जाने नहीं देंगी उन्हें जनमानस में रची बसी उनकी यादें
उमा पंत अभी-अभी समाचार मिला कि गिरदा नहीं रहे। सत्तर-अस्सी के दशक में पति स्व. लेनिन पंत के डबल स्टोरी, न्यू राजेन्द्रनगर, नई दिल्ली, नैनीताल और फिर बाद में गोल मार्केट के फ्लैट में उनसे हुई चंद मुलाकातों के चलचित्र स्मृति में कौंध गये। आँखों में एक अजीब सी चमक और बातों में गर्म, छूता, [...]
श्रद्धांजली : गिर्दा पर कवितायें
रहेंगे याद तुम्हारे गीत एक मर्मस्पर्शी व्यक्तित्व पर्वत श्रृंखलाओं में दूर-दूर तक विचरता रहेगा इस देव भूमि में, अनगिनत हृदयों में सूक्ष्म रूप से यादों के स्पन्दन में समाया रहेगा कण-कण में, जन-जन में। सरल स्वभाव आत्मीयता से भरी आँखे आने वाली नस्लों को पहाड़ों के प्रति लगाव प्रेरणा देती रहेंगी हर मन में। हर [...]
एक लोकपर्व की त्रासदी
आधुनिकता में भटकी ‘उतरैणी’ {15 जनवरी 1978 के अंक में ‘गीराबल्लभ’ नाम से छपा यह लेख गिरदा द्वारा लिखा नैनीताल समाचार में प्रकाशित पहला गद्य है। इसमें उस साल के उतरैणी मेले में वन आन्दोलनकारियों के पहुँचने का भी जिक्र है। -सम्पादक} काले कव्वा काले, खजूरै माल खाले, ले कव्वा बड़े, मैं कै दिये सुनूं [...]
देहरादून का कलिंगा स्मारक
के. पी. काला ’मानस’ एवं पुष्पा मानस आपने देहरादून की सहस्त्रधारा रोड पर स्थित कलिंगा स्मारक जरूर देखा होगा। ये वो ’कलिंगा’ यानी उड़ीसा नहीं, जिसे सम्राट अशोक ने लगभग 260 या 265 वर्ष ईसा पूर्व जीता था। इस स्मारक का सम्बन्ध गोरखा सेनानायक बलभद्र सिंह खलिंगा थापा से है, जिसने सन् 1802-03 से 1815 [...]
आजीविका का जरिया बन रहा है पिरूल
चीड़ की पत्तियाँ, जो पिरूल के नाम से जानी जाती हैं, जंगलों में लगने वाली आग का सबसे बड़ा कारण हैं। लेकिन यही पिरूल, यानी ‘पाइनवेस्ट रौक्स बरगाई’ या ‘पाइन नीडल’ भी कहा जाता है, अब आजीविका का जरिया बन रहा है। उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई गई ग्राम्या परियोजना में पिरूल, जिसका उपयोग पहले जानवरों [...]
क्या खायें लोग ?
ऊँचाई के क्षेत्रों में फलों तथा सब्जियों का उत्पादन इस साल बहुत कम हो गया। इसका कारण बदलता हुआ पर्यावरण ही था। माल्टा, जो अब पेड़ों से दुकानों में आने लगा है, की पैदावार बहुत कम हो गई है। उसका आकार, रंग तथा छिलका भी पहले की अपेक्षा निम्न कोटि के हो गए हैं। फल [...]
पर्यावरणीय संकट का संकेत है गिद्धों का इस तरह मरना
कॉर्बेट नेशनल पार्क व आसपास से सटे जंगलों में पाए जाने वाले दुर्लभ गिद्धों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अपने वजूद के लिए विश्व भर में संघर्ष कर रहे गिद्धों की कार्बेट पार्क के आसपास के जंगलों में मौजूदगी को आशा की किरण के रूप में देखा जा रहा था। मगर इस बीच पाँच [...]
सिमट रही है गंगा की धारा
प्रवीन कुमार भट्ट गंगा इन दिनों अजीब विरोधाभासों का सामना कर रही है। एक ओर पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर टिहरी में बनाये गये भीमकाय बाँध के प्रबंधकों ने अधिक पानी रोककर जलधारा को पहले से भी सीमित कर दिया है। ठंड बढ़ने के साथ ही पहाड़ों में बर्फबारी तो खूब [...]
परम्परागत फसलों को बचायें
पहाड़ों के पारम्परिक अनाज- भट (काले और सफेद), रैंस, गुरूंस, सिमि, गुरसुंटि, सुंट, ग्यूँ, धान, जौ, उजौ, कौंण, मादिर, मडु, चुव, ध्वाग या मक्का, राजमा आदि के सही विकास और सुधार के लिये विशेष शोध, परीक्षण तथा उन्नति पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भट एक खास महत्व रखता है, क्योंकि यह शीत ऋतु का [...]

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