम भी सामने आए हैं। तो उत्तराखण्ड के पत्रकार भी क्यों पीछे रहें ? पिछले दिनों एक स्टॉल पर ‘उत्तराखण्ड आंदोलन’ नाम की एक [...]
अल्मोड़ा की ब्लैक-बोर्ड गाथा
अल्मोड़ा शहर में दो-तीन सार्वजनिक जगहों पर ब्लैक-बोर्ड बने हैं। एक है बस स्टेशन पर, कचहरी को जाने वाली सीढ़ियों के नीचे। दूसरा लाला बाजार में किशन गुरुरानी की दुकान के आगे। तीसरा बावन सीढ़ी वाले चौराहे में सार्वजनिक मूत्रालय की दीवार पर। इस तीसरे ब्लैक-बोर्ड की एक कहानी है। जिसे थोड़ा रुक कर कहूँगा। [...]
अश्लील एमएमएस अब बागेश्वर में
दो साल पूर्व अबोध छात्रा को अपनी हवस का शिकार बना एमएमएस बनाने वाला कलयुगी शिक्षक अंततः पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार की जेल भेज दिया है। शिक्षक की करतूत से हर कोई स्तब्ध है। दो वर्ष पूर्व बाजार में स्कूली छात्रा का एम.एम.एस. आने से हर कोई सन्नाटे [...]
बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित ग्रामीणों तथा प्रशासन में वार्ता शुरू
ईश्वर जोशी उत्तराखण्ड संसाधन पंचायत, लोक प्रबंध विकास संस्था तथा वन पंचायत सरपंच संगठन ताकुला के संयुक्त तत्वावधान में बिनसर वन्य जीव विहार से प्रभावित गाँवों की समस्याओं को लेकर एक बैठक 24 दिसम्बर 2010 को अयारपानी स्थित बिनसर अभयारण्य के राजि कार्यालय में संपन्न हुयी। बैठक में आयोजक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा भारत [...]
‘जनगणना में कुमाउनी को मातृभाषा लिखें’
अल्मोड़ा के कुन्दन लाल साह प्रेक्षागृह में 12 से 14 नवम्बर तक सम्पन्न कुमाउँनी भाषा सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किये गये और जनता से अपील की कि सभी कुमाउनी 2011 की जनगणना में ‘कुमाउनी’ को ‘मातृभाषा’ ‘हिन्दी’ को राष्ट्रभाषा लिखें। इससे कुमाउनी को मान्यता मिलेगी और कुमाउनी भाषियों की संख्या भी ज्ञात होगी। ‘कुमाउनी [...]
राज्य गठन के बाद और पिछड़ गया है पौड़ी
तड़ित घिल्डियाल उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद से पौड़ी नगर की घोर उपेक्षा के कारण स्थानीय जनता बेहद हताश है। उल्लेखनीय है कि इसी नगर से पहली बार राज्य की लड़ाई को गति मिली थी। यह नगर राज्य आन्दोलन की उर्वर धरती थी इसलिये नगर के लोगों ने सेाचा था कि राज्य बनने के बाद [...]
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