सिडकुल बन जाने के बाद से सितारगंज में सड़क दुर्घटनाओं में अनगिनत मौतें हो चुकी हैं। सड़क के किनारों के बाद अब मुख्य बाजार मार्गों और चौराहों पर भी एक्सिडेंट होने लगे हैं। गत सप्ताह बाजार के मुख्य चौराहे पर एक ट्रक से कुचल कर परीक्षा देने घर से निकली छात्रा की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। कुछ ही समय पूर्व नगर के एक प्रसिद्ध युवा सामाजिक कार्यकर्ता एवं व्यवसायी ईश्वर चन्द की मौत हो गई थी। इसके पहले राजकीय इण्टर कालेज के पूर्व पीटीआई तथा ट्रक यूनियन के युवा कोषाध्यक्ष की सिडकुल रोड पर मौत हो गई थी।
सड़कों के किनारे चतुर्दिश बढ़ते अतिक्रमण के कारण न सिर्फ चौपहिया छोटे वाहनों को बल्कि साइकिलों, रिक्शा और यहाँ तक कि पैदल चलने वालों का भी जीना मुहाल हो गया है। फड़-खोखों, ठेलों और सब्जी, फल विक्रेताओं की बढ़ती संख्या और उनके सामने ग्राहकों की भीड़ के कारण शहर की सड़कें सिकुड़कर गलियों में बदल गई हैं। प्रशासन ने कई बार इन अतिक्रमणकारियों को सड़कों के किनारों से हटाकर अन्यत्र जमीनें दीं, परन्तु उन जमीनों को कब्जाने और उन पर दुकानें बना लेने के बाद वे फिर वापस उन्हीं स्थानों पर आ गए। कुछ लोगों ने तो प्रशासन द्वारा दी गई जमीनों को दुबारा-तिबारा, चौबारा जगह बेचकर मोटी रकमें भी बना लीं।
अतिक्रमणकारियों ने बाकायदा ‘खोखा, ठेला, फड़, एसोसियेशियन’ के नाम से संगठन बना लिया है। वोट की राजनीति के चलते न सिर्फ इस संगठन को छुटभैये नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, बल्कि क्षेत्रीय विधायक का भी इन पर वरदहस्त है। पिछले दिनों जब इन्हें उठाने का प्रयास किया गया तो विधायक थाने तथा तहसील में आकर अधिकारियों को हड़का गये। पिछली बार जब तहसील प्रशासन ने इन्हें हटाने का प्रयास किया तो इन लोगों ने तहसील प्रशासन के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। लूटपाट की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद प्रशासन की तन्द्रा भंग हुई और नगरपालिका के जिन सफाईकर्मियों पर अतिक्रमणकारियों ने हमला किया था, बाल्मीकियों ने भी उनके विरुद्ध अस्पृश्यता कानून के तहत थाने में तहरीर दे दी। हालाँकि विधायक के दबाव में सफाईकर्मियों की तहरीर दर्ज नहीं हो पाई। तहसीलकर्मियों द्वारा कई दिनों तक कार्य बहिष्कार किया गया। अन्ततः विधायक के दबाव पर समझौता हो गया और अतिक्रमणकारियों के सामने प्रशासन बौना पड़ गया। इस घटना के बाद प्रशासन बुरी तरह हताश और निराश होकर रह गया है।
शहर की जनता की माँग पर प्रशासन और पुलिस ने यहाँ दो सब इंसपैक्टरों और आठ सिपाहियों की ड्यूटी लगा दी है परन्तु बढ़ते अतिक्रमण और संकरी होती सड़कों के चलते चालक की गलती से या मशीनरी की खराबी से कभी भी वाहन अनियंत्रित हो सकता है। इन दुर्घटनाओं पर अंकुश लग पाना सम्भव ही नहीं है।