श्रावण में जागेश्वर धाम
श्रावण मास के चलते इन दिनों जागेश्वर घाम में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा है। दूरदराज से हर रोज सैकड़ों लोग परिवार सहित यहाँ आकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। जागेश्वर धाम चंद राजाओं की राजधानी रहे अल्मोड़ा शहर से उत्तर पूर्व में, समुद्र तल से 1,525 मीटर की ऊँचाई पर देवदार, बाँज-बुराँश के सघन वनों के [...]
एक अड्डे का पलायन
‘गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम। धुल के निकलेगी अभी चश्म ए महताब से रात . . .’ नैनीताल क्लब चौराहा, पाँगर के विशाल पेड़ों के ठीक नीचे बहते गधेरे से सटे व्यावसायिक भवन के अंदरुनी हिस्से का एक छोटा सा कमरा, जिसकी विशालकाय खिड़की से बहते नाले का स्वर रात के सुनसान [...]
अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी……
जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ का नाम आते ही जेहन में एक फक्कड़ और बेपरवाह से आदमी की छवि घूम जाती है। गिर्दा से हालांकि मेरी ज्यादा मुलाकातें नहीं हो पाई थीं, लेकिन आठ-दस जो भी मुलाकातें हुई, उसमें हर बार उनको कुछ अलग ही देखा और पाया। आज के चाटुकारिता और चरण वंदना वाले भीषण [...]
अब वे काले वन कानूनों को बदलना चाहते हैं
प्रीति थपलियाल 23 मार्च 2011 को आत्मरक्षा में एक गुलदार को मारने के प्रकरण में पौड़ी जनपद के रिखणीखाल विकासखण्ड का धामदार गाँव के 5 पुरुष व दो महिलाओं को जेल हुई। [देखें नैनीताल समाचार रिपोर्ट एक , रिपोर्ट दो] । उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कोटद्वार के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने ‘जन अधिकार संयुक्त [...]
बाइपास है या सिरदर्द ?
नीरज कुमार जोशी सरकारी योजनाएँ किस तरह मंथर गति से और सामान्य व्यक्ति को तरसाते-परेशान करती बनती हैं, इसका एक उदाहरण है बल्दियाखान-खुर्पाताल बाई-पास परियोजना। वर्ष 1993 में सर्वोच्च न्यायालय ने नैनीताल की माल रोड में वाहनों का दबाव कम करने का निर्देश दिया था, 1995 में उ.प्र. के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के [...]
छांगुज में लहराया तिरंगा
केशव भट्ट आईएमएफ के एक पर्वतारोही दल ने 6,322 मी. छांगुज चोटी सफलतापूर्वक फतह कर एक इतिहास रचा है। खतरनाक हिमदरारों व लगातार होने वाले एवलांचों की वजह से इस चोटी पर भारत के चार अभियान असफल हो चुके थे। 2007 में तो यहाँ एक शेरपा की एवलांच में दब जाने से मौत भी हुई। [...]
हल का विकल्प खोजें
बाँज पर्यावरण संतुलन, जैवविविधता एवं जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष है। इस सदाबहार वृक्ष की जड़ से लेकर तने तक का प्रत्येक भाग किसी न किसी रूप में उपयोगी है, अतः इसे पहाड़ का कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ग्लोबल वॉर्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में इस वृक्ष का महत्व [...]
जस की तस बनी हुई हैं केदारनाथ धाम की मुख्य समस्यायें
बिपिन सेमवाल/संदीप नेगी केदारनाथ धाम में प्रति वर्ष लाखों की तादाद में तीर्थयात्री आते हैं, परन्तु इन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यात्रा काल से पूर्व हालाँकि आला अधिकारियों द्वारा इन समस्याओं के निराकरण करने के लिये कई बार सम्बन्धित विभागों को निर्देशित किया जाता है, परन्तु इस दिशा में कोई भी ठोस [...]
किसानों की तबाही जारी है
वरुण शैलैश भूमि अधिग्रहण का संकट केवल भट्टा पारसौल तक सीमित नहीं है, जहाँ उग्र आन्दोलन के बाद जमीन अधिग्रहण राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियाँ बन गया है। आज देश में ऐसे कई अधिग्रहण क्षेत्र हैं जहाँ बिल्ली की चाल की तरह किसानों की भूमि कब्जे में की जा रही है, लेकिन वे क्षेत्र खबर नहीं [...]

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