बस सेवा न होने से जीपों की चाँदी
गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्र में मुख्य रूप से ‘गढ़वाल मंडल बहुद्देशीय सहकारी समिति’ एवं जी.एम.ओ.यू. की बसें चलती हैं। मगर मई-जून में इन्हें चार धाम यात्रा पर लगा दिया जाता है। इन दो महीनों में पहाड़वासियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। देश-परदेश से प्रवासी इन्हीं दिनों अपने पैतृक गाँव आते हैं। वे रोजगार कहीं [...]
पर्यटन को तरसता पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ जनपद को छोटा कश्मीर कह तो दिया जाता है, मगर इसी के अनुरूप कार्य होते तो आज तक यह सीमान्त क्षेत्र पर्यटन से सम्पन्न हो गया होता। चलो सरकारें तो निकम्मी साबित ही हुईं, जिन लोगों को पयर्टन से रोजी-रोटी मिलती है उनका व्यवहार ही यात्रियों के साथ अच्छा होता। पर्यटकों के बस से [...]
नैनीताल में मंटो को याद किया
एच.एस. राणा मशहूर अफसानानिगार सआदत हसन मंटो की जन्मशती पर ‘मंच दी एक्सपेरिमेंटल थियेटर’ परिवार ने ‘ए-वन एक्टर्स स्टूडियो’ मल्लीताल में 7 दिवसीय ‘मन्टोनामा’ किया। 5 मई से 11 मई तक हर शाम मंटों के कथा संसार के अजब-गजब, मानी-बेमानी जिन्दगी के अनुभवों का एहसास हुआ। इस पेशगोई में कुल मिलाकर 6 रेडियो नाटक, 10 [...]
यह नैनीताल का सीजन है प्यारे…
मनीस पाण्डे 15 मई से 30 जून तक, जब पूरा उत्तरी भारत गर्मी की आग में तप रहा होता है, तब ठंडी जलवायु के कारण लाखों पर्यटक नैनीताल का रुख करते हैं। स्थानीय भाषा में इसे ‘सीजन’ कहा जाता है। सीजन की खुमारी में न केवल पूरा बाजार रंग जाता है, बल्कि प्रशासन भी अपने [...]
रोडवेज में कमीशनखोरी
उत्तराखण्ड परिवहन निगम में किस्तों में खरीदी जा रही बसों के बेड़े में घोटाले की आहट सुनाई दे रही है। अभी तक निगम पुरानी बसों के रास्ते में खराब हो जाने को लेकर ही विवादों में था, लेकिन अब निगम की नई बसें भी आधे रास्ते में खराब हो रही हैं। गत 27 अप्रैल 2012 [...]
आखिर क्यों नहीं बुझती प्यास ?
नदियों, ग्लेशियरों और अन्य स्रोतों से पानी के लिये संपन्न माना जाने वाला उत्तराखंड आज प्यासा है। पानी की कमी ने गंभीर रूप ले लिया है। प्रदेश के पर्वतीय इलाकों के 70 प्रतिशत हिस्से के निवासियों को रोज पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। 63 प्रमुख नगरों में से 15 को भी पर्याप्त मात्रा [...]
चुपचाप चली गईं ललिता जी
शंकर सिंह भाटिया ललिता चंदोला वैष्णव 102 साल की उम्र में भी अपने लिए नहीं, बल्कि समाज की चिंता करते हुए इस दुनिया से विदा हुई। इस संवेदनहीन समाज ने उन्हें समझने की कोशिश तक नहीं की। इसके बावजूद वे समाज को कुछ देने के लिए संघर्षरत रहीं। मूल रूप से वे शिक्षाविद थीं। उ.प्र. [...]
सरकार का मुँह जोह रही हैं कबूतरी देवी
जीवन के 65 बसन्त पार कर चुकी उत्तराखण्ड की मशहूर लोकगायिका कबूतरी देवी ने पहाड़ की तीजन बाई के नाम से अपनी पहिचान बनाई। कबूतरी देवी को इस बात का रंज अब भी कचोट रहा है कि उन्हें सरकार से जो सम्मान मिलना चाहिए था, उसकी आज भी उन्हें दरकार है। 50 वर्ष पहले क्वीतड़ [...]
पिथौरागढ़ः सोते सूख रहे हैं
सुशील खत्री प्रदेश सरकार तथा पालिका प्रशासन की उदासीनता के कारण पिथौरागढ़ नगर के प्राकृतिक जल स्रोतों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। हाल ही तक केएमओयू बस स्टेशन के करीब बना धारा लोेगों से गुलजार रहा करता था। गर्मी के दिनों जब अन्य प्राकृतिक जलस्रोत सूख जाते थे, तब यहाँ के [...]
उत्तराखण्ड के सभी शिल्पी निर्विवाद रूप से अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं
पिछले दिनों उत्तराखंड के शिल्पकारों को लेकर एक अनावश्यक बहस छिड़ गई। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 में कुछ दलित जातियों सामाजिक, आर्थिक एंव शैक्षिक विकास के लिए एक अनुसूची बनाई गई और इस अनुसूची में सम्मिलित जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 सितम्बर 1976 को उन्हीं 66 [...]
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