इतने चिन्तित थे वे अपने साथियों के लिये !
सुवर्ण रावत जहाँ न बस्ता कंधा तोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा जहाँ न पटरी माथा फोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा जहाँ न सूट-बूट का हव्वा, जहाँ न हो झूठ का दिखव्वा ऐसा हो स्कूल हमारा… ये कुछ पंक्तियां हैं गिर्दा की उस कविता की जो उन्होंने रुद्रपुर के शिक्षक वर्कशॉप में 2007-08 में सुनायी थी। [...]
गिर्दा संस्कृति के हथियार से लड़ने वाले योद्धा थे
गिरिजा पाठक गिरदा के देहान्त के बाद उनके सांस्कृतिक पक्ष पर ही अधिक बात हो रही है और उन्हें एक ऐसे सांस्कृतिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया जा रहा है, जिसका उत्तराखण्ड के जन आन्दोलनों से भी गहरा सरोकार रहा। लेकिन गिरदा वास्तव में एक सचेत राजनैतिक विचारसम्पन्न व्यक्ति थे, जिसने संस्कृति के हथियार [...]
लोक गीतों के सुर साधती उखड़ती साँसें
राजेन्द्र तिवारी सफेद दाढी, सिर परं बँधा पारम्परिक साफा, चिलचिलाती धूप में उनके कंठ से निकलते ’हुड़किया बौल‘ के जाने पहचाने स्वर। ये पहचान है 75 वर्षीय लोक कलाओं को समर्पित बुजुर्ग देवराम का। जीवन के 75 बसंत देख चुके देवराम चौखुटिया विकासखण्ड के जमराड़ में रहते हैं। हुड़के के थाप के साथ छपेली, चाँचरी, [...]
अबला नहीं रही चम्पा
डॉ. दिनेश पंत ‘‘जब मुझे ठोकरें लगने लगीं, तब मैंने अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा और आज मैं अच्छी स्थिति में हूँ। बस मैंने अपना धैर्य और हिम्मत बनाये रखे।’’ यह कहना है चम्पा देवी का। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के धौलादेवी विकासखंड के एक पिछड़े गाँव मलाड़ की रहने वाली चंपा ने गरीबी [...]
अथ पौड़ी कथा- 6 : पौड़ी में रची पुस्तकें (क)
आजादी पूर्व के दौर में पौड़ी में रहते हुए जहाँ लेखकों ने इतिहास, संस्कृति पर लिखा वहीं आजादी के बाद लेखकों ने लेखन की दूसरी विधाओं यथा कविता, कहानी, गजल, दोहा, गीत संग्रह, काव्य संग्रह को आजमाया तो संस्कृति, इतिहास, भूगोल, पर्यावरण आदि पर विषयगत पुस्तकों का भी प्रकाशन हुआ। हालांकि कुछेक को छोड़ अधिकतर [...]
मानसून में कई रूप दिखते हैं हिमालय के…
मानसून में हिमालय के कई रूप दिखते हैं। जरा सा मौसम खुले तो समूचा पहाड़ पॉलिश किया सा लगता है और वहीं पल भर में मौसम ने करवट बदली और प्रकृति का दूसरा भयावह चेहरा सामने दिखता है। तूफानी बारिश के साथ ही चारों ओर फैला कोहरा अजीब सी सिहरन पैदा कर देता है। पर्वतारोहियों [...]
चारधाम यात्रा की तैयारी शुरू
चार धामों, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्तरी और यमुनोत्तरी के खुलने में अभी कुछ सप्ताह का समय बचा हुआ है। मगर बदरी-केदार मंदिर समिति ने अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इस वर्ष के यात्रा काल के लिए समिति द्वारा 26 करोड़ 53 लाख 94 हजार का बजट रखा है। गत दिनों मंदिर समिति की ऋषिकेश में [...]
सड़कों की सर्वे में धांधली
सर्वेक्षण कार्यों का सम्पादन मजदूरों से करवाते हुए भुगतान ठेकेदारों को करना लोक निर्माण विभाग के लिये आम बात है। इसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ता हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना फेज पाँच में निर्माणाधीन मोटर मार्ग मदकोट-दारमा 20.650 किमी है। उक्त मार्ग का सर्वेक्षण कार्य किया लो.नि.वि. डीडीहाट ने लेकिन [...]
खस्ताहाल सड़कें और चार धाम यात्रा
चार धाम यात्रा से पूर्व खस्ता हाल सड़कों की नब्ज टटोलने के लिए पिछले दिनों मैं पुरोला-बड़कोट तक गया। मसूरी से यमुना पुल तक तो जैसे-तैसे मैं पहुँच ही गया, परन्तु यमुना पुल से यमुनोत्री तक का मार्ग बीच-बीच में भयावह खतरनाक और डरावना है। ऐसे उबड़-खाबड़ रास्ते में गाड़ी पर सवार होकर मौत को [...]
भगत सिंह और पाश की याद में
शहीद भगत सिंह व कवि अवतार सिंह संधू ‘पाश’ की शहादत दिवस पर 23 मार्च 2011 को क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा उत्तराखंड इकाई के तत्वावधान में ‘उत्तराखंड राज्य: दशा व दिशा’ विषय पर पर्वतीय सांस्कृतिक परिषद, पैठ पड़ाव रामनगर में एक कन्वेंशन सम्पन्न हुई। इस चर्चा में उभर कर आया कि राज्य बने एक दशक हो [...]
आपकी टिप्पणीयाँ