राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के आगामी पाँच दिवसीय नैनीताल दौरे से नगर में जो हाहाकार मच गया है, उससे एक बार यह सोचने को मजबूर होना पड़ता है कि क्या अति सुरक्षा प्राप्त इतने विशिष्ट व्यक्तियों को नैनीताल जैसी छोटी जगहों पर जाना चाहिये, खास कर तब, जबकि वहाँ की अर्थव्यवस्था का आधार, सीजन, वहाँ चल रहा हो ? सुरक्षा बलों के हाथों गिरवी रख दिये गये इस शहर से अपरिचित पर्यटक तो कई किस्म की दिक्कतों से दो-चार हो ही रहे हैं, नगर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ यहाँ के स्थायी नागरिक भी किंकर्तव्यविमूढ़ हैं कि ऐसी स्थितियों में कैसे रहें।
जब डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रपति रहते हुए नैनीताल आये थे, तो एक बहुत छोटे से झुंड में नगर में कहीं भी टहलते हुए दिखाई दे जाते थे। कोई सामान्य व्यक्ति भी उनके करीब जाकर उनसे दो बातें कर सकता था। यह सच है कि तब विशिष्ट लोगों की सुरक्षा की समस्या आज जितनी गंभीर नहीं थी। लेकिन सुरक्षा की आड़ में एक शहर की जिन्दगी तबाह कर देना देश के प्रथम नागरिक की मर्यादा के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। ऊपर से यह भी कहा जा रहा है कि यह राष्ट्रपति का निजी दौरा है। बेहतर था कि महामहिम ने अपने इस निजी दौरे के लिये ऑफ सीजन का कोई वक्त चुना होता। तब नैनीताल के नागरिक ज्यादा खुले मन से अपनी राष्ट्रपति का खैर मकदम कर सकते थे।