यात्राओं पर नियंत्रण जरूरी है
मदन उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा नवम्बर तक जारी रखने का इरादा जताया है। सामान्यतः मानसून आने के बाद पहाड़ में सड़कें टूटने से यात्रा जून में बंद सी हो जाती थी। पर इस साल मानसून ने काफी देर कर दी। पहले चार धाम का मतलब होता था पदयात्रा के साथ प्रकृति और पर्यावरण के [...]
परियोजनाओं की नहीं, विकास के तरीकों की बात करें
तडि़त घिल्डियाल उत्तराखंड की विजय बहुगुणा सरकार का ख्याल है कि प्रदेश का विकास जगह-जगह जल विद्युत योजनायें बनाकर ही हो सकता है। 24 हजार मेगावाट की क्षमता हासिल होने से यह प्रदेश आत्मनिर्भर हो सकता है। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये सरकार किसी भी सीमा तक जाने को तैयार बैठी है। यहाँ [...]
सरला बहन की याद
सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् और स्वतंत्रता सेनानी सरला बहन की पुण्यतिथि के अवसर पर लक्ष्मी आश्रम कौसानी में आयोजित ‘उत्तराखण्ड नदी बचाओ अभियान’ की वार्षिक बैठक में श्रीनगर में पर्यावरण कार्यकर्ताओं पर हुए हमले पर चिन्ता जताते हुए तय किया गया कि इस घटना का तीव्र प्रतिरोध किया जायेगा। वक्ताओं ने नदियों के विनाश व जनता के [...]
यह गुंडागर्दी कहाँ ले जायेगी ?
सीताराम बहुगुणा श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण में हो रही जालसाजी का खुलासा करने वाले प्रसिद्ध स्तम्भकार डॉ. भरत झुनझुनवाला के साथ 22 जून को मारपीट एवं बदसलूकी करने वाले लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट एवं आरोपों के ठोस प्रमाण होने पर भी अब तक पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाही नहीं की है। उल्टा [...]
पहाड़ों के लिये काल बन गई हैं जेसीबी मशीनें
उत्तराखण्ड राज्य के सपने के विपरीत 12 वर्षों के भीतर उत्तराखण्ड पूरी तरह माफिया नियंत्रित राज्य बन गया है। ये माफिया कानून की कोई परवाह नहीं करते और सरकार व प्रशासन इनके राजनीतिक संरक्षण के कारण मौन बने रहते हैं। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक राजधानी और राजनैतिक रूप से अत्यन्त सचेत माना जाने वाला अल्मोड़ा शहर [...]
कर्मी की दुर्घटना से हमने कोई सबक नहीं सीखा
प्रफुल्ल चन्द्र पन्त जनपद बागेश्वर का ग्राम कर्मी जनपद मुख्यालय से 47 किमी की दूरी पर स्थित है। समुद्रतल से 1,900 मीटर की ऊँचाई पर विकासखंड कपकोट का यह गाँव भूल एवं बैरड़ी गधेरे के मघ्य दोनों पार्श्वों पर स्थित है। इस ग्राम से गुजरने वाले भूल तथा बैरड़ी गधेरे संगम के बाद सुरण गधेरे [...]
चिट्ठी पत्री: हल्द्वानी की दुर्दशा, कौन जिम्मेवार…?
एक जुलाई 2012 के अंक में हल्द्वानी में दिन दहाड़े पड़ी हालिया डकैती की घटना को लेकर, दीप पाठक का वृतान्तहल्द्वानी के चरित्र को उजागर करता है। लेकिन यह उन लोगों के लिये कोई नयी बात नहीं है जो इस शहर के मिज़ाज को भली भाँति जानते हैं या भोगने के लिये अभिशप्त हैं। आपने [...]
छोटा मुँह छोटी बात :रिश्ता नाड़े और पेटीकोट/पाजामे के बीच…..
‘जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ यदि नेपथ्य में बज रहा हो तो संसार के सभी देश सदा महान होते हैं। भारत भी एक महान देश है। ‘मेरा भारत महान’ इसी की अभिव्यक्ति है किन्तु बीच-बीच में हम कुछ ऐसा कर बैठते हैं या हो जाता है कि ‘सौ में निनानब्बे बेईमान फिर भी मेरा भारत [...]
बारिश के भीतर बारिश है
(नैनीताल समाचार के लिए एक कवि की रिपोर्ट) पानीदार लगभग कुछ नहीं है न आंखें न चेहरे न हथियारों की धार न किरदार मेरे आसपास पानीदार लगभग कुछ नहीं है एक ऐसे समय में कह सकते हैं सूखा है अकाल है पपड़ाई मिट्टी के ढूहों से बिलखती निकलती हैं चींटियाँ दिमाग में रेंगती अचानक पानी [...]
सर्वशक्तिशाली और सर्वव्यापी हैं तराई-भाबर के गलेदार
पूर्वी छोर गौला नदी के किनारे से कटघरिया तक 10 किलोमीटर और काठगोदाम से तीन पानी तक 14 किमी, कुल 140 वर्ग किलोमीटर के इस दायरे में फैले हल्द्वानी शहर की घोषित आबादी तीन लाख के करीब है। इसमें किराये में रहने वालों की सही संख्या का आंकलन नहीं हो पाया है। हर मुहल्ले में, [...]
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